Tuesday, May 26, 2026

वर्तमान ही परमात्मा का द्वार

 वर्तमान ही परमात्मा का द्वार — ओशो के दृष्टिकोण से

ओशो कहते हैं कि मनुष्य का जीवन दो दिशाओं में बँटा रहता है—अतीत और भविष्य। कभी वह बीती हुई स्मृतियों में उलझा रहता है, कभी आने वाले कल की चिंताओं और कल्पनाओं में खोया रहता है। लेकिन इन दोनों के बीच जो सबसे अनमोल क्षण है, वह है वर्तमान। ओशो कहते हैं—“वर्तमान ही परमात्मा का द्वार है।” क्योंकि परमात्मा न अतीत में है, न भविष्य में; वह केवल इसी क्षण में उपलब्ध है।

मन हमेशा अतीत या भविष्य में भटकता है। अतीत में वह दुख, पछतावा, यादें और अनुभव लेकर बैठा रहता है। भविष्य में वह इच्छाएँ, डर, योजनाएँ और आशाएँ लेकर भागता रहता है। लेकिन वर्तमान में मन टिक नहीं पाता। यही मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या है। ओशो कहते हैं कि जो व्यक्ति वर्तमान में जीना सीख लेता है, वह परमात्मा के सबसे करीब पहुँच जाता है।

अतीत क्या है?

अतीत केवल स्मृति है। जो बीत गया, वह अब कहीं नहीं है। वह केवल मन की रिकॉर्डिंग बनकर रह गया है। लेकिन मनुष्य उसे पकड़कर बैठा रहता है—पुराने दुख, पुराने अपमान, पुराने सुख, पुरानी कहानियाँ। इससे मन भारी हो जाता है। ओशो कहते हैं कि अतीत एक बोझ है, जिसे उठाकर चलने वाला व्यक्ति कभी मुक्त नहीं हो सकता।

भविष्य क्या है?

भविष्य केवल कल्पना है। वह अभी आया ही नहीं। लेकिन मनुष्य उसकी चिंता में अपने वर्तमान को खो देता है। क्या होगा, कैसे होगा, कब होगा—इन सवालों में वह जीना भूल जाता है। ओशो कहते हैं कि भविष्य एक सपना है, और जो सपनों में खोया है, वह सत्य को नहीं जान सकता।

वर्तमान क्या है?

वर्तमान वह क्षण है जो अभी है। न जो बीत गया, न जो आने वाला है—बस यही एक जीवंत पल। यही वास्तविकता है। यही जीवन है। ओशो कहते हैं कि वर्तमान में उतरना ही ध्यान है, क्योंकि इसी क्षण में मन शांत होता है और चेतना जागती है।

परमात्मा को समझने के लिए वर्तमान को समझना जरूरी है। परमात्मा कोई भविष्य की उपलब्धि नहीं, कोई लक्ष्य नहीं, जिसे बाद में पाया जाए। परमात्मा अभी और यहीं है। लेकिन मनुष्य की आँखें अतीत और भविष्य की धूल से भरी हैं, इसलिए वह उसे देख नहीं पाता।

ओशो कहते हैं, जब तुम पूरी तरह वर्तमान में होते हो, तब मन समाप्त हो जाता है। क्योंकि मन या तो स्मृति है या कल्पना। वर्तमान में मन के लिए कोई जगह नहीं। वर्तमान में केवल जागरूकता रहती है। और वही जागरूकता परमात्मा का द्वार बन जाती है।

जैसे सूरज हमेशा आकाश में है, लेकिन बादल उसे ढक लेते हैं। वैसे ही परमात्मा हमेशा हमारे भीतर है, लेकिन विचारों के बादल उसे छिपा लेते हैं। जब विचार हटते हैं, जब मन शांत होता है, तब भीतर का प्रकाश दिखाई देने लगता है। यही वर्तमान की शक्ति है।

ओशो ध्यान की सबसे सरल परिभाषा देते हैं—“जो कुछ अभी हो रहा है, उसमें पूरी तरह जागो।”

यदि तुम चल रहे हो, तो केवल चलो। यदि खा रहे हो, तो केवल खाओ। यदि साँस ले रहे हो, तो साँस को महसूस करो। जब तुम पूरी तरह इस क्षण में उतर जाते हो, तब ध्यान घटित होता है।

मनुष्य अक्सर सोचता है कि परमात्मा को पाने के लिए मंदिर जाना होगा, पूजा करनी होगी, तपस्या करनी होगी। लेकिन ओशो कहते हैं कि परमात्मा कहीं बाहर नहीं बैठा है। वह इसी क्षण की गहराई में छिपा है। यदि तुम इस पल को पूरी तरह जी लो, तो परमात्मा स्वयं प्रकट हो जाएगा।

वर्तमान में जीना इतना कठिन क्यों लगता है?

क्योंकि मन को भटकने की आदत है। वह या तो पछतावे में जीता है या उम्मीद में। वर्तमान में टिकना उसके लिए मृत्यु जैसा है। इसलिए मन हर क्षण कहीं और भागना चाहता है। लेकिन ओशो कहते हैं कि मन की इस भागदौड़ को देखकर, केवल साक्षी बनकर, धीरे-धीरे व्यक्ति वर्तमान में उतर सकता है।

जब तुम वर्तमान में होते हो, तब तुम्हारे भीतर शांति आ जाती है। क्योंकि चिंता भविष्य की होती है और दुख अतीत का होता है। वर्तमान में न चिंता है, न दुख। वहाँ केवल मौन है, केवल अस्तित्व है।

ओशो कहते हैं कि छोटे बच्चे वर्तमान में जीते हैं, इसलिए वे इतने आनंदित दिखाई देते हैं। वे अतीत का बोझ नहीं उठाते, न भविष्य की चिंता करते हैं। उनका हर क्षण ताजा होता है, नया होता है। इसी कारण उनमें सहज आनंद होता है।

वर्तमान में जीने वाला व्यक्ति हर चीज को नए ढंग से देखता है। उसके लिए फूल केवल फूल नहीं, परमात्मा की अभिव्यक्ति बन जाता है। हवा केवल हवा नहीं, अस्तित्व का स्पर्श बन जाती है। जीवन साधारण नहीं रह जाता, वह दिव्य हो जाता है।

वर्तमान ही परमात्मा का द्वार क्यों है?

क्योंकि वर्तमान में अहंकार नहीं टिकता। अहंकार हमेशा अतीत की पहचान या भविष्य की आकांक्षा से बना होता है। वर्तमान में जब तुम केवल होते हो, तब अहंकार गिर जाता है। और जहाँ अहंकार नहीं, वहाँ परमात्मा है।

ओशो कहते हैं—“इस क्षण को पूरी तरह जी लो, क्योंकि यही अनंत का द्वार है।”

जो अभी को खो देता है, वह सब कुछ खो देता है। जो अभी को पा लेता है, वह परमात्मा को पा लेता है।

अंततः, वर्तमान केवल समय का एक हिस्सा नहीं है, बल्कि चेतना का द्वार है। जब तुम वर्तमान में उतरते हो, तो जीवन का सारा रहस्य खुलने लगता है। मन शांत होता है, हृदय खुलता है, और भीतर परमात्मा की उपस्थिति महसूस होने लगती है।

इसलिए ओशो का संदेश है—न अतीत में खोओ, न भविष्य में भागो। इस क्षण में जागो। क्योंकि वर्तमान ही परमात्मा का द्वार है।

जो इस द्वार से प्रवेश कर लेता है, वह शांति, आनंद और सत्य की पूर्णता को प्राप्त कर लेता है।

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