सुनो...
हमेशा मुझे अपने दिल मे रखना
मै कल शायद रहू ना रहू..
हमेशा मुझे अपनी यादो मे बसाना
मै कल तेरे साथ रहू ना रहू....
हमेशा मुझे तुम यूँही पढ़ते रहना
मै कल शायद लिखू ना लिखू..
हमेशा मुझे दिल मे महसूस करना
मै कल तुम्हे मिलू ना मिलू...
हमेशा मेरी ख़ामोशी को समझना
मै तुमसे कुछ कहु ना कहु...
और हमेशा मुझे यूँही चाहते रहना
मै कल तेरे पास रहू ना रहू...
.........।.........।..........।
की थी हमने एक खता अंजाने में।
उम्र लगी है ख़ुद को ये समझाने में।
शाम ढले तब दिल का दरिया बहता है,
कितने आँसू डूब गए मयख़ाने में।
तुमने चाहे एक ही ठोकर मारी थी,
सदियाँ बीतेगी मुझको पर भुलाने में।
उनका चेहरा साफ़ गवाही देता है,
बातें कितनी छुपाये बैठी फ़साने में।
एक परिंदा लौट के वापस आया है,
सावन भादो बीते कितने आने में।
आँख चुरा कर महफ़िल में वो बैठे हैं,
माहिर हम भी हँस के दर्द छुपाने में।
काँच के बर्तन,टूटें तो फिर जुड़ते कब,
रिश्ते भी बस ऐसे ही हैं ज़माने में।
'सूरज'ने भी ओढ़ ली चादर शबनम की,
रात ने कितनी ज़िद की यार मनाने में।
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