Sunday, May 31, 2026

समय की जेब में जीवन

 समय की जेब में...


समय की भी शायद

कोई जेब होती होगी।


जिसमें वह चुपचाप रख लेता होगा

वे सारे पल

जिन्हें हम बचा नहीं पाए।


वह पहली हँसी

जो अचानक बड़ी हो गई,


वह आख़िरी मुलाक़ात

जिसे हम आख़िरी समझ नहीं पाए,


वह हाथ

जो एक दिन छूट गया,


और वह सपना

जो नींद खुलने से पहले ही टूट गया।


समय कुछ नहीं कहता।


वह बस गुजरता है।


लेकिन उसके गुजरने की आवाज़

बहुत देर बाद सुनाई देती है।


पुरानी किताबों से,


अलमारी में रखे कपड़ों से,


किसी भूले हुए नंबर से,


या फिर

एक ऐसे नाम से

जिसे बरसों बाद सुनकर भी

दिल पहचान लेता है।


अजीब बात है 


जब समय हमारे पास होता है,


हम उसे खर्च करते रहते हैं।


और जब वह चला जाता है,


हम उसकी कीमत गिनते रहते हैं।


वर्षों बाद

किसी शाम की खिड़की पर बैठकर


अचानक लगता है 


कुछ लोग बिछड़े नहीं थे,


कुछ मौसम लौटे नहीं थे,


कुछ बातें अधूरी नहीं थीं,


बस समय ने उन्हें

अपनी जेब में रख लिया था।


शायद इसलिए


ज़िंदगी हमें बार-बार सिखाती है


कि हर क्षण को पकड़ना ज़रूरी नहीं,


हर रिश्ते को बाँधना ज़रूरी नहीं,


हर कहानी का पूरा होना भी ज़रूरी नहीं।


कुछ चीज़ें अधूरी रहकर ही


पूरी होती हैं।


जैसे ढलता हुआ सूरज,


जैसे दूर जाती हुई ट्रेन,


जैसे किसी की याद।


और शायद हम भी


एक दिन


समय की उसी जेब में


एक छोटी-सी स्मृति बनकर रह जाएँगे।


किसी के मन में,


किसी तस्वीर में,


किसी भूले हुए गीत में।


फिर भी,


जब तक साँसें हैं,


हमें चमकना चाहिए 


उस सिक्के की तरह


जो जेब में रहने के बावजूद


अपनी चमक नहीं खोता।


क्योंकि अंततः


समय सब कुछ ले जाता है,


पर जी हुई रोशनी नहीं।


वह कहीं न कहीं


हमारे बाद भी


जलती रहती है।॥


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