Saturday, May 30, 2026

सच बताऊं

 सच बताऊं


मै किसी इंसान को भाव नहीं देता,

न कोई फर्क पड़ता हमें किसी से,

लेकिन तुम अपना सा लगी…

पता नहीं क्यों।


मै किसी से इतना बात नहीं करता,

लेकिन तुम्हारी हर बात का जवाब देता हूँ…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी इंसान को

अपनी लेखनी में नहीं उतारा,

लेकिन तुम्हें उतार दिया…

पता नहीं क्यों।


मै रातों को जल्दी सो जाता था,

लेकिन अब तुम्हारे मैसेज का इंतज़ार रहता है…

पता नहीं क्यों।


मै किसी के ऑनलाइन-ऑफलाइन होने से

फर्क नहीं पड़ता था,

लेकिन तुम्हारा “last seen” भी देख लेता हूँ…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी की आवाज़ को

इतना महसूस नहीं किया,

लेकिन तुम्हारी खामोशी भी सुन लेता हूँ…

पता नहीं क्यों।


मै किसी को याद करने वालों में नहीं था,

लेकिन दिन में कई बार

तुम्हारा ख्याल आ जाता है…

पता नहीं क्यों।


मै लोगों से जल्दी जुड़ता नहीं,

लेकिन तुमसे दूर होने का डर लगता है…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी के लिए

दुआ में हाथ नहीं उठाए,

लेकिन तुम्हारा नाम खुद-ब-खुद आ जाता है…

पता नहीं क्यों।


मै किसी की आदत नहीं बनना चाहता था,

लेकिन तुम्हारी आदत हो गई…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी की तस्वीर

इतनी देर तक नहीं देखी,

लेकिन तुम्हें देख कर वक्त रुक जाता है…

पता नहीं क्यों।


मै खुद में रहने वाला इंसान हूँ,

लेकिन तुम्हें सब कुछ बताने का मन करता है…

पता नहीं क्यों।


मै किसी के नाराज़ होने से

परेशान नहीं होता था,

लेकिन तुम्हारा उदास होना

अंदर तक बेचैन कर देता है…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी के आने से

खुशी महसूस नहीं की,

लेकिन तुम्हारा मैसेज आते ही

चेहरे पर मुस्कान आ जाती है…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी को खोने से डर नहीं महसूस किया,

लेकिन तुम्हें खोने का ख्याल भी

डरा देता है…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी के लिए

इतना नहीं लिखा,

लेकिन तुम्हारे लिए शब्द खुद उतर आते हैं…

पता नहीं क्यों।


मै किसी का इंतज़ार नहीं करता,

लेकिन तुम्हारे रिप्लाई का करता हूँ…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी की छोटी-छोटी बातें

याद नहीं रखीं,

लेकिन तुम्हारी हर बात याद रहती है…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी को देखकर

दिल को सुकून महसूस नहीं किया,

लेकिन तुम्हें सोचते ही

मन शांत हो जाता है…

पता नहीं क्यों।


मै किसी के बिना अधूरा नहीं था,

लेकिन अब कुछ कमी सी लगती है

जब तुम बात नहीं करती…

पता नहीं क्यों।


मै किसी को अपना नहीं मानता था,

लेकिन तुम्हारे साथ

एक अजीब सा अपनापन लगता है…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी की फिक्र नहीं की,

लेकिन तुम्हें थोड़ा सा दुख भी हो

तो दिल भारी हो जाता है…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी को

इतनी इज़्ज़त से महसूस नहीं किया,

लेकिन तुम्हारे सामने

दिल खुद नरम पड़ जाता है…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी के लिए

समय नहीं निकाला,

लेकिन तुम्हारे लिए

हर वक्त निकल आता है…

पता नहीं क्यों।


मै मजबूत था बहुत,

लेकिन तुम्हारी एक खामोशी

कमज़ोर कर देती है…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी को देखकर

भविष्य नहीं सोचा,

लेकिन तुम्हारे साथ

हर सपना जुड़ जाता है…

पता नहीं क्यों।


मै किसी की मौजूदगी का आदी नहीं था,

लेकिन अब तुम्हारे बिना

सब खाली लगता है…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी को

दिल से महसूस नहीं किया,

लेकिन तुम रूह तक उतर गई…

पता नहीं क्यों।


मै किसी के लिए बदलना नहीं चाहता था,

लेकिन तुम्हारे लिए

खुद को बेहतर बनाने लगा हूँ…

पता नहीं क्यों।


मै किसी के सामने

अपनी भावनाएँ नहीं खोलता,

लेकिन तुमसे सब कह देने का मन करता है…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी के लिए

इतना धैर्य नहीं रखा,

लेकिन तुम्हारे इंतज़ार में भी सुकून मिलता है…

पता नहीं क्यों।


मै दुनिया से दूर रहता हूँ,

लेकिन तुम्हारे करीब रहना चाहता हूँ…

पता नहीं क्यों।


मैने कभी किसी के जाने से

डर महसूस नहीं किया,

लेकिन तुम्हारे दूर होने की बात भी

दिल तोड़ देती है…

पता नहीं क्यों।


मै किसी के लिए कविता नहीं बना,

लेकिन तुम्हारे लिए

हर एहसास शायरी बन जाता है…

पता नहीं क्यों।


और सबसे अजीब बात ये है कि—

मैने कभी प्रेम पर भरोसा नहीं किया,

लेकिन तुम पर हो गया…पता नहीं क्यों।



No comments:

Post a Comment