Saturday, May 30, 2026

नींद और ध्यान में क्या अंतर है

नींद और ध्यान में क्या अंतर है...

ओशो कहते हैं कि नींद और ध्यान दोनों में बाहर की दुनिया से दूरी होती है, लेकिन उनकी दिशा बिल्कुल अलग है।

नींद में व्यक्ति अचेत हो जाता है। शरीर आराम करता है, मन भी कुछ समय शांत होता है, लेकिन उसमें होश नहीं होता। नींद में आप बेखबर होते हैं, आपको पता नहीं होता कि भीतर क्या चल रहा है। इसलिए सुबह उठकर थोड़ी ताजगी मिलती है, लेकिन अज्ञान वही रहता है।

ध्यान में भी मन शांत होता है, लेकिन वहाँ पूरा होश होता है। ध्यान में व्यक्ति जागता हुआ शांत होता है। शरीर स्थिर हो सकता है, विचार रुक सकते हैं, लेकिन भीतर चेतना पूरी तरह जागृत रहती है।

ओशो कहते हैं:

नींद अचेतन शांति है।

ध्यान चेतन शांति है।

नींद में आप अंधेरे में डूबते हैं, ध्यान में आप प्रकाश में उतरते हैं।

नींद शरीर को आराम देती है,

लेकिन ध्यान आत्मा को जागृत करता है।

नींद में सपने आते हैं, मन चलता रहता है।

ध्यान में सपने नहीं, साक्षीभाव आता है।

ओशो के अनुसार, नींद प्रकृति देती है, ध्यान साधना से आता है।

नींद हर व्यक्ति को मिलती है, लेकिन ध्यान वही पाता है जो जागरूक होना सीखता है।

इसलिए ओशो कहते हैं,

“नींद में तुम खो जाते हो, ध्यान में तुम खुद को पा लेते हो।”


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