प्रेम जब हारता है, तो कोई एक शख्स नहीं हारता ,एक पूरा वजूद शिकस्त खा जाता है। हम जो मोहब्बत में नाकाम हुए लोग हैं, अक्सर अंधेरों में बैठकर सोचते हैं कि गलती कहाँ हुई? हमने तो रूह सौंप दी थी, फिर खाली हाथ क्यों रह गए?
अगर गहराई में जाकर सोचें तो समझ आता है कि हमारी नाकामी किसी बेवफाई की वजह से नहीं बल्कि हमारी अपनी भी कुछ मासूम, मगर बेहद भारी गलतियों का नतीजा थी
हमारी सबसे पहली खता यह थी कि हमने खुद को मुकम्मल तौर पर सौंप दिया। इस हिज्र और विसाल के खेल में हम यह भूल गए कि इंसानी फितरत थोड़ी सी दुश्वारी पसंद करती है। जब हम किसी के लिए हर लम्हा, हर सांस में मयस्सर हो जाते हैं, तो धीरे-धीरे हमारी शिद्दत उनकी आदत बन जाती है, और आदतें कभी तवज्जो नहीं खींचतीं। हमने अपनी अहमियत का जनाज़ा खुद अपने हाथों से निकाला, उन्हें यह यकीन दिलाकर कि हम कहीं नहीं जाने वाले।
इबादत और मोहब्बत में एक बहुत बारीक लकीर होती है, हमने उस लकीर को मिटा दिया।
हमने अपनी हस्ती, अपने ख्वाब, अपनी पसंद-नापसंद सब कुछ सामने वाले के वजूद में विलीन कर दिया। जब आप किसी को खुद से बड़ा मर्तबा दे देते हैं, जब आप खुद की नज़र में सिफर हो जाते हैं, तो सामने वाला भी आपको सिफर ही समझने लगता है। हमने यह नहीं समझा कि जो शख्स अपनी इज्जत-ए-नफ्स खो चुका हो, उससे कोई कब तक मोहब्बत कर सकता है?
हम मोहब्बत में नाकाम लोग अक्सर संवाद को संभाल नहीं पाते। कभी-कभी, हम अपनी ही तकलीफों को इस खौफ से छुपा जाते हैं कि कहीं वो रूठ न जाए। यह अंदर ही अंदर घुटने का सिलसिला एक दिन पूरे रिश्ते को मलबे में तब्दील कर देता है।
हम नाकाम लोग अक्सर आज में जीना भूल गए थे। हम तो पहले ही दिन से सेहरे, शादियों, घरों और ताउम्र साथ निभाने के हसीन ख्वाबों के बोझ तले दब गए थे। हमने उस शख्स को, जो शायद सिर्फ एक खूबसूरत हमसफर की तरह कुछ दूर साथ चलना चाहता था, उम्र भर की कसमों के पिंजरे में कैद करना चाहा। नतीजा यह हुआ कि वो इस घुटन से खौफजदा होकर हाथ छुड़ा गया।
हमारी सबसे बड़ी गलती यह थी कि हमने अपनी खुशियों की रिमोट कंट्रोल किसी और के हाथ में दे दिया। वो मुस्कुराए तो हमारी सुबह हुई, वो रूठे तो हमारी कायनात में अंधेरा छा गया। किसी एक इंसान पर अपनी पूरी ज़िंदगी के सुकून का दारोमदार रख देना सबसे बड़ी खता है। जब वो शख्स जरा सा भी डगमगाया, हमारी पूरी ज़िंदगी ताश के पत्तों की तरह ढह गई।
हम इसलिए नाकाम नहीं हुए कि हमारे इश्क में शिद्दत नहीं थी। हम इसलिए नाकाम हुए क्योंकि हमने मोहब्बत तो सीखी, लेकिन मोहब्बत की सियासत और इंसान की फितरत को समझना भूल गए। हमने समझा था कि समंदर को अपनी प्यास सौंप देंगे तो वो हमें अपना लेगा, मगर हम भूल गए कि समंदर का मिजाज सिर्फ डूबो देना होता है।
अब इस मलबे पर बैठकर रोना कैसा? बस एक तसल्ली है कि हमने जब भी किया, मुकम्मल किया। भले ही आज हम टूटे हुए हैं, लेकिन इस टूटन में भी एक पाकीज़गी है जो सिर्फ उन लोगों के हिस्से आती है, जिन्होंने बिना किसी शर्त के हारना कुबूल किया हो.....हैं ना??
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