आत्मवादी बनने का अर्थ: इसका मतलब है अपने भीतर झांकना, खुद को समझना और अपने मन-विचारों पर नियंत्रण रखना। यह जीवन जीने का एक सशक्त तरीका है।
इसके प्रमुख लाभ:
मानसिक शांति और स्थिरता: जब आप खुद को समझते हैं, तो बाहरी परिस्थितियाँ आपको कम प्रभावित करती हैं। तनाव, क्रोध और चिंता धीरे-धीरे कम होने लगती है।
सही निर्णय लेने की क्षमता: एक आत्म-जागरूक व्यक्ति भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि समझदारी से निर्णय लेता है, जिससे जीवन में गलतियाँ कम होती हैं।
आत्मविश्वास में वृद्धि: अपनी खूबियों और कमियों को जानने से आत्मविश्वास बढ़ता है और दूसरों से तुलना करने की आदत छूट जाती है।
रिश्तों में सुधार: खुद को समझने से आप दूसरों को भी बेहतर समझ पाते हैं, जिससे रिश्ते मधुर और मजबूत होते हैं।
लक्ष्य स्पष्ट होते हैं: आपको पता होता है कि जीवन में क्या चाहिए, इसलिए आप अपने मार्ग से भटकते नहीं हैं।
स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव: शांत मन से शरीर स्वस्थ रहता है, नींद अच्छी आती है और ऊर्जा बनी रहती है।
जीवन में संतोष और खुशी: बाहरी चीजों पर निर्भरता कम होती है और आंतरिक खुशी मिलती है, जिसे स्थायी सुख कहा जाता है।
निष्कर्ष: सरल शब्दों में, आत्मवादी बनने का मतलब है—खुद को जानना, खुद को सुधारना और खुद में ही संतोष पाना।
*पंच-शील* = पांच शील ।
हर शील 6 प्रकार से पालन करना चाहिए ।
वारित्त शील 3 प्रकार से
और
चारित्त शील 3 प्रकार से ।
1) स्वयं किसी प्राणियों की हत्या नहीं करें ।
2) किसी और को हत्या के लिए प्रेरित, प्रोत्साहित न करें । आदेश न दें ।
3) किसी ने हत्या की हो तो, उसका समर्थन भी नहीं करें ।
4) स्वयं प्राणियों पर दया करें ।
5) अन्य लोगों को भी प्राणियों पर दया करने के लिए प्रेरित, प्रोत्साहित करें ।
6) कोई और प्राणियों पर दया करता है तो उसका समर्थन भी करें ।
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1) स्वयं चोरी नहीं करें ।
2) किसी और को चोरी के लिए प्रेरित, प्रोत्साहित न करें ।
3) किसी ने चोरी की हो तो, उसका समर्थन भी नहीं करें ।
4) स्वयं दान दें ।
5) अन्य लोगों को दान के लिए प्रेरित, प्रोत्साहित करें ।
6) कोई और दान देता है तो उसका समर्थन भी करें ।
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1) स्वयं व्याभीचार नहीं करें ।
2) किसी और को व्याभीचार के लिए प्रेरित, प्रोत्साहित न करें ।
3) किसी ने व्याभीचार कीया हो तो, उसका समर्थन भी नहीं करें ।
4) स्वयं ब्रम्हचर्य का पालन करें, या अपने आपको अपने पति/पत्नी तक ही सीमित रखें ।
5) अन्य लोगों को भी इसलिए प्रेरित, प्रोत्साहित करें ।
6) कोई पालन करता हो तो उसका समर्थन भी करें ।
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1) स्वयं झूठ नहीं बोले ।
2) किसी और को झूठ बोलने के लिए प्रेरित, प्रोत्साहित न करें ।
3) कोई झूठ बोलता हो तो, उसका समर्थन भी नहीं करें ।
4) स्वयं सत्य बोलें ।
5) अन्य लोगों को भी सत्य बोलने के लिए प्रेरित, प्रोत्साहित करें ।
6) कोई सत्य बोलता है तो उसका समर्थन भी करें ।
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1) स्वयं मादक पदार्थों का सेवन नहीं करें ।
2) किसी और को मादक पदार्थों का सेवन करने के लिए प्रेरित, प्रोत्साहित न करें ।
3) कोई मादक पदार्थों का सेवन करता हो तो, उसका समर्थन भी नहीं करें ।
4) स्वयं सदा सजग रहें, ध्यान करें ।
5) अन्य लोगों को भी सजग रहने के लिए, ध्यान करने के लिए प्रेरित, प्रोत्साहित करें ।
6) कोई सजग रहता हो, ध्यान करता हो, तो उसका समर्थन भी करें ।
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