Saturday, May 30, 2026

संत कबीर के 5 अमर दोहे अर्थ सहित

संत कबीर के 5 अमर दोहे अर्थ सहित 


1️⃣ “बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।

जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥”

👉 सीख: दूसरों में कमी ढूँढने से पहले खुद को पहचानो।


2️⃣ “पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥”

👉 सीख: असली ज्ञान प्रेम और मानवता में है।


3️⃣ “माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।

कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥”

👉 सीख: केवल दिखावे की भक्ति नहीं, मन का बदलना जरूरी है।


4️⃣ “साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाय।

मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय॥”

👉 सीख: जरूरत भर मिले ताकि खुद भी खुश रहें और दूसरों की मदद भी कर सकें।


5️⃣ “जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान।

मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥”

👉 सीख: इंसान की पहचान उसके ज्ञान और कर्म से होती है, जाति से नहीं।


🕯️ संत कबीर के दोहे आज भी जीवन की सच्चाई और आत्मज्ञान का रास्ता दिखाते हैं।



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