संत कबीर के 5 अमर दोहे अर्थ सहित
1️⃣ “बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥”
👉 सीख: दूसरों में कमी ढूँढने से पहले खुद को पहचानो।
2️⃣ “पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥”
👉 सीख: असली ज्ञान प्रेम और मानवता में है।
3️⃣ “माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥”
👉 सीख: केवल दिखावे की भक्ति नहीं, मन का बदलना जरूरी है।
4️⃣ “साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाय।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय॥”
👉 सीख: जरूरत भर मिले ताकि खुद भी खुश रहें और दूसरों की मदद भी कर सकें।
5️⃣ “जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान।
मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥”
👉 सीख: इंसान की पहचान उसके ज्ञान और कर्म से होती है, जाति से नहीं।
🕯️ संत कबीर के दोहे आज भी जीवन की सच्चाई और आत्मज्ञान का रास्ता दिखाते हैं।
No comments:
Post a Comment