कलियुग सत्यानाश कर रहा है
कलियुग संसार का, सत्यानाश कर रहा है!
नारद मुनि का रोल, ये मोबाइल निभा रहा है!!
घर घर से चुगली का डाटा, ट्रांसफर हो रहा है!
पर नारी प्रेम है जारी, गृहस्थ सत्यानाश हो रहा है!
विसर्जन करके बहू का, सास से इलू इलू हो रहा है!
कलियुग तेरे राज में, ये सब क्या हो रहा है!!
स्वार्थ सागर में अभिभावक डूब कर,
दांपत्य सुख सुता का नष्ट कर रहा है!
दुर्मति दुर्गति सुमति जान कर!
जनक - जननी अपराध कर रहा है!
बची खुची कसर ये मोबाइल, पूरी कर रहा है!!
शिश्न उदर की क्षुधा में, अंधकासुर गति होय!
नर नारी तेरी गति से, तेरी दुर्गति होय!!
हो न सकी जो अपने पति की, वो औरों की क्या होगी!
सुख की आश में दोनों तड़फे, के रोगी के भोगी!!
दिल भीतर में आग लगी है, लंका दहन सी!
लग रही नारी नाक कटा के, दशानन बहन सी!!
जिधर देखो नजर गड़ा के, नारी उधम मचा रही है!
चिलमन हया हवा उड़ा के, पुंश्चली तांडव मचा रही है!
प्रेमी खातिर कसम मार कर, नाग डसा रही है!
बुरे संस्कार बिगड़े बोल, प्रमाण दिखा रही है!!
पति परमेश्वर पत्नि को खोजे, रावण मुस्करा रहा है!
कलियुग तेरे राज में, निकृष्ट नीच कर्म हो रहा है!
नारद मुनि - मंथरा का रोल, ये मोबाइल निभा रहा है!
कलियुग संसार का, सत्यानाश कर रहा है.......!!
No comments:
Post a Comment