कहाँ गए हमारे संस्कार....?? क्या ये सच नही कि संस्कार खत्म होते जा रहे हैं....??
अब कुछ लाइन लिख रहा हूँ उसको पढ़िए उसके बाद बताईये कि क्या मैं सही हूँ या नही...??
1. पहले जो गाने कुछ पुरुष रात के अंधेरे में मुंह छुपा कर कोठे पर जाकर सुनते थे, आज उसे हम अपने घर में बहन बेटियों के साथ सुनते हैं; जिसे हमने 'आइटम सॉन्ग्स' का नाम दिया है | समारोहों में सरेआम उत्तेजक डांस देखे जाते हैं...
2. पहले आइटम सोंग्स करने वाली अभिनेत्री को बी ग्रेड में रखा जाता था, आज 'ए ग्रेड' की अभिनेत्री ऐसी अश्लील हरकतों को पर्दे पर दिखा कर अपनी कलाकारी सिद्ध कर पुरस्कार लेती हुई दिखाई देती है...
3. पहले रतिचित्रित फिल्मों की अभिनेत्री को घृणा से देखा जाता था, अब देश के जाने माने निर्देशक उन्हे फिल्मों में ब्रेक देते हैं। अतः अब भारतीय अभिनेत्रियाँ और किशोरियों के लिए फिल्मों में ब्रेक के लिए एक नयी दिशा मिल गयी और इस दिशा में अवश्य पहल करेंगी...CID जैसी सिरियल के TV EP... और अन्य TV shows मे उनको स्थान दिया जा रहा है...
4. पहले हम शराब पीना, गाली देना, जुआ खेलना इसे निकृष्ट कृति मानते थे | अब समारोहों में सरेआम शराब पिलाई जाती है | यहां तक महिलाएं भी सरेआम शराब पीने लगी हैं | वह सब हमारे आधुनिक होने के लक्षण समझें जाते हैं...
5. पहले स्त्री के तन से आंचल न गिरे, ऐसा प्रयास माँ सिखाती थी. अब माँ अपनी बच्चियों को पूरे विश्व के सामने नग्न होने के लिए "Beauty Contest" और "Modeling" में ले जाती हैं, जहां Swimming Suit राउंड होता है और पूरे विश्व के लोग उसे आनंद से अपने परिवार के साथ देखते हैं...
6. पहले वक्षस्थल से चुनरी हट जाए तो युवती असहज अनुभव करती थी, शर्म महसूस कर तुरंत ढक लेती थी। अब तो सलवार ही गायब, और सलवार है भी तो उसमे चुनरी गायब हो रही है। वक्षस्थल ढंकने की लज्जा का प्रश्न ही नहीं। क्योंकि मिनी स्कर्ट, वन पीस, जीन्स आदि पहनने से वो लज्जा नही अपितु इसतरह मनोवैज्ञानिक रूप से सहज व्यवहार और स्वभाव आचरण पर असर डालकर व्यक्तित्व पर वैसा ही प्रभाव छोड रही है। पुरी जनरेशन पर धीमा जहर मार्केट ने उडेंल दिया है।
वाह री 'Modernisation', तूने मात्र कुछ वर्षों में हमारी लाखों वर्ष की संस्कृति को निगल लिया और भारत को 'इंडिया' बना दिया...🙄😥
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