ध्यान का अनुभव हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होता है, इसलिए विद्वानों ने ध्यान के कई तरीके बताए हैं। कोई शांत बैठकर ध्यान करता है, कोई मंत्र जप में मन लगाता है, किसी ने संभोग को भी ध्यान की तरह समझाया है, तो कोई शरीर पर ध्यान देता है। कोई सांसों पर ध्यान करता है, कोई किसी छवि को देखकर, कोई कल्पना में, कोई नींद में, तो कोई आत्म-चिंतन में इस तरह ध्यान के कई रूप बताए गए हैं।
इन सबका एक ही उद्देश्य है मन की शांति, संतुलन, जागरूकता और अपने आप के करीब आना। अगर सीधे शब्दों में कहें, तो ध्यान हमें जीवन के हर पहलू में संतुलित और ठीक रहने में मदद करता है।
हर तरीका सही है, लेकिन उसके लिए अभ्यास जरूरी है। कई बार लोग ध्यान करने के चक्कर में ही उलझ जाते हैं और खुद से ही दूर हो जाते हैं।
अगर आप किसी गुरु से जुड़े हैं, तो उनसे जुड़े रहिए और उनके बताए रास्ते पर चलते रहिए। हो सकता है कि आपको तुरंत परिणाम न मिले, लेकिन धीरे-धीरे आप वही शांति जरूर पाएंगे जिसकी आपको तलाश है।
गुरु अपने शिष्य को समझकर ही उसे आगे बढ़ाता है। शुरुआत में उसकी बातें साधारण लग सकती हैं, इसलिए कई बार साधक को लगता है कि इसमें कुछ खास नहीं है। लेकिन समय के साथ वही गुरु धीरे-धीरे उसे गहराई में ले जाता है। हाँ, मेहनत साधक को खुद ही करनी पड़ती है गुरु बस रास्ता दिखाता है और अदृश्य रूप से साथ देता है।
हमारा मन ऐसा हो गया है कि उसे हर चीज तुरंत चाहिए। अगर तुरंत कुछ न मिले, तो वह बेचैन और अशांत हो जाता है, और इससे हमारा आज और आने वाला कल दोनों प्रभावित होते हैं।
ध्यान सिर्फ करने की चीज नहीं है, यह ध्यान देने की, उसे जीने की और उसे पाने की प्रक्रिया है।
मैंने अपने गाँव में एक छोटा-सा प्रयोग किया। जब मैं सुबह अपनी गायों को जंगल छोड़ने जाता था, तो पहले मैं चुपचाप जाता था अकेले जाता और अकेले ही लौट आता।
लेकिन कुछ दिनों से मैंने एक बदलाव किया। घर से निकलते समय रास्ते में मिलने वाले लोगों को “जय सिया राम” कहना शुरू किया।
अब जो भी मुझे देखता है, वह खुद “जय सिया राम” कहता है।
इससे मुझे यह समझ में आया कि अगर “जय सिया राम” कहने से किसी को थोड़ी शांति और सुकून मिल सकता है, तो क्यों न इस छोटे-से काम को अपनाया जाए।
जबकि हर इंसान के मन में कई तरह की चिंताएं और तनाव चलते रहते हैं, ऐसे में अगर आपके एक शब्द से किसी के चेहरे पर कुछ पल के लिए भी मुस्कान आ जाए, तो वही उसके लिए सबसे अच्छा पल बन जाता है।
क्योंकि उस समय उसका ध्यान थोड़ी देर के लिए ही सही, अपनी परेशानियों से हटकर “राम” नाम पर टिक जाता है।
और आज के समय में इससे ज्यादा सरल और सकारात्मक चीज क्या हो सकती है।
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