Tuesday, February 3, 2026

दर्द और थकान होती है

 Muscular Fatigue - क्या आपको भी बिना वजह ऐसा दर्द और थकान होती है? क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि अचानक शरीर में इतना ज़्यादा दर्द होने लगे कि आप किसी से कह बैठें—


“यार, आज तो शरीर टूट गया है… ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने डंडे से मारा हो या ज़ोर-ज़ोर से मुक्के मारे हों।”


कभी ऐसा भी हुआ कि दर्द के साथ इतनी ज़्यादा थकान हो जाए कि कुछ करने का मन ही न करे?

और सबसे अजीब बात ये कि ना कोई चोट लगी, ना गिरना हुआ, ना एक्सीडेंट-फिर भी दर्द ऐसा कि मानो किसी ने आकर पीट दिया हो।


ऐसे में मन में सबसे पहला सवाल यही आता है-

“आख़िर ये दर्द आया कहां से?”


इस Post में हम इसी सवाल का जवाब आयुर्वेद के नज़रिए से समझने वाले हैं।

साथ ही ये भी जानेंगे कि


ये दर्द क्यों होता है

शरीर के अंदर क्या गड़बड़ चल रही होती है

और आयुर्वेद में इसका इलाज क्या बताया गया है

साथ ही घर पर आप क्या-क्या कर सकते हैं


आयुर्वेद में दर्द को कैसे देखा जाता है?

आयुर्वेद में किसी भी बीमारी या दर्द को समझने का बेस बहुत साफ़ है-

वात, पित्त और कफ।


दुनिया की कोई भी बीमारी हो, किसी भी तरह का दर्द हो-

आयुर्वेद उसे इन्हीं तीन दोषों के आधार पर समझता और ट्रीट करता है।


अब हर तरह का दर्द, चाहे वो सिर का हो, दांत का हो, कमर का हो, घुटनों का हो, मसल्स का हो, जॉइंट्स का हो या फिर नर्व्स से जुड़ा दर्द-

आयुर्वेद के अनुसार उसका मूल कारण हमेशा वात होता है।


यह बात बिल्कुल क्लियर है।


जब दर्द ऐसा लगे जैसे डंडे या मुक्कों से मारा गया हो

वात अलग-अलग तरह से शरीर में दर्द पैदा करता है।

लेकिन एक खास तरह का दर्द ऐसा होता है जिसमें-


पूरे शरीर में टूटन महसूस होती है

मांसपेशियों में बहुत ज़्यादा दर्द होता है

ऐसा लगता है जैसे किसी ने ज़ोर-ज़ोर से मारा हो

और साथ में असहनीय थकान रहती है

मानो शरीर में जान ही नहीं बची हो।


आयुर्वेद कहता है, ऐसा दर्द तब होता है जब

वात बढ़कर शरीर की दो खास धातुओं में जाकर बैठ जाता है।


कौन-सी दो धातुएं ज़िम्मेदार हैं?

इन दो धातुओं के नाम हैं-


मांस धातु

मेद धातु


आयुर्वेद में कुल 7 धातुएं बताई गई हैं-

रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र।


सरल भाषा में समझें तो-


मांस धातु को हम मसल्स से जोड़ सकते हैं

मेद धातु को फैट टिश्यू से


जब बढ़ा हुआ वात इन दोनों धातुओं में प्रवेश करता है,

तब दर्द ऐसा लगता है जैसे डंडे या मुक्कों से मारा गया हो,

और शरीर में ज़बरदस्त थकान छा जाती है।


आयुर्वेद का श्लोक क्या कहता है?

आचार्य चरक ने इसे बहुत ही साफ़ शब्दों में बताया है।


चरक संहिता, चिकित्सा स्थान, अध्याय 28 में कहा गया है-


“दण्ड-मुष्टि हतं तथा सरुक् श्रम अत्यर्थम्

मांस-मेदो गते अनिले”


अर्थात-

जब वात मांस और मेद धातु में चला जाता है,

तो व्यक्ति को ऐसा दर्द और थकान होती है

जैसे उसे डंडे या मुक्कों से मारा गया हो।


आखिर वात बढ़ता क्यों है?

अब सवाल उठता है-

इतना वात बढ़ा कैसे?


इसके पीछे कई लाइफस्टाइल कारण होते हैं, जैसे-


ज़रूरत से ज़्यादा शारीरिक मेहनत

बहुत भारी वजन उठाना

ओवर-एक्सरसाइज़ या वेट ट्रेनिंग

लगातार ट्रैवल करना

रात में देर तक जागना

नींद पूरी न होना

लगातार मानसिक तनाव

ठंडी हवा, AC या पंखे में ज़्यादा देर बैठना

रूखा-सूखा खाना

लंबे उपवास

भूख लगने पर खाना टालना

पेशाब या मोशन को रोककर रखना

ये सभी आदतें शरीर में वात को तेज़ी से बढ़ाती हैं।


आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट क्या है?

आचार्य चरक ने सिर्फ कारण ही नहीं, इलाज भी बताया है।


1. विरेचन (Panchkarma)

सबसे पहले बताया गया है-

विरेचन।


विरेचन का मतलब है शरीर की गहरी सफाई।


इसमें-


कुछ दिनों तक घी का सेवन कराया जाता है

फिर पूरे शरीर की मालिश

और उसके बाद विशेष तरीके से लूज़ मोशन्स के ज़रिए शुद्धि


ये प्रक्रिया हमेशा अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख में ही होनी चाहिए।


2. बस्ति चिकित्सा

विरेचन के बाद

बस्ति यानी मेडिकेटेड एनीमा।


यह वात को कंट्रोल करने की सबसे प्रभावी थैरेपी मानी जाती है,

खासकर जब वात मांस और मेद धातु में बैठ गया हो।


घर पर क्या कर सकते हैं?

अब सबसे ज़रूरी सवाल-

घर पर हम क्या करें?


1. रोज़ाना अभ्यंग (तेल मालिश)

अभ्यंग यानी तेल से मालिश।

यह वात को शांत करने का सबसे आसान और असरदार तरीका है।


आयुर्वेद कहता है-

जो व्यक्ति रोज़ अभ्यंग करता है—


उसे जल्दी बुढ़ापा नहीं आता

थकान कम होती है


और वात के रोग नहीं होते


2. कौन-सा तेल?

सबसे बेस्ट-

तिल का तेल, खासकर ठंड के मौसम में।

अगर काले तिल का तेल मिल जाए तो और भी अच्छा।


नहाने से पहले पूरे शरीर की मालिश करें।


खाने में क्या शामिल करें?

लहसुन

लहसुन वात को कम करता है और मांस-मेद धातु पर काम करता है।


3–5 लहसुन की कलियां

तिल के तेल में हल्का सेंककर

खाने के साथ लें


दही

अच्छी तरह जमा हुआ दही—


उष्ण

स्निग्ध

वातशामक


हफ्ते में 2–3 बार ज़रूर लें, पर दिन में रात में नहीं।


उड़द का वड़ा

उड़द वात पर बेहतरीन काम करता है।

घर पर बना मेंदू वड़ा इस दर्द में मददगार हो सकता है।


लाइफस्टाइल में ज़रूरी बदलाव


पूरी नींद लें

ओवर-एक्सरसाइज़ से बचें

थकान होने पर रुकें

बेवजह खुद को ज़्यादा न झोंकें

ठंड और ड्राफ्ट से बचाव करें


दूध वाला उपाय

अगर दूध सूट करता है, तो-


1 ग्राम पिप्पली पाउडर

दूध + पानी में उबालकर

पी सकते हैं


यह वात और दर्द दोनों में मदद करता है।


अंत में

अगर दर्द ऐसा है जैसे किसी ने डंडे या मुक्कों से मारा हो

और साथ में गहरी थकान भी है-

तो इसे हल्के में न लें।

यह मांस और मेद धातु में बढ़े वात का संकेत हो सकता है।


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