Thursday, February 5, 2026

पेट में गैस बनती है और कब्ज की समस्या

 Isabgol for Vata - क्या वात प्रकृति वाले इसबगोल ले सकते हैं? वात प्रकृति, कब्ज और इसबगोल को लेकर सबसे बड़ा कन्फ्यूजन - अगर आपकी प्रकृति वात की है, यानी शरीर में रूखापन रहता है, जोड़ों में कड़क-कड़क की आवाज़ आती है, 


पेट में गैस बनती है और कब्ज की समस्या बार-बार परेशान करती है, तो आपके मन में एक सवाल ज़रूर आता होगा।


कब्ज होने पर क्या इसबगोल लेना सही है?


लोगों का सबसे बड़ा डर यही होता है कि इसबगोल की तासीर ठंडी मानी जाती है। तो क्या यह वात को और बढ़ा देगा?

क्या इससे पेट और ज़्यादा फूल जाएगा?

और सबसे आम सवाल, क्या इसकी आदत पड़ जाती है?


इस Post में हम आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों और आधुनिक साइंस की रिसर्च के आधार पर इन सभी सवालों का जवाब जानेगें। साथ ही इसबगोल लेने का वह सही और सुरक्षित तरीका भी जानेगें, जो खासतौर पर वात प्रकृति वालों के लिए अमृत जैसा काम करता है।


क्या वात प्रकृति वाले इसबगोल ले सकते हैं?

सीधा और साफ़ जवाब है — हां, बिल्कुल ले सकते हैं।

इतना ही नहीं, सही तरीके से लिया जाए तो यह वात रोगियों के लिए सबसे बेहतरीन औषधियों में से एक है।


आयुर्वेद के अनुसार इसबगोल का स्वाद मधुर यानी मीठा होता है और पाचन के बाद भी इसका प्रभाव मधुर ही रहता है।

और आप जानते हैं, मीठा स्वाद वात को शांत करता है।


वात का मुख्य गुण है रूखापन। जब आंतें सूख जाती हैं, तो मल सख़्त हो जाता है और कब्ज होती है।

इसबगोल में दो बहुत महत्वपूर्ण गुण होते हैं।

पहला स्निग्ध, यानी चिकनाई देने वाला।

दूसरा पिच्छिल, यानी लिसलिसापन पैदा करने वाला।


ये दोनों गुण आंतों में नमी लाते हैं, जो वात के रूखेपन को खत्म करने में सबसे ज़्यादा मदद करते हैं।


ठंडी तासीर से वात बढ़ेगा या नहीं?

अब आते हैं उस डर पर, जो ज़्यादातर लोगों को रोक देता है।


यह सच है कि इसबगोल का वीर्य शीत यानी ठंडा होता है।

अगर आप इसे ठंडे पानी के साथ लेंगे, तो यह वात को बढ़ा सकता है और पेट में मरोड़, गैस या असहजता पैदा कर सकता है।


लेकिन आयुर्वेद का एक बहुत बड़ा सिद्धांत है — संस्कार और अनुपान।

मतलब, आप किसी चीज़ को किसके साथ लेते हैं, यह उसके प्रभाव को पूरी तरह बदल सकता है।


वात की कब्ज में असली समस्या ठंडक नहीं, बल्कि रूखापन होता है।

इसबगोल की चिकनाई उस रूखेपन को खत्म कर देती है।

और जो ठंडी तासीर है, उसे हम गर्म दूध और घी के साथ पूरी तरह बैलेंस कर देते हैं।


आगे हम इसका सही तरीका विस्तार से समझेंगे।


क्या इसबगोल की आदत पड़ जाती है?

यह सवाल भी बहुत ज़रूरी है।


सच यह है कि केमिकल रूप से इसबगोल की लत नहीं लगती।

बाज़ार में मिलने वाले कई कब्ज के चूर्ण जैसे सनायुक्त चूर्ण या तेज़ दवाइयां आंतों की नसों को इरिटेट करती हैं।

इससे आंतें धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं।


इसबगोल ऐसा नहीं करता।

यह केवल फाइबर का एक बल्क बनाता है, जिससे मल को बाहर निकलने में आसानी होती है।


लेकिन वात प्रकृति वालों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है।

रिसर्च बताती है कि अगर इसबगोल को रोज़ाना कई महीनों तक लिया जाए, तो यह भोजन से कैल्शियम और आयरन को सोख सकता है।


वात प्रकृति वालों की हड्डियां पहले से ही नाज़ुक होती हैं।

इसलिए इसे आदत न बनाएं।

जब ज़रूरत हो तभी लें और बीच-बीच में ब्रेक ज़रूर दें।


वात प्रकृति के लिए इसबगोल लेने का गोल्डन तरीका

अब ध्यान से नोट कीजिए।

यह तरीका वात वालों के लिए Golden rule  है।


वात की कब्ज में इसबगोल को कभी भी सूखे या ठंडे पानी से नहीं लेना चाहिए।


एक गिलास गर्म दूध लें।

गाय का दूध सबसे अच्छा माना जाता है।

इसमें एक चम्मच देसी घी मिलाएं।

घी वात का सबसे बड़ा दुश्मन है।


अब इसमें एक चम्मच इसबगोल डालें और तुरंत पी लें।


अगर आपको दूध नहीं पचता, तो आप तेज़ गर्म पानी में घी मिलाकर, फिर उसमें इसबगोल डालकर भी ले सकते हैं।

घी डालना बहुत ज़रूरी है क्योंकि यह आंतों को स्नेहन देता है, यानी अंदर से लुब्रिकेशन करता है।


कब इसबगोल बिल्कुल नहीं लेना चाहिए?

कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं, जहां चाहे कब्ज कितनी भी हो, इसबगोल नहीं लेना चाहिए।


अगर आपकी जीभ पर मोटी सफेद परत जमी हो,

मल बहुत चिपचिपा और बदबूदार हो,

तो आयुर्वेद में इसे आम यानी टॉक्सिन्स कहा जाता है।


इसबगोल गुरु यानी भारी होता है।

ऐसी स्थिति में यह पचेगा नहीं और समस्या और बढ़ा देगा।


पहले पाचन को ठीक करें।

सोंठ का पानी या जीरा पानी लें।

जब आम साफ हो जाए, तभी इसबगोल शुरू करें।


Conclusion

वात प्रकृति वाले लोग इसबगोल ले सकते हैं और लेना उनके लिए फायदेमंद भी हो सकता है।

बस सही तरीके से लेना ज़रूरी है।


हमेशा गर्म दूध या गर्म पानी और घी के साथ लें, ताकि इसकी ठंडी तासीर बैलेंस हो जाए।

इसकी केमिकल लत नहीं लगती, लेकिन लंबे समय तक लगातार लेने से बचें।

इसे रात में सोते समय लें, भोजन के साथ नहीं।



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