Thursday, February 5, 2026

दाद खाज खुजली

 Urticaria - दाद खाज खुजली - शरीर पर अचानक खुजली, लाल चकत्ते और जलन – आखिर होता क्यों है? बहुत लोगों के साथ ऐसा होता है कि अचानक शरीर पर तेज़ खुजली शुरू हो जाती है। खुजली के थोड़ी देर बाद वहां लाल-लाल उभरे हुए चकत्ते निकल आते हैं। 


कई बार इतना दर्द और जलन होती है कि ऐसा लगता है जैसे किसी ने चींटी या मधुमक्खी काट ली हो। कुछ मामलों में तो पूरा एरिया सूज जाता है और वहां मोटा-सा उभार बन जाता है।


ऐसी हालत में हम क्या करते हैं?

कोई घरेलू नुस्खा, कोई आयुर्वेदिक चूर्ण, कोई सिरप, कभी हरिद्राखंड, कभी महामंजिष्ठादि—लेकिन कई बार फायदा होता ही नहीं।


तो सवाल ये है


ये चकत्ते आखिर क्यों उठते हैं?

हर बार दवा लेने के बाद भी आराम क्यों नहीं मिलता?

क्या सबका कारण एक ही होता है?

और सबसे ज़रूरी—सही इलाज क्या है और सही डाइट क्या होनी चाहिए?


 हम इसी को आयुर्वेद के नज़रिये से साफ-साफ समझेंगे।


मौसम बदलते ही खुजली क्यों शुरू हो जाती है?

कई लोगों को खासकर


ठंड शुरू होते ही

बारिश के मौसम में

या फिर ठंडी हवा, पंखा, AC लगते ही


शरीर पर खुजली और लाल चकत्ते निकलने लगते हैं।

कई बार ऐसा भी होता है कि कोई खास मौसम नहीं—बस ठंडी चीज़ का contact हुआ और reaction शुरू।


डर्मेटोलॉजी की भाषा में इसे आमतौर पर Urticaria कहा जाता है।

आम बोलचाल में लोग इसे एलर्जी या चकत्ते कहते हैं।


यह समस्या दो तरह की होती है👇


Acute (तीव्र) – 6 हफ्ते से कम

Chronic (पुरानी) – 6 हफ्ते से ज्यादा


Acute में अक्सर किसी चीज़ से एलर्जी होती है—जैसे दूध, ठंडी चीज़ें, चॉकलेट वगैरह।

Chronic में कई बार अंदरूनी बीमारी, यहां तक कि गंभीर रोग भी कारण बन सकते हैं।


आयुर्वेद में ये एक नहीं, तीन अलग बीमारियाँ हैं

यहीं सबसे बड़ा confusion होता है।

Modern science इसे एक disease मानती है, लेकिन आयुर्वेद में इसे तीन अलग-अलग बीमारियों में बांटा गया है, जिनके लक्षण मिलते-जुलते हैं लेकिन कारण और इलाज अलग है।


वो तीन बीमारियाँ हैं

शीतपित्त

उदर्द

कोठ


तीनों में लाल चकत्ते, खुजली, जलन दिखती है—इसीलिए मरीज और कई बार डॉक्टर भी कंफ्यूज़ हो जाते हैं।


शीतपित्त – जब ठंडी हवा दुश्मन बन जाए

कब होता है?


ठंडी हवा लगते ही

नहाकर तुरंत पंखे के नीचे बैठने से

AC या ठंडी चीज़ों के contact से


Western Science क्या कहती है?

इसे Hunting Reaction कहते हैं।

ठंडी लगते ही blood vessels सिकुड़ती हैं, फिर अचानक फैलती हैं, फिर दोबारा सिकुड़ती हैं।

कुछ लोगों में इसी process से allergic reaction शुरू हो जाता है।


आयुर्वेदिक कारण

ठंडी हवा से वात दोष बिगड़ता है, पित्त दब जाता है और body में reaction शुरू हो जाता है।

इसलिए इसे कहा जाता है शीत + पित्त = शीतपित्त।


शीतपित्त में क्या करें? (घरेलू उपाय)


अदरक + गुड़ का पानी

1 गिलास पानी

1 चम्मच गुड़

कूटा हुआ अदरक

उबालकर आधा करें और 5-5 मिनट में 2-2 चम्मच पीएं।


सरसों के तेल से मालिश


सरसों का तेल + चुटकी सेंधा नमक

हल्का गरम करके शरीर पर लगाएं

ठंड को काटने में जबरदस्त काम करता है।


त्रिकटु चूर्ण


आधा चम्मच दूध में उबालकर

या

1-2 चुटकी शहद के साथ


लहसुन और हल्दी

दोनों गर्म तासीर के हैं और skin reactions में मदद करते हैं।


ध्यान रखें:

शीतपित्त में पित्त को ठंडा नहीं करना, बल्कि वात को संतुलित करना ज़रूरी है।


उदर्द – मौसम बदलते ही शुरू होने वाली परेशानी

कब होता है?

जनवरी से मार्च

ठंड खत्म होकर गर्मी शुरू होने पर

खासकर वसंत ऋतु में


खास पहचान

मीठा खाते ही खुजली बढ़ना

लाल बड़े-बड़े चकत्ते

जलन, कभी-कभी बुखार

यहां कफ दोष ज्यादा बिगड़ा होता है।


उदर्द में क्या करें?

अजवाइन + गुड़ का काढ़ा

2 गिलास पानी

1 चम्मच अजवाइन

गुड़ का टुकड़ा

उबालकर आधा करें, 5-5 मिनट में पीएं।


गिलोय

काढ़ा 20–30 ml सुबह खाली पेट

या

पाउडर 3–4 ग्राम गर्म पानी के साथ

सरसों के तेल से मालिश

डाइट में तीखापन बढ़ाएं


काली मिर्च + गुड़ की छोटी गोलियां

मीठा, खट्टा, नमक और दूध से परहेज


कोठ – बारिश और एसिडिटी से जुड़ी बीमारी

कब होता है?

बरसात के मौसम में


ज्यादा खट्टा, फर्मेंटेड खाना

बार-बार एसिडिटी वालों में

यहां पित्त और कफ दोनों बिगड़े होते हैं।


कोठ में क्या करें?

कड़वी चीजें ज्यादा लें


गिलोय

आंवला + सोंठ

लोकल application में घी

घी + काली मिर्च पाउडर

(गरम तेल नहीं)

एसिडिटी कंट्रोल करें


एक ही लक्षण, लेकिन इलाज अलग-अलग

यही सबसे जरूरी बात है

तीनों में दिखने वाले symptoms लगभग same हैं,

लेकिन


शीतपित्त में ठंड से बचाव

उदर्द में कफ कम करना

कोठ में पित्त-एसिडिटी कंट्रोल


जरूरी है।


गलत दवा = कोई फायदा नहीं।


पंचकर्म कब ज़रूरी होता है?

अगर बार-बार हो रहा है, दवाओं से आराम नहीं मिल रहा, तो


शीतपित्त – विरेचन

उदर्द – वमन

कोठ – रक्तमोक्षण (ब्लड डोनेशन जैसी प्रक्रिया)


ये सब अनुभवी आयुर्वेद डॉक्टर की निगरानी में ही कराएं।


आख़िरी बात

जिसे हम आम भाषा में “एलर्जी” या “Urticaria” कहते हैं,

आयुर्वेद में वो तीन अलग-अलग बीमारियाँ हो सकती हैं।


सही पहचान + सही इलाज = पूरा आराम।


#क्या बताती है,शरीर में होने वाली खुजली,किस अंग के बीमार होने का क्या लक्षण...


🔴 1) त्वचा (Skin) — सबसे आम कारण

संकेत देता है: त्वचा रोग / एलर्जी


लाल चकत्ते, दाने, सूखापन


फंगल इन्फेक्शन, स्केबीज, एक्जिमा

संभावना अधिक जब खुजली केवल त्वचा पर हो।


🟡 2) लीवर (Liver) — गंभीर संकेत हो सकता है

संकेत देता है: लीवर की कमजोरी या पित्त (Bile) की समस्या


खासकर रात में ज्यादा खुजली


आंखें/त्वचा पीली (पीलिया)


गहरे रंग का पेशाब

👉 ऐसी खुजली में दाने नहीं होते, बस जलन/खुजली रहती है।


🔵 3) किडनी (Kidney) — यूरिया बढ़ने का संकेत

संकेत देता है: किडनी की समस्या


पूरे शरीर में सूखापन + खुजली


थकान, पैरों में सूजन


पेशाब में बदलाव


🟣 4) थायरॉइड (Thyroid) — हार्मोन असंतुलन

संकेत देता है: थायरॉइड की गड़बड़ी


त्वचा रूखी, खुरदरी


बाल झड़ना, वजन में बदलाव


ज्यादा पसीना या ठंड लगना


🟢 5) रक्त (Blood) — खून से जुड़ी बीमारियाँ

संकेत देता है: आयरन की कमी / एलर्जी


बिना दाने के खुजली


कमजोरी, चक्कर आना


⚠️ कब डॉक्टर को दिखाएँ?

अगर खुजली:


2–3 हफ्ते से ज्यादा रहे


रात में बहुत बढ़ जाए


पीलिया, सूजन, वजन घटने के साथ हो


🔵 6) आँत (Intestine / Gut) — पाचन की गड़बड़ी

संकेत देता है: पेट/आँत की समस्या


गैस, कब्ज, एसिडिटी


खाने के बाद खुजली बढ़ना


बार-बार एलर्जी जैसा रिएक्शन

👉 खराब पाचन से शरीर में टॉक्सिन बढ़ते हैं → खुजली होती है।


🟠 7) पैंक्रियास (Pancreas) — शुगर/पित्त से जुड़ा संकेत

संकेत देता है: शुगर असंतुलन या पित्त समस्या


बार-बार खुजली, खासकर जननांग/कमर के आसपास


ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब


मीठा खाने की तीव्र इच्छा


🟣 8) नर्वस सिस्टम (Nerves) — नसों की कमजोरी

संकेत देता है: नर्व प्रॉब्लम


बिना दाने के चुभन जैसी खुजली


जलन, झनझनाहट, सुन्नपन


खास जगह पर बार-बार खुजली


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