Flaxseed Oil - Flaxseed oil - वात की बीमारियों का आयुर्वेदिक समाधान – अलसी का तेल - हम बात करेंगे वात दोष और उससे जुड़ी हर बीमारी के लिए एक सबसे प्रभावशाली तेल के बारे में।
आयुर्वेद में जब भी किसी बीमारी का इलाज किया जाता है, उसका बेस होता है दोष – वात, पित्त और कफ। लेकिन इन तीनों में सबसे ताकतवर और नियंत्रक कौन है? इसका जवाब है वात।
वात इतना महत्वपूर्ण है कि मन, बुद्धि, इंद्रियां, हार्मोन्स और शरीर की हर छोटी-सी एक्टिविटी – जैसे अंगुली हिलना, पलक झपकना – सब वात नियंत्रित करता है।
वात दोष से होने वाली सामान्य परेशानियां
जोड़ों का दर्द (ऑस्टियोआर्थराइटिस, रुमेटॉइड आर्थराइटिस)
मसल्स सूखना, घुटनों का ग्रीस खत्म होना
पेट में गैस, कब्ज, मल कड़क होना
पीरियड्स के दौरान दर्द और सूखापन
ड्राई स्किन, ड्राई हेयर, डैंड्रफ
वजाइनल ड्राइनेस और संबंध के दौरान दर्द
कान में घंटी बजने जैसा साउंड, सिर दर्द, हेडेक
वात दोष से जुड़ी ये सारी परेशानियां शरीर में सूखापन और हल्का होने के कारण होती हैं।
आयुर्वेद में अलसी – अतिसी / Flax Seeds
नाम और पहचान:
हिंदी: अलसी
मराठी: जवस
अंग्रेजी: Flax Seeds
गुजरात: मुखवास के रूप में उपयोग
विशेषताएँ:
गुरु (भारी)
स्निग्ध (चिकना)
उष्ण प्रकृति
काम करने का तरीका:
वात जो हल्का, ठंडा और सूखा होता है, उसे भारी, चिकना और गर्म प्रकृति वाला अलसी तेल संतुलित करता है।
पेट, स्किन, हेयर और जोड़ों में सूखापन और दर्द को कम करता है।
मल को नरम करता है और कब्ज को दूर करता है।
अलसी के तेल के लाभ
1. पेट और मल संबंधी परेशानियां
कब्ज, कड़क मल, पेट में गैस
इस्तेमाल: 2 चम्मच अलसी का तेल + आधा चम्मच नींबू, गर्म करके खाने से राहत
2. त्वचा और मसल्स
ड्राई स्किन, एसी पंखे में बैठने से सूखापन, मसल्स कमजोरी
मालिश में इस्तेमाल करने से सूखापन और दर्द कम होता है
3. महिलाओं के लिए
पीरियड्स से पहले दर्द और क्रैंप
वजाइनल ड्राइनेस, संबंध के दौरान दर्द
उपयोग: बस्ती (एनिमा) या पिचू – कॉटन को तेल में भिगोकर 5–15 मिनट लगाने से राहत
4. पुरुषों के लिए
अत्यधिक हस्त मैथुन के कारण पेन या सूखापन
वृषण (टेस्टिस) और वेरिकोसाइल जैसी तकलीफें
5. जोड़ों और हड्डियों के लिए
घुटनों और एड़ियों का दर्द, सूखापन
मालिश करने से जोड़ और मसल्स मजबूत होते हैं
6. बाल और स्किन
ड्राई डैंड्रफ, सूखे बाल
एसी पंखे या ठंडी हवा से सिर दर्द
7. कैंसर में भी उपयोग
बुडविग प्रोटोकॉल के अनुसार, अलसी तेल और मक्खन रोगी को दिया जाता है
वात दोष के कारण अनियंत्रित सेल ग्रोथ को नियंत्रित करने में मदद
अलसी का तेल किसके लिए सही नहीं
पहले से कफ और पित्त अधिक होने वालों को एलसी तेल नहीं लेना चाहिए
जैसे एसिडिटी, ज्यादा पसीना, गर्मी, मुंह में छाले
आंखों की समस्या होने पर भी सीधा सेवन ना करें
सेफ्टी टिप:
मक्खन (देसी गाय का) के साथ लेने से एलसी तेल सुरक्षित बनता है
वात प्रकृति वाले लोग इसे रोज़ाना 1 चम्मच मक्खन के साथ ले सकते हैं
उपयोग का तरीका
ओरल सेवन:
1–2 चम्मच अलसी तेल + आधा चम्मच नींबू या मक्खन, खाने से पहले
मालिश:
जोड़ों, एड़ियों, मसल्स और ड्राई स्किन पर
पिचू / बस्ती:
वजाइनल ड्राइनेस, कब्ज और पेन के लिए
कॉटन को तेल में भिगोकर 5–15 मिनट प्रभावित जगह पर रखें
भुने बीज:
कब्ज या लूज मोशन रोकने के लिए
बालों और स्किन की मजबूती के लिए
Conclusion
वात से जुड़ी हर परेशानी – पेट, जोड़ों, स्किन, बाल, पीरियड्स, पुरुष या महिला की तकलीफ – में अलसी का तेल एक भारी, स्निग्ध और गर्म प्रकृति वाली आयुर्वेदिक दवा है।
रोज़ाना सेवन और सही तरीके से इस्तेमाल करने से वात दोष नियंत्रित होता है
शरीर में सूखापन, दर्द और कब्ज कम होते हैं
हड्डियों, मसल्स, बाल, स्किन और पेट की समस्याओं में सुधार आता है
टिप: हमेशा अपने दोष के अनुसार मात्रा और तरीका चुनें – पित्त और कफ ज्यादा होने पर सावधानी बरतें।
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