Monday, February 2, 2026

पिता और प्रेम

 पिता

ग़म की गठरी को उठा खुशियाँ लुटाता है पिता

दर्द सिने में हमेशा ही छिपाता है पिता।।

         ज़िन्दगी के घूँट कड़वे खुद हलाहल पी रहा

      अपने बच्चों को मगर अमृत पिलाता है पिता।।

टूटने देता नही वो ख़्वाब बच्चों के कभी

जोड़ने में हर खुशी खुद टूट जाता है पिता।।

        ज़िन्दगी के इस तलातुम में कभी जो खो गए

         हौसला बन कर के खुद रस्ता दिखाता है पिता।।

भीड़ से दुनियाँ के मेले में बचाने के लिए

अपने काँधे पर बिठा कर के घुमाता है पिता।।

          डर नही रहता ज़माने भर के तूफानों का भी

          नीव होती गर है माँ जो छत ये होता है पिता।।

हो विदा फुलों की डोली में ही घर से लाडली

ज़िन्दगी भर एक सपना ये सजाता है पिता।।

       इस ज़माने के गरल से दूर रखने के लिए

       "संदली" छाँव में अपने ही बिठाता है पिता।।

      


प्रेम क्या है?

प्रेम वो है जहाँ कि सी के साथ रहने के लिए कोई कारण नहीं ढूँढना पड़ता,और दूर होने पर भी वो इंसान दिल के अंदर से निकल नहीं पाता।


प्रेम वो नहीं जो सिर्फ शब्दों में दिखे,

प्रेम वो है जो व्यवहार में महसूस हो

जहाँ हर छोटी बात में अपनेपन की खुशबू हो, हर खामोशी में एक अपनापन हो,हर इंतज़ार में एक मिठास हो।❣️


प्रेम वो है जहाँ

तुम्हें बार-बार खुद को साबित नहीं करना पड़ता, जहाँ तुम्हारा दोष भी समझा जाता है और तुम्हारी चुप्पी भी पढ़ ली जाती है।


प्रेम किसी को पाना नहीं...

उसके लिए अपने भीतर जगह बनाना है।

उसकी कमियों को स्वीकारना है, 

उसकी परेशानियों को अपना लेना है,उसकी हँसी को तुमसे जोड़ देना है...

#प्रेम का अर्थ है 

 जीवन मैं किसी के होने से

 बहुत आनंदित होना....


#प्रेम तो अकारण होता है 

उसका कोई कारण नहीं होता

और प्रेम की कोई परिकाष्ठा 

भी नहीं होती क्योंकि 

#प्रेम तो सहयोग में आसीम

और वियोग में अनंत है..


#प्रेम शब्दों में नहीं,

अहसास में दिखता है,

प्रेम का कोई शास्त्र नहीं है,

 न कोई परिभाषा है,,

न प्रेम का कोई सिद्धांत है....


#प्रेम तो एक अहसास है 

जो इसे महसूस कर सकता है

वहीं प्रेम को देख सकता है...


आपका प्रेम पवित्र है और

#प्रेमिका समझदार है तो

उसके गोद का स्पर्श होंठों से 

ज्यादा भावुक होता है.....

  

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