Thursday, February 5, 2026

गुड़ है वात पित्त कफ तीनो की दवा

 Jaggery - गुड़ है वात पित्त कफ तीनो की दवा: देसी सुपरफूड - आप सबने ज़िंदगी में गुड़ तो ज़रूर खाया होगा - लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि यही साधारण सा दिखने वाला गुड़ आयुर्वेद में एक ताक़तवर दवा माना गया है?


इस पोस्ट में जानेगें गुड़ के बारे में -

कि कैसे सही तरीके से इस्तेमाल करने पर ये

वात की 80+, पित्त की 40+ और कफ की 20+ बीमारियों से बचाव कर सकता है।


गुड़ मीठा है, स्वादिष्ट है और सेहत के लिए भी फायदेमंद।

तो जानते हैं कि आयुर्वेद गुड़ के बारे में क्या कहता है।


गुड़ बनता कैसे है?

गन्ने के रस को लगातार पकाया जाता है।

जैसे-जैसे उसका पानी उड़ता जाता है, एक ठोस हिस्सा बचता है -

उसी को सुखाकर जो बनाया जाता है, वही है हमारा देसी गुड़।


हिमाचल से लेकर केरल तक, भारत के हर कोने में गुड़ मिलता है।

आयुर्वेद में इसे सिर्फ मिठास नहीं, बल्कि

एक टॉनिक और बड़ी औषधि माना गया है।


नया गुड़: बॉडी बनाने वालों के लिए

जब गुड़ नया-नया बनता है

या 6–8 महीने के अंदर इस्तेमाल किया जाता है,

तो उसे नया गुड़ कहा जाता है।


नए गुड़ की खासियत

पचने में भारी (heavy)

शरीर को बढ़ाने वाला

वजन और फैट बढ़ाने में मददगार


किसके लिए सही?

जो बहुत पतले हैं

जो ज़्यादा शारीरिक मेहनत करते हैं

जिनकी पाचन अग्नि तेज है

जो बॉडी या वजन बढ़ाना चाहते हैं


सर्दियों में मिलने वाला ताज़ा गुड़ ऐसे लोगों के लिए perfect choice है।


पुराना गुड़: असली आयुर्वेदिक सोना

अब बात करते हैं पुराने गुड़ की —

जो 6 महीने, 1 साल या उससे भी ज़्यादा पुराना हो।


आयुर्वेद के ग्रंथ अष्टांग हृदय में

वाग्भट ऋषि कहते हैं कि:


पुराना गुड़ हृदय के लिए सबसे बेहतरीन टॉनिक है।


हार्ट से जुड़ी समस्याओं में फायदेमंद

दिल की कमजोरी

डर या घबराहट

अचानक धड़कन तेज होना

लो ब्लड प्रेशर

कम इजेक्शन फ्रैक्शन (heart pumping कम होना)


ऐसे सभी मामलों में पुराना गुड़ बहुत लाभकारी माना गया है।


डायबिटीज में भी गुड़?

हाँ, सुनने में अजीब लगता है लेकिन

आयुर्वेद में प्रमेह और मधुमेह (diabetes) में भी

पुराना गुड़ पथ्य यानी सुरक्षित बताया गया है।


क्यों?


ये पाचन अग्नि को मंद नहीं करता

हल्का होता है

अग्नि को बढ़ाता है

शरीर को पोषण देता है


जिनकी पाचन शक्ति कमजोर है

लेकिन ताकत भी चाहिए -

उनके लिए नया गुड़ नहीं, पुराना गुड़ बेहतर है।


गुड़ और वीर्य-शक्ति

आयुर्वेद में गुड़ को कहा गया है:


वीर्यवर्धक

शुक्रजनक

वातनाशक


यानी जोड़ों का दर्द, कमज़ोरी, ठंड में बढ़ने वाले दर्द,

शरीर का सूखापन, बाल झड़ना, दांतों की कमजोरी —

इन सब में गुड़ एक natural tonic की तरह काम करता है।


सांस, खांसी और जोड़ों के दर्द में गुड़

सर्दियों में अक्सर ये समस्याएं बढ़ जाती हैं:


सूखी खांसी

सांस लेने में दिक्कत

जोड़ों में दर्द

शरीर में dryness


इन सब में गुड़ को आयुर्वेद में

बेहतरीन टॉनिक माना गया है।


Modern Nutrition के हिसाब से

अगर modern science की बात करें,

तो गुड़ में पाया जाता है:


Iron

Calcium

Phosphorus

Carbohydrates


यानी taste के साथ-साथ nutrition भी full-on 


वात, पित्त और कफ में गुड़ कैसे लें?

वात दोष के लिए

गुड़ + सोंठ (सूखी अदरक)


कैसे लें?


गुड़ का छोटा टुकड़ा

उसमें चुटकी भर सोंठ

छोटी गोली बनाकर खाएं


फायदा:


जोड़ों का दर्द

गैस

सांस की दिक्कत

वायु से जुड़े सारे रोग


पित्त दोष के लिए

गुड़ + हरड़ (कम मात्रा में)


जब समस्या हो:


ज्यादा गर्मी लगना

जलन

एसिडिटी

ब्लीडिंग


ध्यान रखें:

दोनों गर्म होते हैं, इसलिए मात्रा कम रखें।


कफ दोष के लिए

गुड़ + अदरक


फायदा:


सर्दी–खांसी

अस्थमा

मोटापा

हाई कोलेस्ट्रॉल

फैटी लिवर

हाइपोथायरॉइड


खाने के बाद

दिन में 2–3 बार ले सकते हैं।


सही गुड़ कैसे चुनें?

थोड़ा काला गुड़ लें

सफेद या पीला गुड़ नहीं


क्यों?

क्योंकि सफेद–पीले गुड़ में

अक्सर chemicals मिले होते हैं।


अगर हो सके तो गुड़ को स्टोर करके रखें।

आयुर्वेद में तो 3 साल पुराने गुड़ तक का वर्णन है।


आखिर में…

गुड़ ज़रूर खाइए -


बॉडी बनानी है - नया गुड़

दिल, पाचन और ताकत चाहिए - पुराना गुड़


क्या आप भी गुड़ खाते हैं?



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