एक माँ के तौर पर मैं यह वादा करती हुँ
मैं अपने बेटे को कभी इस बात पर मजबूर नहीं करूँगी
कि वह मुझे या अपनी अर्द्धांगिनी के बीच किसी एक को चुने।
मैं उसे कभी emotional blackmail नहीं करूँगी यह कहकर:
"देखो मैंने तुम्हारे लिए क्या-क्या किया…
तुम्हें जन्म दिया, 9 महीने पेट में रखा, रात-रात भर जागी,
अब तुम मेरे कर्ज़दार हो।"
मैंने उसे जन्म दिया --
यह मेरा decision था।
इसमें कोई investment return scheme नहीं चल रही।
मैं उसकी पढ़ाई, उस पर खर्च और उसकी परवरिश इसलिए नहीं कर रही
ताकि कल को वह मेरी पूरी ज़िंदगी का financial बोझ उठाए।
मैं माँ हूँ, burden नहीं।
शादी के बाद मैं चाहूँगी कि वह अपना घर खुद बनाए, अपनी अर्द्धांगिनी के साथ अपनी दुनिया खुद create करे।
जैसे बेटियाँ शादी के बाद नया घर बसाती हैं, वैसे ही बेटे भी अपनी नई family को priority दें —
बिना guilt के।
क्यों सिर्फ बेटियों की विदाई हो, और कल को मेरी बहु के parents उसके घर जाने में हिचकिचाएं, वो घर तो बेटा और बहु दोनों बसाएंगे न, तो जैसे मैं खुशी से जाया करूंगी उस घर में, वैसे ही बहु के parents भी खुशी से आएं (हम तो बेटी के घर का पानी भी नहीं पीते, इस सोच से उभरकर)।
मैं अपने घर की queen रहूँगी, वो empire जो मैंने शादी के पहले बनाना शुरू कर दिया था और अपने पति के साथ जिसका विस्तार किया।
और मेरी बहू अपने घर की queen होगी —
जो वह मेरे बेटे के साथ मिलकर बनाएगी।
दो अलग empires।
दो अलग queens।
Respect, boundaries और प्यार के साथ।
मां के पैरों में जन्नत होती है, बिल्कुल!
तो बहु की जन्नत भी है उसकी मां के कदमों में, वहां खिदमत सिर्फ बहु के भाई की जिम्मेदारी थोड़ी ना है।
फिर क्यों वो अपना मायका भूल जाए, सिर्फ मेरी ख़िदमत के चक्कर में?
Simple. Fair. Balanced.
मेरे पास आना मेरे बेटे बहु का फ़र्ज़ नहीं होगा, वो प्यार और सुकून के लिए आया करेंगे।
और हाँ…
अगर कल को ऐसा हो कि मेरा बेटा खुद को अकेला महसूस करे, कहीं हार जाए, job problem हो जाए, relationship issue आ जाए, कोई गलती हो जाए,और उसे लगे अब वह फँस चुका है —
तो उसके लिए उसकी माँ की गोद हमेशा एक safest place रहेगी। 🤍
बिना ताने।
बिना शर्तें।
सिर्फ प्यार और support।
अगर हम माँ-बाप अपने बच्चों को
Investment समझना बंद कर दें
और इंसान समझना शुरू कर दें,
तो आधी family toxicity ख़त्म हो जाए।
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