Saturday, January 24, 2026

मनुष्य के जीवन में कुछ रिश्ते

कुछ रिश्ते बनते हैं, लेकिन अपने आप अलग हो जाते हैं" इस बीच क्या होता है?


मनुष्य के जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे आते हैं

जिनका कोई नाम तय नहीं होता,

कोई परिभाषा नहीं होती,

और कोई वादा भी नहीं।


वे बस होते हैं।

जैसे साँस बिना कोशिश के।


लेकिन समय के साथ वही रिश्ते

चुपचाप ढलने लगते हैं,

जैसे शाम ढलती है 

बिना किसी शोर के।


1. हर रिश्ता एक क्षण की ज़रूरत से जन्म लेता है


हर रिश्ता किसी अधूरेपन से जन्म लेता है।


कभी हमें सुने जाने की ज़रूरत होती है,

कभी समझे जाने की,

कभी बस किसी के होने भर की।


वह दूसरा व्यक्ति

उस क्षण हमारी ज़रूरत बन जाता है।

और हम उसे “रिश्ता” कह देते हैं।


लेकिन जैसे ही ज़रूरत बदलती है,

रिश्ते की दिशा भी बदलने लगती है।


2. समय हमें नहीं बदलता, वह हमें उजागर करता है


शुरुआत में हम अपने सबसे सुंदर रूप में होते हैं।

कमज़ोरियाँ छिपी रहती हैं,

डर मुस्कान के पीछे छुपे रहते हैं।


समय बीतने के साथ

नक़ाब उतरते हैं।


और तब पता चलता है 

कि जिसे हम समझ रहे थे,

वह और है।

और जो हम खुद को समझते थे,

वह भी कुछ और है।


यह टकराव रिश्ते को नहीं तोड़ता,

यह बस सच्चाई को सामने लाता है।


3. भावनाएँ शब्दों से पहले थकती हैं


एक समय होता है

जब बात न भी हो,

तो जुड़ाव बना रहता है।


और फिर एक समय आता है

जब बात होती है,

लेकिन जुड़ाव नहीं।


यह वह बिंदु है

जहाँ दिल थक जाता है,

मुँह नहीं।


हम जवाब देते हैं,

लेकिन महसूस नहीं करते।


4. अपेक्षाएँ प्रेम का मौन शत्रु हैं


प्रेम तब तक शुद्ध रहता है

जब तक वह स्वतंत्र होता है।


लेकिन जैसे ही हम

दूसरे से अपनी कमी पूरी करवाना चाहते हैं,

वह रिश्ता बोझ बनने लगता है।


सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि

हम अपेक्षाएँ रखते हैं

लेकिन उन्हें स्वीकार नहीं करते।


और जब वे पूरी नहीं होतीं,

तो हम भीतर ही भीतर

टूटते चले जाते हैं।


5. अहंकार दरअसल डर का दूसरा नाम है


“अगर वह चाहता, तो पूछता।”

“मैं ही क्यों झुकूँ?”


ये वाक्य अहंकार नहीं,

असुरक्षा से जन्म लेते हैं।


डर कि अगर मैंने कोशिश की

और वह नहीं लौटा,

तो मेरा महत्व कम हो जाएगा।


इस डर में

रिश्ते दम तोड़ देते हैं।


6. अलगाव एक घटना नहीं, एक प्रक्रिया है


कोई रिश्ता अचानक नहीं टूटता।

वह रोज़ थोड़ा-थोड़ा मरता है।


एक दिन देर से जवाब,

दूसरे दिन बिना वजह की चुप्पी,

तीसरे दिन बिना बात के थकान।


और फिर एक दिन

हम महसूस करते हैं 

अब कोशिश करने की इच्छा भी नहीं बची।


7. सबसे गहरी पीड़ा ...कोई दोषी नहीं होता


इन रिश्तों का दुख इसलिए गहरा होता है

क्योंकि यहाँ कोई खलनायक नहीं होता।


बस दो इंसान होते हैं

जो एक-दूसरे के जीवन में

जितनी देर के लिए आए थे,

उतनी देर रह पाए।


यह स्वीकार करना

सबसे कठिन होता है

कि हर साथ हमेशा का नहीं होता।


जीवन में हर रिश्ता

मंज़िल नहीं होता।


कुछ रिश्ते

हमें तैयार करने आते हैं 

अगले रिश्तों के लिए,

अगली समझ के लिए,

और कभी-कभी

अकेले चलने की क्षमता के लिए।


और जब वे चले जाते हैं,

तो खालीपन छोड़ते हैं,

लेकिन साथ में

एक शांत परिपक्वता भी।


अलग हो जाना

हमेशा हार नहीं होती।

कभी-कभी

यह इस बात का प्रमाण होता है

कि दोनों ने ईमानदारी से

वह निभाया

जो जितना संभव था।


कुछ रिश्ते

हमेशा दिल में रहते हैं,

ज़िंदगी में नहीं।

और शायद

यही उनका सबसे सुंदर रूप होता है।


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