Monday, January 26, 2026

A Love Story

 ये उन दिनों की बात है,

जब एक लड़का हुआ करता था...

जिसकी जेब में इश्क़ की पहली मासूमियत रखी रहती थी,

जिसकी कॉपी में एक नाम लिखा था, एक छोटी सी मुलाक़ात ने

जो दुनिया की किसी तरकीब, किसी रबर से नहीं मिटता

जो अब किताब का उनवान बन चुका है।


बहुत छोटे से शहर में रहता था वो,

जहाँ ख़्वाबों की ऊँचाई अक्सर छतों से टकरा जाया करती है,

पर उसके ख़्वाब...

किसी के इश्क़ की पाकीज़ा छुवन जैसे, उसको ज़मीं से दो फुट ऊपर उठा चुके थे।

कच्ची हवा को भी अपनी बाँहों में भरकर रख लेता था वो,

और जब दुनिया कहती -अब नीचे उतर आ

तो उसकी आँखों में एक नया आसमान उग आता था।

हाँ, हवाएँ तो आज भी साज़िश करती हैं

उसको फ़ना करने की

लेकिन वो किसी की मानने को तैयार ही नहीं,

जैसे उसके अंदर ख़ौफ़ का कोई वजूद ही नहीं।


मगर अफ़सोस...

गुज़रते वक़्त में उसके परों को जब ज़माने ने नहीं,

उसके अपने सबसे अज़ीज़ आसमान ने कतर दिए

इतनी बेरुख़ी से, इतनी ख़ामोशी से,

कि अब रत्ती भर फ़रेब भी उसे जड़ों से हिला देता है।

वो लड़का,

जो अब भी किसी कविता की आख़िरी अधूरी लाइन में

अक्सर मुंतज़िर बैठा हुआ मिल जाता है

वो कोई और नहीं, मैं ही हूँ।

वही हूँ मैं,

और उसी लड़के का चेहरा ओढ़कर दुनिया से मिलने निकलता हूँ

जिसे इश्क़ ने ही उँगली पकड़ कर उड़ना सिखाया था,

और फिर जब मैं बादलों के बीच था,

तो इश्क़ ने ही हाथ छोड़ कर ज़मीन पर ला पटका।


हाँ मेरे ही हाथों से सजाई थी उसने अपनी दरों दीवारें,

वही तन्हा कर गया, जो मेरा निगेहबान था।


अब अक्सर अपना दिन लिखने-पढ़ने में गुज़ारता हूँ...

सोचता हूँ इश्क़ शायद इश्क़ करने वालों के लिए बना ही नहीं है

मुकम्मल इश्क़, ख़्वाहिशों की तलाश में भटकता ही नहीं।


हाँ, तो मैं और मेरे जैसे ही तमाम लिखने वाले

अपने ज़र्फ़ को क़ागज़ के हवाले कर देते हैं, जाने किसकी तलाश में।

एक शायरा ने क्या खूब लिखा है कि...

एक बार फिर से मेरे मन का प्याला खाली कर दिया है मैंने

सुना है...

खाली प्याले में आसमान उतर आता है।

कितनी खूबसूरत लाइन हैं ना?

लेकिन मेरा सवाल है—

उनको कोई ये समझा सकता है? 

कि जब बेवफाई का कड़वा सच प्याले की तलछट में जम गया हो,तो वहाँ 

राहत का नीला आसमान नहीं उतरता,

सिर्फ घुटन का धुंधलका भर जाता है।


गाहे बगाहे शायर/शायरा की क़लम ये भी लिख देती है कि..

ये आलम बदलने की तमाम कोशिशें मेरी नाकाम हो जाती हैं, जब तुम.....

सब होते हुए भी खाली होने का अहसास दिला देते हो।

जिनको पढ़ कर ऐसा लगने लगता है कि मैं ही लिख रहा हूँ..!


लोग कहते हैं, लिखने वाले काफ़ी समझदार लोग हैं...

उन्हें क्या ख़बर,

कि ये समझदारी दरअसल उस बच्चे का जनाज़ा है

जो कभी हर बात पर ज़िद किया करता था।

कि ये समझदारी इक खेल है और खेल भी क्या, सिर्फ़ हँसते रहना,चाहे अंदर का आदमी,साथ हो ही ना। 


ये वो शख़्स हैं,

जो अक्सर हँसते हुए पाये जाते हैं

मगर जिनकी आँखों में झाँको तो

वहाँ एक पुराना, गहरा सन्नाटा बसता है।


ये ​वो शख़्स हैं,

जिन्होंने कभी अपनी शर्तों पर जीना सीखा था,

और आज-कल वो

वक़्त की शर्तों पर सिर्फ़ साँस लेते हैं। 


इन्हीं अहसासों से मैं भी गुज़र रहा हूँ...

आज भी कभी-कभी,

धूल में दबा हुआ मेरा भी दिल

क़ागज़ों के बीच ज़ोर-ज़ोर से धड़कता है,

एक पल के लिए ऐसा भी लगता है कि

शायद आसमान फिर से खुल जाएगा...

मैं फिर से वही बेख़ौफ़ लड़का हो जाऊँगा...

मगर तभी किसी के दिए हुए ज़ख़्मों की टीस उठती है,

और जब ऐसा होता है...

तो मैं चुपचाप कॉपी को बन्द कर,

अपना सिर फिर से उसी यादों की मिट्टी में गाड़ लेता हूँ,

जहाँ मेरे इश्क़ को ज़िंदा दफ़्न किया गया था।


सच है,

जाने वाला तो चला जाता है

उसके मन में .... मलाल कहाँ होता है?

वो तो बस एक अलविदा कह कर रुख़सत हो गया, मुक्त हो गया...

और यहाँ साँस लेने की उम्र क़ैद मुकर्रर हो गई।

उफ्फ!!! 

सज़ा-ए-मौत मिलती तो एक बार मरते,

मग़र इश्क़ ने बख़्शी है हमको ज़िंदगी, 

हर एक लम्हा मरने के लिए।। 

प्रेम वह गहरी भावना है जो सिर्फ एक-दूसरे को देखने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह एक साझा दृष्टिकोण और उद्देश्य का नाम है. जब दो लोग एक-दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं, तो यह सिर्फ बाहरी रूप या व्यक्तित्व तक सीमित होता है. 

लेकिन असली प्रेम तब होता है जब दो लोग अपने जीवन की दिशा में एक समान दृष्टिकोण रखते हैं. वे केवल एक-दूसरे की आँखों में नहीं, बल्कि अपने जीवन के उद्देश्य और आकांक्षाओं में भी एक-दूसरे के साथी होते हैं.


यह एक ऐसा रिश्ता होता है जहाँ दोनों अपने सपनों और लक्ष्यों को साझा करते हैं, और एक-दूसरे की सफलता में खुश होते हैं. 

जब दो लोग एक ही दिशा में देखते हैं, तो उनका रिश्ता न सिर्फ शारीरिक रूप से जुड़ा होता है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी गहरा होता है.

यह साझी यात्रा होती है, जहाँ दोनों के दिल और दिमाग एक जैसा रास्ता चुनते हैं.


प्रेम केवल सुंदर शब्दों और अहसासों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह एक साझी यात्रा का हिस्सा बनता है. जब दो लोग एक-दूसरे की दिशा को समझते हैं और एक साथ उस दिशा की ओर बढ़ते हैं, तो वह रिश्ता और भी मजबूत होता है. इसमें विश्वास, समझ, और समर्थन होता है, जो रिश्ते को हर मोड़ पर खड़ा रखते हैं.


कभी आपने महसूस किया है कि प्रेम वही होता है, जब दो लोग अपनी यात्रा को एक साथ और समान दिशा में तय करते हैं ?

यह तब होता है जब दोनों अपने सपनों और जीवन के उद्देश्य को एक साथ जीते हैं.

केवल प्रेम नहीं, बल्कि एक साझी यात्रा बन जाती है, जिसमें दोनों एक-दूसरे का सहारा होते हैं.


कितना दुखद होगा उनका जीवन...


                      जो प्रेम और अपनेपन की 

                      चाह लिये भी,

                      परिवार की मान मर्यादा और

                      प्रतिष्ठा के बंधन में बंधे रहे।


                      यह पीड़ा 

                      तब और अधिक हो गई होगी_


                      जब विवाह पश्चात भी

                      प्रेम, स्नेह, सम्मान और अपनापन 

                      उनके हिस्से नहीं आया होगा।।


धोखा अक्सर तब नहीं मिलता

जब कोई रंगे हाथ पकड़ा जाए,

धोखा तब मिलता है

जब फ़ोन चेक करते ही

दिल बैठ जाए।


वो एक स्क्रीन,

कुछ नाम,

कुछ चैट्स…

और अचानक

भरोसा आवाज़ भी नहीं करता,

सीधे मर जाता है।


उस पल सबसे ज़्यादा दर्द

ये नहीं देता

कि उसने क्या किया,

दर्द ये देता है

कि वो इतने पास रहकर भी

इतनी दूर था।


तुम पूछते हो —

“ये क्या है?”

और सामने वाला कहता है —

“कुछ नहीं…”


यहीं सब कुछ टूटता है।


क्योंकि धोखा

हमेशा जिस्म से नहीं होता,

कई बार

झूठ की आदत से होता है।

छुपाने की सहजता से होता है।


फोन चेक करना

गलती हो सकती है,

पर जो मिला

वो गलती नहीं होता।


कुछ बातें

तुम्हें बताए बिना की जाती हैं,

और फिर कहा जाता है —

“तुम्हें भरोसा क्यों नहीं है?”


भरोसा

तलाशी से नहीं टूटता,

भरोसा

पहले ही टूट चुका होता है,

तभी तो तलाशी ली जाती है।


और सच ये है —

जिस रिश्ते में

फोन लॉक हो जाए

और दिल अनलॉक न रहे,

वहाँ साथ रहना

बस एक समझौता होता है,

रिश्ता नहीं।

                      


                                                           

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