🌑 जीवन में कई बार एक ऐसा पड़ाव आता है जब भावनाएं मानो जम सी जाती हैं। हम उस मोड़ पर खड़े होते हैं जहाँ किसी का साथ होना या न होना, किसी का प्यार या किसी की नफरत सब बेमानी लगने लगता है।
दिल इतना थक जाता है कि वह शिकायत करना भी छोड़ देता है। अक्सर हम इसे अपनी हार मान लेते हैं, लेकिन सच तो यह है कि यही वह समय है जब रूह आपसे अपना हक माँग रही होती है।
🌑 अक्सर इस मोड़ पर हम एक बड़ी गलती कर बैठते हैं। दूसरों की बेरुखी या उनकी खामोशी को अपनी किस्मत मान लेते हैं।खुद को एक शिकार की तरह देखने लगते हैं, जैसे हमारे दुखों का रिमोट कंट्रोल किसी और के हाथ में हो।खुद को उस अंधेरे कमरे में बंद कर लेते हैं जहाँ सिर्फ पछतावा और दर्द होता है।दूसरों को सजा देने की चाह में, अनजाने में खुद को ही लहूलुहान करते रहते हैं।
हमारी जिंदगी को संवारने की जिम्मेदारी हमारी थी, उसे किसी और की गलतियों की भेंट क्यों चढ़ा रहे हैं?
हम किसी के व्यवहार का शिकार होने के लिए पैदा नहीं हुए हैं। यह जिंदगी किसी की मोहताज नहीं है। अगर आज किसी की उपस्थिति खुशी नहीं दे रही, तो उसकी अनुपस्थिति को दर्द भी मत बनने दीजिए।
सोचिये क्या वाकई जिंदगी इतनी सस्ती है कि कोई आएगा, दो शब्द कड़वे बोलेगा, और हमारी पूरी हस्ती बिखर जाएगी?
क्या हम इतने कमजोर हैं कि किसी की अनुपस्थिति हमारा वजूद ही मिटा दे?
🌑 हकीकत तो ये है कि लोग हमको उतना ही दुख देते हैं, जितनी हम उन्हें इजाजत देते हैं। जिस दिन हमने अपनी तकलीफों का जिम्मा दूसरों पर डालना बंद कर दिया, उसी दिन हम आजाद हो जाएंगे।
अक्सर दूसरों को सबक सिखाने के चक्कर में हम खुद की जिंदगी का इम्तिहान फेल कर देते हैं। हम चाहते हैं कि उन्हें हमारी कमी महसूस हो, वो तड़पें, वो पछताएं... और इस चाहत में हम खुद तड़पना शुरू कर देते हैं।
यह कैसी समझदारी है कि घर पड़ोसी का जले और धुआँ हमारे फेफड़ों में हो?
जिंदगी बराबर जीने के लिए मिली है, घिसटते हुए गुजारने के लिए नहीं। खुद को किसी की यादों का या किसी की बेरुखी का शिकार मत बनाइए।
आप एक जलता हुआ दीया हैं, कोई बुझी हुई राख नहीं कि कोई भी आकर पैरों से कुचल जाए।
आज, इसी वक्त, यह तय कीजिए कि आपकी मुस्कुराहट पर सिर्फ आपका हक है। किसी और की दी हुई चोट को अपना गहना मत बनाइए।
🌑 छोटा मुँह बड़ी बात कह रहा हूँ पर उठिए, और खुद को उस दलदल से बाहर निकालिए, क्योंकि जब आप खुद के लिए खड़े होते हैं, तभी कायनात आपके लिए रास्ता बनाना शुरू करती है। दूसरों के लिए रोना बंद कीजिए और उस इंसान को हंसाइए जो बचपन से आपके अंदर कहीं खो गया है।
अगर आज अपनी खुशियों के लिए खुद लड़ नहीं सकते, तो कल हमारी बर्बादी पर अफसोस करने का हक भी हम खो देंगे।
इसलिए खुद को दूसरों के लिए तकलीफ देना प्लिज़ बंद कीजिए। आईने में दिखने वाले उस इंसान से माफी मांगिए जिसे आपने दूसरों की खातिर सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया है। अपनी मुस्कुराहट की कमान वापस अपने हाथ में लीजिए। जब दुनिया का शोर फीका पड़ने लगे, तो अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनिए वही आपकी सबसे सच्ची साथी है।
अपनी कहानी का नायक/नायिका बनिए, किसी की कहानी का एक दुखी हिस्सा मात्र नहीं।
जीना सीखिए, सिर्फ दूसरों के लिए नहीं, बल्कि उस स्वयं के लिए जो आपकी राह देख रहा है।
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