*राम नाम सत्य है — एक अनसुना अर्थ
लोग समझते हैं—
“राम नाम सत्य है”
मृत्यु का वाक्य है…
पर सत्य यह है—
यह जीवन की सबसे बड़ी पुकार है।
जब किसी की अर्थी उठती है,
तो यह शब्द केवल उसके लिए नहीं होते,
वे हर उस जीवित इंसान के लिए होते हैं
जो अब भी अपने अहंकार में सोया हुआ है।
यह वाक्य कहता है—
तू जो “मैं-मैं” कर रहा है,
वह सब क्षणभंगुर है…
सत्य केवल “राम” है,
बाकी सब एक गुजरती हुई छाया।
एक दिन ऐसा आएगा,
जब लोग तुझे भी उठाकर यही कहेंगे—
“राम नाम सत्य है”…
पर अगर आज ही तू इस सत्य को जी ले,
तो वह दिन भय का नहीं,
मुक्ति का उत्सव बन जाएगा।
🪔इसलिए मृत्यु का इंतज़ार मत कर—
आज ही अपने भीतर “राम” को जगा ले…
क्योंकि जो जीते-जी सत्य को पहचान लेता है,
उसे अंत में कुछ भी खोना नहीं पड़ता। 🪔
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