नियंता और नियति का परम सत्य
तुमको बनाने वाले ने यह मनुष्य शरीर और स्वांसों का प्रसाद देकर ऐसा मौका दिया है जो सबसे बड़ा उपहार है। नियंता के रूप में प्रभु ने स्वांस के आने-जाने का नियम बनाया जो उनकी बहुत बड़ी कृपा है और परम सत्य है। इसलिए इसे हृदय से स्वीकार करना चाहिए। यह सब कुछ परम शक्ति की इच्छा से हो रहा है। लेकिन आज के वैज्ञानिक युग में पढ़े-लिखे समाज के बुद्धिजीवी सज्जन यह प्रश्न खूब उछालते हैं कि यदि हर बात का कोई निमित्त है तो फिर गलत को गलत क्यों ठहराया जाता है?
इसे अच्छे से समझना होगा कि भगवान जितना नियंता है, उतनी ही नियति है। नियंता का अर्थ है व्यवस्था चलाने वाला और नियति का मतलब है उसने एक ऐसी नीति बना दी है, जो कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर की तरह है। जैसा करोगे, वैसा पाओगे यानी वैसा परिणाम मिलेगा। नियंता के रूप में भगवान ने नियम बनाया कि पृथ्वी गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण हर चीज को खींचती है। अब यदि गिर जाएं तो यह नहीं कह सकते कि भगवान की इच्छा थी, पृथ्वी ने खींच लिया तो गिर गए।
नियंता ने नियम बनाया लेकिन, आपने नियम का उल्लंघन किया, संभल नहीं पाए तो पृथ्वी खींच रही है, गिरना आपकी नियति है। भगवान कृष्ण ने महाभारत युद्ध से पहले कहा था कि एक तरफ मैं अकेला हूं, वह भी बिना शस्त्र उठाए तथा दूसरी ओर मेरी सेना होगी। आपको जो लेना हो, ले लो। कौरवों ने सेना चुनी, पांडवों ने निहत्थे कृष्ण को चुन लिया। कुल मिलाकर निर्णय हमारे ऊपर है, भगवान अपनी व्यवस्था कर चुके हैं।
इसलिए परम शक्ति को निमित्त मानते हुए गलत को भी गलत नहीं कहना चाहिए, ऐसा प्रश्न उठाना ही गलत है जिसका कोई मतलब नहीं है। आपको संभावना और चयन प्रभु से दिया गया है और उसी के दायरे में यह स्वांस आ रहा है, जा रहा है। यही नियंता और नियति का परम सत्य है। सदैव याद रखें कि रास्ता मंजिल तक नहीं पहुंचाता बल्कि रास्ते पर चलकर चलने वाला ही अपनी मंजिल तक पहुंचता है। इसलिए ध्यान के अभ्यास से मन को स्वांसों के साथ एकाकार करके स्वयं को जानो और हृदय में विराजमान परमात्मा के सानिध्य में शांति के अनुभव से मनुष्य जीवन सफल बनाओ।
विचार ही वस्तु है… कैसे?
जो आप बार-बार सोचते हैं, वही आपकी वास्तविकता बनता है।
विचार केवल सोच नहीं है, यह एक ऊर्जा (Energy) है…
और हर ऊर्जा एक कंपन (Vibration) पैदा करती है।
👉 जैसी आपकी सोच होगी
👉 वैसी आपकी भावना बनेगी
👉 वैसा आपका व्यवहार होगा
👉 और वैसा ही आपका परिणाम मिलेगा
सीधी बात:
👉 पहले विचार बनता है,
👉 फिर वह विश्वास बनता है,
👉 फिर वह हकीकत बन जाता है।
🌱 जैसे बीज से पेड़ बनता है,
वैसे ही विचार से जीवन बनता है।
✨ इसलिए याद रखें:
विचार बदलो, जीवन बदल जाएगा।
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