बौद्ध धर्म में 18 धातु (Eighteen Dhatus)
मनुष्य अनुभव और चेतना के घटकों का एक वर्गीकरण हैं।
यह सिद्धांत यह समझने में मदद करता है कि हम दुनिया को कैसे अनुभव करते हैं। यह 12 आयतनों का ही एक विस्तृत रूप है।
18 धातुओं को तीन मुख्य समूहों में विभाजित किया गया है:
6 आंतरिक आधार (इंद्रियां - Indriyas)
6 बाहरी आधार (विषय - Visayas)
6 चेतनाएं (Consciousness - Vinnana)
6 आंतरिक इंद्रियां (षडायतन)
चक्षु धातु (Eye): देखने की इंद्री।
श्रोत्र धातु (Ear): सुनने की इंद्री।
घ्राण धातु (Nose): सूंघने की इंद्री।
जिह्वा धातु (Tongue): स्वाद लेने की इंद्री।
काय धातु (Body): स्पर्श की इंद्री।
मन धातु (Mind): विचार करने वाली इंद्री।
6 बाहरी विषय (छह विषय)
रूप धातु (Visible Object): जो आँखों से दिखता है।
शब्द धातु (Sound): जो कानों से सुना जाता है।
गंध धातु (Odour): जो नाक से सूंघा जाता है।
रस धातु (Taste): जो जीभ से चखा जाता है।
स्पर्श धातु (Touch): जो शरीर से छुआ जाता है।
धर्म धातु (Mental Object): मन के विचार या विचार-विषय।
6 प्रकार की चेतना (षड-विज्ञान)जब आंतरिक इंद्रियां बाहरी विषयों से मिलती हैं, तब चेतना उत्पन्न होती है:
चक्षु-विज्ञान धातु: देखने की चेतना (Eye-consciousness)।
श्रोत्र-विज्ञान धातु: सुनने की चेतना (Ear-consciousness)।
घ्राण-विज्ञान धातु: सूंघने की चेतना (Nose-consciousness)।
जिह्वा-विज्ञान धातु: स्वाद लेने की चेतना (Tongue-consciousness)।
काय-विज्ञान धातु: स्पर्श करने की चेतना (Body-consciousness)।
मनो-विज्ञान धातु: सोचने की चेतना (Mind-consciousness)।
यह 18 धातुएं शरीर, मन और बाहरी दुनिया के बीच की प्रक्रिया को दर्शाती हैं, जो दुःख और संसार का कारण बनती हैं। इन पर विजय प्राप्त करना या इनके प्रति समभाव (Equanimity) रखना ही बौद्ध साधना का लक्ष्य है।
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