टूटे और हारे हुए लोगों से प्यार करना आसान नहीं होता चाहे वह स्त्री हो या पुरुष। ऐसे लोग बाहर से जितने सामान्य दिखते हैं, अंदर से उतने ही गहरे और उलझे हुए होते हैं। जब कोई उनके जीवन में आता है, प्यार लेकर, तो वह शुरुआत में होता है। लेकिन जो टूट चुका है, वह प्यार की शुरुआत नहीं, उसका अंत भी देख चुका होता है।
उनके मन में एक अजीब-सी हलचल चलती रहती है। ऊपर से वे शांत दिखते हैं, लेकिन भीतर जैसे कुछ लगातार चल रहा होता है कुछ ऐसा जो उन्हें नए रिश्ते को खुलकर अपनाने से रोकता है। उनका मन बार-बार पीछे लौटता है, उसी अतीत में, जहाँ कभी उन्हें बहुत अपनापन मिला था। वहीं ठहर जाना उन्हें अच्छा लगता है, क्योंकि वर्तमान में उनका मन थका हुआ और खाली-सा महसूस करता है।
ऐसे लोग अपनी भावनाएँ आसानी से नहीं दिखाते। वे हर बात अपने अंदर ही रख लेते हैं। कोई कितना भी समझाने की कोशिश करे, वे जल्दी खुलते नहीं हैं। भीड़ में भी वे अलग-से लगते हैं न ज्यादा खुश, न ज्यादा दुखी बस एक अजीब-सी खामोशी के साथ जीते हुए।
इसी वजह से उनके साथ रिश्ता निभाना कठिन हो जाता है। कभी-कभी उनके भीतर अचानक कुछ पाने की तीव्र इच्छा जागती है शायद वही जो पहले छूट गया था। उस समय सामने वाले की एक छोटी-सी गलती भी उन्हें बहुत बड़ी लग सकती है। वे उस पल में नहीं रह पाते, उनका ध्यान कहीं और चला जाता है जैसे वे किसी दूसरी दुनिया में खो गए हों।
वे एक ही समय में कई जगह जीते हैं थोड़ा वर्तमान में, थोड़ा अतीत में, और थोड़ा उन सपनों में जहाँ सब कुछ ठीक हो सकता है। वे उस अतीत को छोड़ना नहीं चाहते, क्योंकि वहीं उन्होंने खुद को खास महसूस किया था। जैसे तपती धूप में अचानक कोई छाया मिल जाए वह सुकून भुलाना आसान नहीं होता।
लेकिन अब वह सुकून उनके पास नहीं है। वही कमी उन्हें अंदर से चुप और थोड़ा दूर बना देती है।
इसलिए अगर कोई ऐसे इंसान से प्यार करता है, तो उसे सिर्फ उस व्यक्ति से नहीं, बल्कि उसके बीते हुए समय से भी जुड़ना पड़ता है। उसे समझना पड़ता है कि हर खामोशी के पीछे कोई कहानी है, हर दूरी के पीछे कोई डर छिपा है।
ऐसे लोगों से प्यार करना मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं। बस इसमें जल्दबाजी नहीं चलती। इसमें समय देना पड़ता है, भरोसा देना पड़ता है, और सबसे ज्यादा बिना कहे भी समझने की कोशिश करनी पड़ती है। क्योंकि उनके लिए प्यार सिर्फ एक एहसास नहीं, बल्कि धीरे-धीरे फिर से जीना सीखने जैसा होता है।
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