Sunday, April 26, 2026

तुम क्यों नहीं जान पाते कि तुम कौन हो?

 तुम क्यों नहीं जान पाते कि तुम कौन हो? बाधा कहाँ है? यदि तुम इन बाधाओं को समझ लो, तो इन्हें बहुत आसानी से मिटाया जा सकता है।


पहली बाधा:

तुम अपने सपनों में जीते हो, और वही सपने बाधा बन जाते हैं। वास्तविकता कोई सपना नहीं है। भीतर और बाहर — वह है, तुम्हें उसे खोने का कोई उपाय नहीं है। लेकिन तुम स्वप्न देख रहे हो। जब तक मन स्वप्न देखना बंद नहीं करता, सत्य जाना नहीं जा सकता। जब तुम स्वप्नों के माध्यम से देखते हो तो वास्तविकता विकृत हो जाती है।


जब मैं कहता हूँ ‘स्वप्न देखना’, मेरा अर्थ यह है: तुम्हें मुझे सुनना चाहिए, लेकिन तुम स्वप्न देख रहे हो — व्याख्या कर रहे हो, अपने ही विचार सुन रहे हो, अपनी ही आवाज़ सुन रहे हो। तुम जो भी सुनते हो, वह तुम्हारा अपना शोर होता है।


सोचना बंद करो।


तब वही सुना जाएगा जो कहा जा रहा है।


जब फूल को देखते हो तो अतीत-भविष्य के स्वप्न मत देखने लगो कि फूलों के बारे में तुम क्या जानते हो, उनका क्या अर्थ है, आदि। शब्दों को तुम्हारे और वास्तविकता के बीच मत आने दो। देखो, सुनो, छुओ — सीधे। यदि शब्द बीच में आ गए तो तुम वास्तविकता से कट गए। शब्दों में ही भटकते रहोगे और वास्तविकता से दूर होते जाओगे।


दूसरी बाधा:

प्रक्षेपण मत करो। जो है, उसे देखो — और उसमें शब्द मत जोड़ो। यदि तुमने एक चेहरा देखा, तो मत कहो कि वह सुंदर है या कुरूप। चेहरा केवल चेहरा है। प्रक्षेपण मत करो। तुम्हारे प्रक्षेपण तुम्हारे सपने हैं — और इसी कारण तुम वास्तविकता से चूक जाते हो। यह हर दिन घट रहा है। तुम कभी वास्तविकता को स्वयं प्रकट होने का अवसर नहीं देते। हम अपनी कल्पनाओं और प्रक्षेपणों से एक झूठी दुनिया गढ़ लेते हैं।


रात के सपने क्यों बनते हैं?

क्योंकि दिन में अधूरी इच्छाएँ होती हैं। यदि तुम दिन में पूरी तरह जीओ — खाओ, प्रेम करो, जो भी करो — पूरे मन से करो, तो कुछ भी अधूरा नहीं रहेगा जिसे सपनों में पूरा करना पड़े। रात में सपने कम होंगे तो दिन में प्रक्षेपण भी कम होंगे। तुम अधिक सजग हो जाओगे और अधिक सीधे देख पाओगे।


हर क्रिया में पूरे मन से उतरो, तो स्वप्न धीरे-धीरे मिट जाएँगे। और जितने कम स्वप्न होंगे, उतनी ही अधिक गहराई से तुम वास्तविकता में प्रवेश कर सकोगे।


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