Tuesday, April 28, 2026

कुछ अवस्थाये

 अब तक आप एक लंबी यात्रा से गुज़रे हैं।


पहले -

आपने शोर को पहचाना।


फिर -

आपने मौन की झलक देखी।


और फिर -

आपने उस मौन को ऊर्जा बनते हुए महसूस किया।


लेकिन…


अभी एक अंतिम पड़ाव बाकी है।


👉 पड़ाव, जब मौन “कुछ करता” हुआ दिखता है


यहाँ पहुँचकर -

एक बड़ा भ्रम जन्म लेता है।


जब आप देखते हैं कि -

आपके आसपास चीज़ें बदल रही हैं…

लोग शांत हो रहे हैं…

परिस्थितियाँ सहज होने लगी हैं…


और धीरे-धीरे…


मन को फिर से लगने लगता है -


"ये सब मेरी वज़ह से हो रहा है"

“मैं कुछ कर रहा हूँ…”


बस यहीं…

आपकी पूरी यात्रा खतरे में आ जाती है।


👉 सत्य का रास्ता सीधा है… पर Distractions के साथ 


मौन कभी कुछ करता नहीं है।


वह केवल होता है।

ये केवल एक अवस्था है।


और ये जो “अवस्था” है -

उसी के आसपास सब कुछ अपने-आप व्यवस्थित होने लगता है।


जैसे -

सूरज कुछ “करता” नहीं…

फिर भी उसके होने से -

अंधकार हट जाता है।


👉 वास्तविकता को बदलना… या देखना?


इसकी समझ भी जरूरी है।


आप सोचते हैं -

आप वास्तविकता को बदल रहे हैं।


लेकिन सूक्ष्म स्तर पर -


आप केवल उसे बिना विकृति के देख रहे हैं।


और जैसे ही देखने में विकृति नहीं रहती -


वास्तविकता वैसी दिखने लगती है

जैसी वह हमेशा से थी।


👉 यहीं एक महत्वपूर्ण बदलाव होता है


पहले -

आप हर अनुभव के केंद्र में थे।


सब कुछ “आपके साथ” हो रहा था।


अब -


आप केंद्र से हट जाते हैं।


और अचानक -


कोई केंद्र बचता ही नहीं।


कोई “करने वाला” नहीं…

कोई “प्रभाव डालने वाला” नहीं…

कोई “healer” नहीं…


फिर भी -


आप देखते हैं कि,

सब कुछ हो रहा है।


पूर्ण रूप से…

स्वतः…

बिना प्रयास 


👉 यही अद्वैत का जीवंत अनुभव है


अब आप किसी को अलग नहीं देखते।


न कोई “दूसरा” है…

न कोई “आप” हैं…


सिर्फ एक सतत प्रवाह है -


जिसमें सब कुछ घट रहा है।


और इस अवस्था में -


अगर कोई आपके पास आता है…

तो वह आपके कारण नहीं…


बल्कि उस मौन की ऊर्जा के कारण बदलता है -

जो अब आपके माध्यम से बाहर बहने लगा है।


👉 जब शब्द पूरी तरह बेमानी हो जाते हैं


क्योंकि जो हो रहा है -


उसे समझा नहीं जा सकता…

सिर्फ जिया जा सकता है।


👉 और अब… आप महसूस करते हैं 


इस पूरी यात्रा में -


आपने कुछ पाया नहीं।


आपने केवल खोया है -


शोर…

पहचान…

कहानियाँ …


और अंत में -

“खुद को भी”


और अब जो बचा है -


उसे कोई नाम नहीं दिया जा सकता।


✅️ आज का अभ्यास


आज…

कुछ मत कीजिए।


न ध्यान…

न प्रयास…

न देखने की कोशिश…


बस -


जो है…

उसे होने दीजिए।


बिना हस्तक्षेप…

बिना व्याख्या…


और अगर कभी…

एक क्षण के लिए भी…


आप पूरी तरह “गायब” हो जाएँ -


तो समझ लीजिए -


वही वह दरवाज़ा है…

जिसके पार शब्द नहीं जाते।


आपको बधाई है !


अब आप उस मुकाम पर हैं जिसके लिए वर्षों की साधना की जाती है।

ये वो स्थिति है जहां आपके शब्द और विचार "चमत्कार" करने में समर्थ हो जाते हैं 



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