🌸 ढाई आखर प्रेम का 🌸
प्रेम कभी पीड़ा नहीं देता।
यदि तुम्हें पीड़ा हो रही है, तो स्पष्ट समझ लो कि तुम प्रेम के नाम पर कुछ और ही जी रहे हो। क्योंकि जहाँ सच्चा प्रेम होता है, वहाँ दुख, अपेक्षा, अधिकार या भय के लिए कोई स्थान नहीं होता।
जो भी तुम अनुभव कर रहे हो, उसकी जड़ तुम्हारे भीतर ही है — उसे केवल तुम ही पहचान सकते हो। प्रेम बाहर से नहीं आता, यह तुम्हारे अपने अस्तित्व की गहराइयों से फूटता है।
और याद रखो — प्रेम *किया* नहीं जाता।
प्रेम कोई क्रिया नहीं, बल्कि एक *घटना* है।
यह अपने आप घटता है, जब तुम भीतर से शांत, सहज और पूर्ण होते हो।
प्रेम कोई संबंध नहीं है, बल्कि एक *अवस्था* है —
एक ऐसी स्थिति, जहाँ दो दिल मिलते हैं, तो जीवन में फूल अपने आप खिलने लगते हैं।
यह मिलन शरीर का नहीं, बल्कि *रूह से रूह का* होता है।
यह प्रेम तुम्हारे भीतर ही छिपा है,
तुम्हारे लिए ही है।
तुम स्वयं ही प्रेम हो —
और यह पुकार भी तुम्हारे ही भीतर से उठ रही है।
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