*1. अनपढ़ होते तो इतना तगड़ा जाल नहीं बुन पाते।*
*वेद, पुराण, स्मृति, हदीस, कुरान, बाइबल —*
*हजारों पन्ने, एक-एक शब्द नाप-तौल कर लिखा गया।*
*मकसद साफ था:*
राजा को भगवान का दर्जा दो — ताकि विद्रोह न हो*
*"राजा विष्णु का अंश है" — लिख दिया।*
*अब राजा के खिलाफ बोलना = ईश्वर के खिलाफ बोलना।*
* गरीबी को किस्मत बना दो — ताकि सवाल न उठे*
*"पिछले जन्म का पाप", "अल्लाह की मर्जी", "कर्म का फल"*
*लिख दिया। अब भूखा मजदूर मालिक से नहीं, अपने भाग्य से लड़ेगा।*
*. औरत-शूद्र को पैर की जूती बना दो — ताकि सस्ता मजदूर मिले*
*"ढोल गंवार शूद्र पशु नारी" — लिख दिया।*
*"औरत की गवाही आधी" — लिख दिया।*
*आधी आबादी + 85% आबादी को गुलाम बना दिया, कलम से।*
*ये गंवार का काम नहीं है
*ये दुनिया के सबसे बड़े साजिशकर्ता का काम है।*
*भोले-भाले लोगों को बेवकूफ कैसे बनाया?*
*1. डर बेचा:*
*नर्क की आग, 84 लाख योनि, कब्र का अजाब।*
*बच्चा पैदा होते ही डरा दो — पूरी जिंदगी गुलाम रहेगा।*
*2. लालच बेचा:*
*स्वर्ग की अप्सरा, जन्नत की हूरें, अगला जन्म राजा का।*
*"दुख सह लो, ऊपर मजा है।"*
*मजदूर 12 घंटा खटता है — स्वर्ग के ठेके पर।*
*3. चमत्कार बेचा:*
*पत्थर तैराना, मुर्दा जिलाना, चाँद तोड़ना।*
*तर्क खत्म, भक्ति शुरू।*
*जो चमत्कार मानेगा वो मशीन क्यों पूछेगा — "मुनाफा कहां जा रहा?"*
*4. बिचौलिया बैठा दिया:*
*भगवान और इंसान के बीच — पंडित, पादरी, मौलवी।*
*डायरेक्ट बात नहीं होगी।*
*हर मन्नत का कमीशन, हर पाप का रेट कार्ड।*
*ये दुनिया का सबसे पुराना दलाली का धंधा है।*
*नतीजा — "सदा-सदा के लिए थमने की व्यवस्था"*
*2000 साल पहले लिखी किताब,*
*2026 में भी वही चला रही है।*
*संविधान बदल जाता है, सरकार बदल जाती है,*
*पर "जाति" नहीं बदलती, "नर्क का डर" नहीं बदलता।*
*क्यों?*
*क्योंकि कानून तोड़ो तो जेल।*
*धर्म तोड़ो तो "समाज-से-बाहर + मरने-के-बाद-भी-सजा।"*
*इससे तगड़ा लॉकअप कोई नहीं।*
*पूंजीपति को यही चाहिए था।*
*धर्मशास्त्र ने उसे दिया — "बिना खर्च का पुलिसवाला।"*
*जो मजदूर के दिमाग में बैठा है।*
*नाम है — "पाप-पुण्य।"*
*तो अब क्या करें ?*
*1. लिखने वाले को गाली देने से कुछ नहीं होगा।*
*वो मर गए। पर उनकी व्यवस्था जिंदा है।*
*उसे तोड़ना है।*
*2. भोले-भाले को बेवकूफ कहना बंद करो।*
*वो मजबूर है। 5000 साल का डर 1 दिन में नहीं जाएगा।*
*उसे तर्क दो, मिसाल दो, रोटी दो।*
*जब पेट भरेगा, दिमाग खुलेगा।*
*3. नया शास्त्र लिखो — मेहनत का शास्त्र*
*पहला मंत्र: "जो पैदा करेगा, वो खाएगा।"*
*दूसरा मंत्र: "ऊंच-नीच मनुष्य का बनाया, प्रकृति का नहीं।"*
*तीसरा मंत्र: "चमत्कार नहीं, विज्ञान। डर नहीं, सवाल।"*
*जब हर मजदूर ये शास्त्र पढ़ लेगा —*
*पुराना शास्त्र रद्दी हो जाएगा।*
*चीन ने यही किया।*
*माओ ने कहा — "कन्फ्यूशियस उखाड़ फेंको।"*
*4 पुराने — पुराना विचार, पुरानी संस्कृति, पुराने रीति, पुराने रिवाज।*
*तोड़ दिया। आगे बढ़ गए।*
*हम कब तोड़ेंगे?*
*जब तक हम "गंवार-धूर्त" बोलकर खुद को तसल्ली देंगे,*
*तब तक उनकी लिखी व्यवस्था हमको थामे रखेगी।*
*गाली नहीं, हथौड़ा चाहिए।*
*किताब नहीं, कर्म चाहिए।*
बाबासाहेब अंबेडकर
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