पता नहीं इंसान ध्यान से इतना दूर क्यों हो गया है…
जबकि सच तो यह है कि ध्यान ही वह तरीका है, जिससे जीवन को सही ढंग से देखा और जिया जा सकता है।
आज इंसान हर चीज़ सीख रहा है कमाना, बनाना, आगे बढ़ना…
लेकिन खुद को समझना भूल गया है।
और शायद यही कारण है कि बाहर सब कुछ होने के बाद भी, अंदर एक खालीपन है।
पहले का समय अलग क्यों था?
पहले जब गुरुकुल हुआ करते थे, तब साधक दिन-रात ध्यान का अभ्यास करते थे।
ध्यान उनके लिए कोई अलग काम नहीं था वह उनका जीवन था।
वहीं से धैर्य आता था, वहीं से समझ आती थी, वहीं से सच्चा ज्ञान जन्म लेता था।
इसीलिए उस समय विद्वान भी ज्यादा थे क्योंकि वे सिर्फ जानकारी नहीं, अनुभव से जीते थे।
और सबसे खास बात बच्चों को भी ध्यान सिखाया जाता था।
क्योंकि यह समझ थी कि यही बच्चे आगे चलकर दुनिया का निर्माण करेंगे।
आज ध्यान क्यों गायब सा हो गया है?
आज ध्यान कहीं खो गया है…
और शायद इसलिए आज अशांति हर तरफ दिखाई देती है।
रिश्ते टिक नहीं रहे
काम में मन नहीं लगता
रोज़ वही जीवन दोहराया जा रहा है
व्यापार में मन बैठ जाता है
कुछ नया करने की ऊर्जा नहीं बचती
मन डर, गुस्से और अहंकार से भरता जा रहा है…
और सबसे बड़ी बात
सब कुछ होते हुए भी, इंसान बेचैन है।
इधर-उधर भाग रहा है, पर पता नहीं किस चीज़ की तलाश है।
ध्यान की याद कब आती है?
अजीब बात है…
जब इंसान पूरी तरह टूटने लगता है,
जब वह डिप्रेशन में चला जाता है,
तब उसे ध्यान की याद आती है।
वह शांति ढूंढने लगता है, खुद को संभालने की कोशिश करता है।
पर सवाल यह है....
जब ध्यान ही हमें बचा सकता है,
तो हम उसे पहले ही अपने जीवन का हिस्सा क्यों नहीं बनाते?
ध्यान क्या करता है?
ध्यान हमें गहराई में ले जाता है।
जब हम ध्यान करते हैं, तो हम सिर्फ ऊपर-ऊपर नहीं देखते,
हम हर चीज़ की जड़ तक पहुंचने लगते हैं।
जैसे एक पेड़ को देखिए...
सामान्य नजर में हमें उसकी पत्तियाँ और शाखाएं दिखाई देती हैं।
लेकिन जब आप ध्यान में होते हैं,
तो आप उसकी जड़ों तक पहुंच जाते हैं…
जहाँ से उसका असली निर्माण शुरू हुआ है।
इसी तरह, ध्यान हमें हमारे हर विचार, हर भावना की जड़ तक ले जाता है।
गुस्सा क्यों है
डर कहाँ से आ रहा है
बेचैनी का असली कारण क्या है
जब जड़ समझ में आ जाती है,
तो समाधान खुद-ब-खुद मिलने लगता है।
आज भी ध्यान है… बस हम भूल गए हैं
ऐसा नहीं है कि आज ध्यान बिल्कुल नहीं है।
आज भी जो भी सच्चा निर्माण होता है
वह ध्यान से ही होता है।
जहाँ रिश्तों में शांति है, वहाँ ध्यान है
जहाँ काम में लगन है, वहाँ ध्यान है
जहाँ कोई नया सृजन हो रहा है, वहाँ ध्यान है
मतलब ध्यान कहीं गया नहीं है…
बस हमने उसे पहचानना छोड़ दिया है।
"ध्यान को जीवन का हिस्सा बनाना होगा"
जैसे जीवन के लिए भोजन, पानी, हवा और सम्मान जरूरी है,
वैसे ही ध्यान भी जरूरी है।
लेकिन ध्यान अपने आप नहीं आएगा…
इसके लिए अभ्यास करना पड़ेगा बार-बार।
शुरुआत में मन भागेगा, विचार आएंगे, बेचैनी होगी…
पर जैसे-जैसे अभ्यास बढ़ेगा, हम भीतर उतरने लगेंगे।
और जब हम भीतर उतरते हैं
तब हम खुद को समझने लगते हैं,
जीवन को सही नजर से देखने लगते हैं।
बच्चों को ध्यान सिखाना क्यों जरूरी है?
अगर हमें भविष्य बदलना है,
तो हमें आज के बच्चों से शुरुआत करनी होगी।
उन्हें सिर्फ पढ़ाना ही काफी नहीं है,
उन्हें अपने मन को समझना भी सिखाना होगा।
क्योंकि वही बच्चे आगे चलकर इस दुनिया को बनाएंगे
और अगर उनका मन शांत और जागरूक होगा,
तो समाज भी वैसा ही बनेगा।
आज चारों तरफ अशांति है यह सच्चाई है।
लेकिन इससे बचने का रास्ता भी है और वह है ध्यान।
ध्यान कोई भागने का रास्ता नहीं है,
यह जीवन को सही तरीके से जीने का तरीका है।
मैं खुद भी इसी दिशा में प्रयास कर रहा हूँ
ऐसी ध्यान की विधि पर काम कर रहा हूँ,
जो हमारे रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी हो,
जिसे हर आम इंसान आसानी से अपना सके।
संसाधन कम हैं,
पर प्रयास लगातार जारी है…
जैसे भोजन, पानी और हवा हर इंसान तक पहुँचती है,
वैसे ही ध्यान भी हर जन-जन तक पहुँचे।
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