Foods for Vata Pitta - वात-पित्त वाले लोग कौन-सी दाल खाएं? क्या दाल सच में आपको सूट नहीं करती? या फिर गड़बड़ है आपकी बॉडी टाइप में? क्या आपको दाल खाना अच्छा लगता है, लेकिन हर बार खाने के बाद पेट फूलकर गुब्बारे जैसा हो जाता है?
या फिर सीने में इतनी तेज़ जलन होती है कि अगली बार दाल देखने का मन ही नहीं करता?
अगर हां, तो ज़रा रुकिए। प्रॉब्लम दाल में नहीं, आपकी प्रकृति (Body Type) में छुपी हो सकती है।
खासतौर पर अगर आपकी प्रकृति वात–पित्त की है - मतलब गैस भी जल्दी बनती है और शरीर में गर्मी भी तुरंत बढ़ जाती है - तो हो सकता है आप रोज़ ऐसी दालें खा रहे हों जो आपके पेट के अंदर “महाभारत” करा रही हों।
हम इस Post में बात करेंगे -
कौन सी दालें आपके लिए अमृत हैं और कौन सी दालें बन जाती हैं धीमा ज़हर।
वात–पित्त प्रकृति आखिर होती क्या है?
आयुर्वेद के अनुसार, वात–पित्त का मतलब है हवा + आग का कॉम्बिनेशन।
वात की वजह से शरीर में सूखापन, गैस, ब्लोटिंग होती है
पित्त की वजह से जलन, एसिडिटी, गर्मी और चिड़चिड़ापन
अब दिक्कत ये है कि ज़्यादातर दालें होती हैं रूक्ष (सूखी)।
सूखी चीज़ें वात को बढ़ाती हैं।
और अगर वही दाल गर्म तासीर की हुई, तो पित्त भी भड़क जाता है।
यानी गलत दाल = गैस + जलन = पेट का सत्यानाश
दालों का सुपरहीरो: मूंग दाल
पित्त वाले की लाइफसेवर है — मूंग दाल।
आयुर्वेद इसे यूं ही दालों का राजा नहीं कहता।
क्योंकि:
ये पचने में बहुत हल्की है
इसकी तासीर ठंडी होती है (शीतवीर्य)
ये वात और पित्त — दोनों को शांत रखती है
अगर आपका पेट अक्सर खराब रहता है, गैस बनती है या एसिडिटी रहती है —
तो पीली मूंग दाल आपके लिए किसी मेडिसिन से कम नहीं।
ये दालें बन सकती हैं आपकी मुसीबत
अब बात उन दालों की जो वात–पित्त वालों के लिए भारी पड़ सकती हैं।
1. कुलथी दाल (Horse Gram)
इसे किडनी स्टोन के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन
वात–पित्त वालों के लिए ये बहुत ज़्यादा गर्म है।
ये शरीर में इतनी गर्मी बढ़ा सकती है कि:
स्किन पर रैशेज़ आ जाएं
या नाक से खून आने लगे
2. चना और छोले
ये दालें होती हैं हद से ज़्यादा रूखी।
वात वालों के लिए गैस का परमाणु बम
पचने में इतनी भारी कि आपकी पाचन अग्नि सुस्त पड़ जाए
3. राजमा
राजमा का स्वभाव होता है विदाही —
यानि पचते वक्त ये अंदर जलन पैदा करता है।
वात और पित्त — दोनों के लिए
राजमा से दूरी बनाना ही समझदारी है।
उड़द दाल: दोस्त या दुश्मन?
उड़द दाल को लेकर लोग कंफ्यूज़ रहते हैं।
असल में:
ये चिकनी होती है, इसलिए वात को शांत करती है
लेकिन इसकी तासीर गर्म होती है, जो पित्त को भड़का देती है
इसलिए नियम साफ है -
उड़द दाल सिर्फ सर्दियों में, वो भी लिमिट में।
अरहर (तुअर) दाल का सच
अरहर दाल पित्त के लिए ठीक मानी जाती है,
लेकिन एक प्रॉब्लम है - ये गैस बहुत बनाती है।
तो क्या इसे छोड़ दें?
नहीं।
बस सही तरीके से पकाना सीख लें।
कुकिंग सीक्रेट्स: दाल को बनाएं पेट-फ्रेंडली
अगर दाल सही तरीके से पकाई जाए, तो उसके साइड इफेक्ट काफी हद तक कम हो जाते हैं।
1. भिगोना ज़रूरी है
दाल को कम से कम 30 मिनट से 2 घंटे तक भिगोकर रखें।
इससे गैस बनाने वाले तत्व कम हो जाते हैं।
2. घी डालना मत भूलिए
वात–पित्त वालों के लिए घी किसी अमृत से कम नहीं।
पित्त की गर्मी को शांत करता है
वात के रूखेपन को खत्म करता है
3. सही मसालों का तड़का
तड़के में इस्तेमाल करें:
सौंफ — पेट की गर्मी शांत करती है
धनिया — पित्त को कंट्रोल करता है
जीरा — पाचन सुधारता है
फाइनल टेकअवे
मूंग दाल और लाल मसूर को अपना बेस्ट फ्रेंड बनाइए
चना, छोले और राजमा से दूरी रखिए
दाल में घी और सौंफ का तड़का ज़रूर लगाइए
अगर आपको ये जानकारी काम की लगी हो,
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कमेंट में बताएं आपकी पसंदीदा दाल कौन सी है
और इसे उन दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करें
जो हर समय एसिडिटी की शिकायत करते रहते हैं
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