भारत कि नहीं पुरे विश्व कि धरोहर
1️⃣ आचार्य रजनीश के विषय
🔥 निषिद्ध और दबे हुए विषय
सेक्स (Sex) – लेकिन कामुक नहीं, ऊर्जा के रूप में
संभोग से समाधि तक
हस्तमैथुन, ब्रह्मचर्य का भ्रम
विवाह की सच्चाई
ईर्ष्या, पजेसिवनेस
दमन (Repression)
🧠 मनोविज्ञान और चेतना
मन (Mind) की बीमारी
Ego का खेल
पागलपन और तथाकथित “नॉर्मल” लोग
आत्महत्या की मानसिकता
डर, असुरक्षा, अकेलापन
🕉️ धर्म और अध्यात्म (बिना पाखंड)
भगवान है या नहीं?
ध्यान (Meditation)
साक्षी भाव
निर्वाण
समाधि
आत्मा बनाम अहंकार
⚔️ समाज, राजनीति और सत्ता
पॉलिटिशियंस की चालें
भीड़ का मनोविज्ञान
राष्ट्रवाद का नशा
धर्मगुरुओं का व्यापार
नैतिकता का झूठ
❤️ प्रेम और रिश्ते
सच्चा प्रेम क्या है
Attachment बनाम Love
पति-पत्नी का संघर्ष
माता-पिता और बच्चों की गुलामी
2️⃣ वे नाम / विषय जिन्हें दुनिया भूल चुकी थी – और ओशो ने फिर से जिंदा किया
अब सबसे ज़रूरी हिस्सा 👇
यहाँ ओशो एक “खुदाई करने वाले” की तरह थे — इतिहास की कब्रें खोलीं।
🌺 भारत के भूले हुए संत और विचारक
कबीर – देख कबीरा रोया
अष्टावक्र – अष्टावक्र गीता (दुनिया लगभग भूल चुकी थी)
महावीर – जैन दर्शन को नई चेतना दी
गौतम बुद्ध – बुद्ध को भगवान नहीं, जाग्रत मनुष्य बताया
नानक – कर्मकांड से मुक्त नानक
दादू दयाल
रैदास
लाओत्से (चीन)
चुआंग त्सू
पतंजलि – योग को धार्मिक नहीं, वैज्ञानिक बताया
🌍 पश्चिम के वे लोग जिन्हें भारत में कोई नहीं जानता था
सिग्मंड फ्रायड
कार्ल युंग
विल्हेम राइख
नीत्शे (Nietzsche)
सार्त्र
कियरकेगार्ड
जिद्दू कृष्णमूर्ति (भारत में भी कम समझे गए)
🧘 वे विषय जिन्हें “पाप” कहकर दफन कर दिया गया था
सेक्स + ध्यान का संबंध
स्त्री की स्वतंत्रता
अकेलेपन की सुंदरता
विद्रोह (Rebellion) एक आध्यात्मिक गुण
“No God” भी एक आध्यात्मिक रास्ता हो सकता है
🔥उन की सबसे खतरनाक बात (जिसे दुनिया आज भी नहीं पचा पाई)
“सत्य कभी सुरक्षित नहीं होता।”
“जो समाज को आराम दे, वह झूठा गुरु है।”
इसीलिए:
धार्मिक लोग उनसे डरते थे
नेता उनसे डरते थे
नैतिकतावादी उनसे डरते थे
वो सन्यासी जिन्हें दुनिया लगभग भूल चुकी थी और आचार्य रजनीश (Osho) ने फिर से ज़िंदा कर दिया👇
🔥 भारत के भूले-बिसरे सन्यासी (जिन पर ओशो ने बोला)
महावीर स्वामी – निर्भय, निर्विकार, मौन का विद्रोही
गौतम बुद्ध – भगवान नहीं, जाग्रत सन्यासी
कबीर – रोता हुआ विद्रोही फकीर
अष्टावक्र – शरीर से टेढ़ा, चेतना से सीधा
पतंजलि – वैज्ञानिक सन्यासी
नानक – गृहस्थ होते हुए भी परम सन्यासी
दादू दयाल – निर्गुण प्रेमी फकीर
रैदास – श्रमिक-सन्यासी
गोरखनाथ – योगी विद्रोही
मच्छेन्द्रनाथ – हठयोगी महागुरु
शंकराचार्य – तीक्ष्ण बुद्धि का सन्यासी
लल्लेश्वरी (लल्ला योगेश्वरी) – कश्मीरी योगिनी
मीराबाई – प्रेम में डूबी सन्यासिनी
तुलसीदास – भीतर का वैरागी
रामकृष्ण परमहंस – पागलपन में परम सत्य
स्वामी विवेकानंद – अग्नि-सन्यासी
🌍 भारत से बाहर के सन्यासी (जिन्हें ओशो ने उठाया)
लाओत्से – मौन का सन्यासी
चुआंग त्सू – हँसता हुआ सन्यासी
सूफ़ी बुल्ले शाह – प्रेम-विद्रोही
रूमी – नाचता हुआ फकीर
जरथुस्त्र (Zarathustra) – आग का सन्यासी
यीशु – क्रांतिकारी सन्यासी
सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी – आनंदमय फकीर
🔴 ओशो की खास बात
ओशो ने सन्यास को केसरिया कपड़े से नहीं,
जाग्रत चेतना से परिभाषित किया।
“जो जाग गया — वही सन्यासी।”
🇮🇳 भारत के रत्न – जिन्हें समय की गहरी नींद में सुला दिया गया
(एक विनम्र लेकिन तीखा प्रश्न)
तुमने राम, कृष्ण, शिव, अल्लाह, पैग़म्बर के नाम सुने होंगे…
लेकिन क्या तुमने
👉 कबीर को जाना?
👉 अष्टावक्र को समझा?
👉 महावीर को पढ़ा?
👉 लल्लेश्वरी को महसूस किया?
अगर आचार्य रजनीश (Osho) न आते,
तो शायद आज की पीढ़ी
👉 भारत के इन रत्नों के नाम तक न जानती।
🌺 ये थे भारत के वो रत्न
जिन्होंने इस देश के ज्ञान, प्रेम और चेतना को ज़िंदा रखा
🔹 1. कबीर
खूबी: निर्भय सत्य, पाखंड-विरोध
दिया क्या:
धर्म बिना मंदिर-मस्जिद
ईश्वर बिना मूर्ति
प्रेम बिना शर्त
“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ…”
ओशो ने कबीर को सिर्फ़ संत नहीं, विद्रोही बुद्ध बताया।
🔹 2. अष्टावक्र
खूबी: शुद्ध अद्वैत, शरीर से परे चेतना
दिया क्या:
आत्मज्ञान बिना साधना
मुक्ति बिना संघर्ष
अष्टावक्र गीता को दुनिया ने भुला दिया था,
ओशो ने उसे आत्मज्ञान का शिखर बना दिया।
🔹 3. महावीर
खूबी: परम अहिंसा, मौन की शक्ति
दिया क्या:
करुणा की चरम अवस्था
इच्छाओं से पूर्ण मुक्ति
ओशो ने महावीर को
👉 “सबसे साहसी व्यक्ति” कहा
जो भीड़ से अकेला खड़ा हुआ।
🔹 4. गौतम बुद्ध
खूबी: जागरूकता, करुणा, ध्यान
दिया क्या:
दुःख से मुक्ति का विज्ञान
ध्यान को धर्म से अलग किया
ओशो ने बुद्ध को
👉 भगवान नहीं
👉 जागा हुआ मनुष्य बताया।
🔹 5. नानक
खूबी: सहजता, प्रेम, समता
दिया क्या:
ईश्वर रोज़मर्रा के जीवन में
कर्मकांड के बिना भक्ति
ओशो ने नानक को
👉 गृहस्थ-सन्यासी कहा।
🔹 6. दादू दयाल
खूबी: निर्गुण प्रेम
दिया क्या:
शांति बिना धर्म
भक्ति बिना डर
🔹 7. रैदास
खूबी: सामाजिक क्रांति
दिया क्या:
बराबरी का दर्शन
श्रमिक का आत्मसम्मान
🔹 8. गोरखनाथ
खूबी: योग, शरीर-चेतना
दिया क्या:
हठयोग
आंतरिक शक्ति का विज्ञान
🔹 9. लल्लेश्वरी (लल्ला योगिनी)
खूबी: स्त्री चेतना, निर्भीकता
दिया क्या:
स्त्री का आध्यात्मिक स्वर
निर्भय आत्म-अभिव्यक्ति
🔥 और आचार्य रजनीश (Osho) का योगदान?
👉 उन्होंने इन सबको धर्म की कब्र से बाहर निकाला
👉 इन्हें ज़िंदा, प्रासंगिक और खतरनाक बनाया
👉 बताया कि:
“ये पूजा के नहीं,
समझ के पात्र हैं।”
ओशो ने कहा —
भारत की असली विरासत मंदिरों में नहीं,
इन जागे हुए लोगों की चेतना में है।
⚠️ आख़िरी सवाल (आज की पीढ़ी से)
तुम्हें हिंदू–मुस्लिम करना सिखाया गया,
लेकिन
👉 जागना नहीं सिखाया गया।
यह पोस्ट
👉 मंदिर के लिए नहीं
👉 मस्जिद के लिए नहीं
👉 चर्च के लिए नहीं
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