Blood Purification Ayurveda - ब्लड क्यूँ ख़राब होता है और ख़ून साफ़ रखना क्यों ज़रूरी है? चाहे बात blood cancer की हो, या फिर खून खराब होने से बनने वाली शरीर की गांठों की, महिलाओं में periods के दौरान जरूरत से ज़्यादा bleeding की, या फिर piles, fistula, नाक से खून आना, खून की उल्टी होना-
इन सब बीमारियों में एक लाइन आपने ज़रूर सुनी होगी:
“खून खराब हो गया है।”
लेकिन सवाल ये है-
खून आखिर खराब क्यों होता है?
क्या सच में सिर्फ खाने-पीने से खून बिगड़ता है?
या इसके पीछे कुछ और, ज्यादा गहरे कारण हैं?
इस POST में हम आयुर्वेद के नज़रिये से समझेंगे-
कि खून क्यों खराब होता है
और उसे साफ, शुद्ध और healthy कैसे रखा जाए।
आयुर्वेद में खून की अहमियत
आयुर्वेद कहता है-
हमारा शरीर जिस चीज़ पर सबसे ज़्यादा टिका है,
जिसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती,
वो है रक्त धातु (Blood)।
शरीर में कुल 7 धातुएं होती हैं:
रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र।
इनमें से रक्त धातु को जीवन के बराबर माना गया है।
इसलिए आयुर्वेद हमेशा कहता है-
रक्त को बचाओ, संभालो और शुद्ध रखो।
आज के समय में चाहे
skin diseases हों
heart problems हों
varicose veins
autoimmune issues
या cancer जैसी गंभीर बीमारियां
इन सबके root में कहीं न कहीं
खून की खराबी जुड़ी होती है।
खून खराब होने के असली कारण
(आचार्य सुश्रुत के अनुसार)
अगर खून के बारे में सबसे authentic knowledge चाहिए,
तो वो मिलती है आचार्य सुश्रुत से—
जिन्हें Father of Surgery कहा जाता है।
सुश्रुत संहिता के अनुसार,
खून खराब होने का सबसे बड़ा कारण शरीर नहीं, दिमाग है।
1. Mental Causes – दिमाग सबसे बड़ा culprit
आचार्य सुश्रुत चार मुख्य कारण बताते हैं:
क्रोध (Anger)
हर छोटी बात पर गुस्सा,
हमेशा irritate रहना,
argument के लिए ready रहना—
ये सब सीधे आपके blood को heat up करता है।
शोक (Sadness)
किसी भी बात का लगातार दुख मनाना।
आचार्य चरक तक कहते हैं:
“विषाद रोग वर्धन नाम श्रेष्ठतम”
यानि दुख मनाना बीमारी बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण है।
भय (Fear)
Future का डर,
exam का डर,
disease का डर,
financial tension—
हर तरह का डर खून को खराब करता है।
आयास (Over-exertion)
बहुत ज़्यादा मेहनत,
धूप में काम,
भट्टी या गर्म माहौल में काम—
ये सब शरीर में heat बढ़ाते हैं,
और blood को disturb करते हैं।
2. Viruddha Aahar – गलत food combinations
कुछ खाने की चीज़ें ऐसी होती हैं
जो अलग-अलग ठीक होती हैं
लेकिन साथ में खाईं जाएं तो ज़हर बन जाती हैं।
जैसे:
दूध + नमक
दूध + दही
इन्हें आयुर्वेद में विरुद्ध भोजन कहा गया है,
और ये सीधे रक्त को खराब करता है।
3. Khane Se Kharaab Hone Wala Khoon
सुश्रुत आगे कहते हैं:
जो लोग ज़्यादातर खाते हैं—
बहुत तीखा
बहुत खट्टा
बहुत नमकीन
spicy, chili sauce, fast food
सलाद पर extra नमक,
अचार, पापड़, चटनी-
ये सब blood में heat बढ़ाते हैं।
इससे पित्त बढ़ता है,
और वही पित्त जब रक्त धातु में जाता है
तो खून खराब होने लगता है।
खून खराब होने से कौन-कौन सी बीमारियां?
जब पित्त रक्त में बढ़ता है,
तो ये problems सामने आती हैं:
नाक से खून
internal bleeding
periods में excessive bleeding
piles, fistula में bleeding
blood cancer
skin disorders - दाद खाज खुजली
यानि जड़ एक ही है-
रक्त की अशुद्धि + पित्त imbalance।
चरक और वाग्भट क्या कहते हैं?
आचार्य चरक कहते हैं-
मद्य (Alcohol) खून खराब करने का बड़ा कारण है।
शराब nature में गर्म होती है,
और ज्यादा alcohol intake
रक्त और पित्त दोनों को बिगाड़ देता है।
वाग्भट ऋषि भी यही कहते हैं-
जो चीजें पित्त और कफ बिगाड़ती हैं,
वो अंत में खून को ही खराब करती हैं।
अब सवाल – खून साफ कैसे रखें?
आयुर्वेद इलाज की शुरुआत करता है
एक simple principle से:
निदान परिमार्जन
यानि-
जो कारण बीमारी कर रहा है,
उसे हटाओ, बीमारी अपने आप कम होगी।
1. Mind Healing – ध्यान और मेडिटेशन
अगर कारण दिमाग है,
तो इलाज भी वहीं से शुरू होगा।
रोज़ सुबह-शाम
25–30 मिनट ध्यान / meditation
खून से जुड़ी गंभीर बीमारियों में भी
बहुत strong results देता है।
2. Six Tastes Balance करें
खाने में सिर्फ
तीखा-खट्टा-नमकीन नहीं,
बल्कि 6 रस शामिल करें:
मीठा
खट्टा
नमकीन
तीखा
कड़वा
कसैला
खासकर
मीठा, कड़वा और कसैला
पित्त को शांत करते हैं
और खून को ठंडक देते हैं।
3. Panchkarma – Blood Purification
आयुर्वेद का सबसे powerful तरीका-
रक्तमोक्षण।
खासतौर पर
शरद ऋतु (October) में
blood donation, jalauka therapy, cupping
से अशुद्ध खून बाहर निकालना
बहुत फायदेमंद होता है।
साथ ही
हर 2–3 महीने में
पित्त साफ करने की औषधियां
किसी वैद्य की सलाह से लें।
पित्त साफ करने की आयुर्वेदिक औषधियां
(Pitta Detox Medicines)
1. अविपत्तिकर चूर्ण
ये पित्त शांत करने की सबसे famous और safe औषधि है।
जिन लोगों को
पेट में जलन
एसिडिटी
सीने में जलन
मुंह में छाले
खून की गर्मी
होती है, उनके लिए बहुत फायदेमंद है।
सेवन विधि:
रात को खाने के बाद
1/2 से 1 चम्मच
गुनगुने पानी या दूध के साथ।
2. कामदुधा रस (मुक्तायुक्त)
अगर पित्त बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है,
और symptoms जैसे-
नाक से खून
ज्यादा bleeding
periods में excessive flow
शरीर में जलन
तो कामदुधा रस बहुत effective रहती है।
सेवन विधि:
1 गोली
दिन में 2 बार
3. प्रवाल पिष्टी / मुक्ताशुक्ति पिष्टी
ये medicines खासतौर पर
blood heat और burning sensation के लिए दी जाती हैं।
आंखों में जलन
हथेली-पैरों में जलन
पेशाब में जलन
इन सब में बहुत अच्छा काम करती हैं।
सेवन विधि:
125 mg
शहद या घी के साथ
दिन में 1–2 बार।
4. गिलोय सत्व / गिलोय घन वटी
गिलोय को आयुर्वेद में
अमृत कहा गया है।
खून साफ करता है
इम्यूनिटी बढ़ाता है
पित्त को balance करता है
सेवन विधि:
गिलोय घन वटी – 1–2 गोली
सुबह खाली पेट या शाम को।
5. नीम घन वटी / नीम चूर्ण
नीम खून साफ करने की
सबसे strong herbs में से एक है।
skin diseases
acne
खुजली
फोड़े-फुंसी
इन सब में नीम बहुत असरदार है।
सेवन विधि:
नीम घन वटी – 1 गोली
दिन में 1–2 बार।
6. त्रिफला – हल्का detox
त्रिफला सीधे खून नहीं,
लेकिन आंतों को साफ करके पित्त को बाहर निकालती है।
सेवन विधि:
रात को
1/2 चम्मच
गुनगुने पानी के साथ।
एक जरूरी बात (बहुत important)
ये सारी औषधियां
general guidance के लिए हैं।
अगर आपको:
ज्यादा bleeding
blood cancer
गंभीर skin disorder
chronic liver problem
जैसी conditions हैं,
तो self-medication ना करें,
किसी नज़दीकी आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह जरूर लें।
4. Diet Jo Khoon Saaf Rakhe
घी का रोज़ सेवन
आंवला
करेला
गिलोय
नीम
परवल
मुनक्का
चीनी की जगह मिश्री का उपयोग करें।
और एक खास सब्ज़ी—
कुष्मांड (Pumpkin / पेठा / कोहड़ा)
ये खून की गर्मी उतारने में
best natural medicine है।
Final Takeaway
खून खराब होना कोई अचानक होने वाली चीज़ नहीं,
ये धीरे-धीरे बनता imbalance है-
दिमाग + खानपान + lifestyle का।
अगर आयुर्वेद की ये simple बातें अपनाईं,
तो आपका blood clean, cool और strong रहेगा।
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