Saturday, January 24, 2026

How To Control Anxiety

 घबराहट और एंग्जायटी को कंट्रोल करने के आसान तरीके - क्या आपकी दिल की धड़कन अचानक तेज हो जाती है?

क्या आपको लगता है कि सांस सामान्य से ज्यादा तेज चल रही है?

क्या मन चाहकर भी आप खुद को शांत नहीं कर पाते?


अगर ये सब लक्षण बार-बार महसूस होते हैं, तो संभव है कि आप एंग्जायटी डिसऑर्डर से जूझ रहे हों। जीवन में कभी-कभी हर इंसान घबराहट, बेचैनी या तनाव महसूस करता है, यह सामान्य है। 


लेकिन जब यह बेचैनी लगातार बनी रहे और जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए, तब व्यक्ति खुद को असहाय, उलझा हुआ और चिड़चिड़ा महसूस करने लगता है।


जब एंग्जायटी एक सीमा से आगे निकल जाती है, तो यह रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगती है। काम पर ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है, रिश्तों पर असर पड़ता है और व्यक्ति भीतर से टूटने लगता है। 


ऐसी स्थिति को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है, क्योंकि यही एंग्जायटी आगे चलकर डिप्रेशन का रूप भी ले सकती है।


एंग्जायटी डिसऑर्डर के प्रकार

एंग्जायटी केवल एक तरह की नहीं होती। इसके कई रूप हो सकते हैं, जिनकी गंभीरता अलग-अलग होती है।


सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर

ऐसे लोग जो समाज में दूसरों की नकारात्मक राय को लेकर लगातार चिंतित रहते हैं, लोगों के बीच जाने से डरते हैं या खुद को जज किए जाने का भय महसूस करते हैं, वे सोशल एंग्जायटी से पीड़ित हो सकते हैं।


पैनिक डिसऑर्डर

इस स्थिति में व्यक्ति को अचानक और बिना किसी स्पष्ट कारण के तीव्र डर और घबराहट महसूस होती है। सांस फूलना, सीने में जकड़न, चक्कर आना और अत्यधिक पसीना आना इसके आम लक्षण हैं।


सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर

जब किसी अपने से दूर होने का विचार ही गहरी बेचैनी और डर पैदा कर दे, तो यह सेपरेशन एंग्जायटी का संकेत हो सकता है।


इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर

स्वास्थ्य को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंता करना, छोटी-छोटी बातों में गंभीर बीमारी का डर पाल लेना, इस प्रकार की एंग्जायटी को दर्शाता है।


फोबिया

किसी विशेष वस्तु, जगह या स्थिति से अत्यधिक और तर्कहीन डर होना फोबिया कहलाता है।


एंग्जायटी के सामान्य लक्षण

एंग्जायटी से पीड़ित व्यक्ति अक्सर तनावग्रस्त रहता है और अकेले रहना पसंद करने लगता है।

सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना आम समस्या है।

नींद पूरी न होना, रात में बार-बार जागना या बहुत कम सो पाना।

नकारात्मक विचारों में घिरे रहना, सिरदर्द और एकाग्रता की कमी।

घबराहट के कारण दस्त, उल्टी या मुंह सूखने के बाद चक्कर आना।

मांसपेशियों में खिंचाव, सीने में भारीपन और लगातार थकान महसूस होना।


एंग्जायटी से राहत का आधार: हेल्दी लाइफस्टाइल

एंग्जायटी से बाहर निकलने का सबसे मजबूत रास्ता है एक संतुलित जीवनशैली अपनाना। इसमें सही खान-पान, कैफीन और अल्कोहल का सीमित सेवन, पर्याप्त आराम और खुद के लिए समय निकालना शामिल है।


पाचन सुधारने और मन को शांत करने का उपाय

3–4 ताजी पुदीने की पत्तियां लें या सूखे पुदीने का पाउडर तैयार करें।

एक गिलास सामान्य तापमान वाला पानी लें।

आधा नींबू निचोड़ें और पुदीना उसमें मिला दें।

इस पानी को सुबह खाली पेट पिएं। चाहें तो दिन में दो बार लिया जा सकता है।


यह उपाय पाचन को सुधारता है, एसिडिटी और खट्टी डकारों से राहत देता है। पुदीने में मौजूद मैग्नीशियम दिमाग को शांत करता है, फाइबर गैस और कब्ज में मदद करता है और मेंथॉल शरीर को ठंडक देता है।


इस उपाय को शुरू करते ही चाय का सेवन बंद कर देना बेहतर होता है।


गैस और बदहजमी के लिए पाउडर

आधा चम्मच अजवायन पाउडर लें।

एक चुटकी काला नमक और काली मिर्च मिलाएं।

खाने के 15 मिनट बाद इसे गुनगुने पानी के साथ लें।

यह उपाय केवल 3 दिन करें।


कुछ आसान घरेलू सहायक उपाय

खाने के बाद एक चम्मच गुड़ खाने से पाचन बेहतर होता है।

अदरक रस, पानी, काला नमक और काली मिर्च मिलाकर पेय तैयार किया जा सकता है।

पुदीना रोजाना भोजन में शामिल करें।


ट्रिपल 3 रूल अपनाएं

जब भी बेचैनी बढ़े, अपने आसपास की तीन चीजों को देखें और उनके नाम लें।

फिर तीन आवाजों को पहचानें जो आप सुन रहे हों।

अंत में पैरों, उंगलियों और हाथों को धीरे-धीरे हिलाएं।


यह तकनीक तेज चल रही सोच को धीमा करती है और दिमाग को वर्तमान में लाती है।


एंग्जायटी में सहायक प्राकृतिक चीजें

1. ग्रीन टी

ग्रीन टी एंग्जायटी कम करने में काफी मददगार मानी जाती है, क्योंकि इसमें L-theanine नामक तत्व होता है। यह दिल की तेज धड़कन को शांत करता है और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में सहायक होता है।

अगर रोज़ाना 2 से 3 कप ग्रीन टी पी जाए, तो घबराहट और बेचैनी में कमी आ सकती है। इसे बनाने के लिए 2–3 चम्मच ग्रीन टी पानी में उबालें। स्वाद के लिए थोड़ा नींबू रस या शहद मिला सकते हैं।


2. संतरा (ऑरेंज)

संतरे की ताज़ी खुशबू नसों को तुरंत सुकून देती है और मूड बेहतर करती है। इसके छिलके की सुगंध मन को हल्का करती है और उदासी को कम करने में मदद करती है।

सिर्फ संतरा छीलकर खाना भी लाभकारी है। चाहें तो संतरे के छिलके को गर्म पानी में डालकर उसकी भाप लें। रोज़ एक गिलास संतरे का जूस पीना भी फायदेमंद रहता है।


3. जायफल

जायफल एक असरदार मसाला है जो मांसपेशियों को रिलैक्स करता है, नींद बेहतर करता है और एंग्जायटी व डिप्रेशन से लड़ने में मदद करता है।

इसकी खुशबू लेने के लिए जायफल ऑयल सूंघा जा सकता है। खाने में एक चौथाई टेबलस्पून जायफल पाउडर मिलाया जा सकता है। मात्रा ज्यादा न लें, वरना साइड इफेक्ट हो सकते हैं।

गर्भावस्था में जायफल का उपयोग न करें, क्योंकि इससे गर्भाशय संकुचन और ब्लीडिंग का खतरा हो सकता है।


4. कैमोमाइल टी

कैमोमाइल टी में luteolin और apigenin जैसे फाइटोकेमिकल्स होते हैं, जो शरीर और दिमाग को रिलैक्स करते हैं।

2–3 टेबलस्पून सूखी कैमोमाइल को पानी में उबालें, फिर छान लें। स्वाद के लिए थोड़ा शहद मिला सकते हैं। जरूरत पड़ने पर दिन में 2–3 कप तक पी सकते हैं, खासकर जब एंग्जायटी महसूस हो।


5. लेमन बाम

लेमन बाम एक प्रभावी हर्ब है जो नर्वस सिस्टम और पाचन तंत्र दोनों को शांत करती है। यह ब्लड प्रेशर कम करने और मन को स्थिर करने में मदद करती है।

एक टेबलस्पून लेमन बाम को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं और रात को सोने से पहले पिएं। इसे दो हफ्तों से अधिक लगातार न लें।


6. एप्सम सॉल्ट

गर्म पानी से स्नान करने से शरीर का तापमान बढ़ता है, जिससे मूड बेहतर होता है और तनाव कम होता है।

अगर इस पानी में एक कप एप्सम सॉल्ट मिला दिया जाए, तो असर और बढ़ जाता है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम सल्फेट ब्लड प्रेशर घटाने, तनाव कम करने और घबराहट शांत करने में मदद करता है।


रोजमर्रा की आदतें जो एंग्जायटी घटाती हैं

समय पर सोना और 6–8 घंटे की नींद लेना।

खुद के लिए रोज कम से कम 30 मिनट निकालना।

टहलना, व्यायाम और योग को दिनचर्या में शामिल करना।

ध्यान, गहरी सांस लेना और हंसना।

धूम्रपान, शराब और कैफीन से दूरी।


अश्वगंधा का सही उपयोग

अश्वगंधा दिमाग को शांत करता है और शरीर को संतुलन में लाता है।

पाउडर रूप में इसका सेवन ज्यादा प्राकृतिक माना जाता है।

हल्के गर्म दूध या पानी के साथ रात में लेना बेहतर होता है।

शुरुआत में आधा चम्मच पर्याप्त है, महिलाओं को इससे कम मात्रा लेनी चाहिए।


एंग्जायटी से निपटने का मानसिक तरीका

1. आज के पल पर ध्यान दें

यह कहना आसान होता है कि वर्तमान में जिएं, लेकिन एंग्जायटी में दिमाग जैसे ठहर सा जाता है। इंसान सही–गलत में फर्क नहीं कर पाता और उसे लगता है कि जो सोच चल रही है, उसी रास्ते पर चलना मजबूरी है।


अक्सर एंग्जायटी भविष्य की आशंकाओं से जुड़ी होती है। ऐसे में खुद से सवाल पूछना शुरू करें —

क्या आज वास्तव में कुछ बुरा होने वाला है?

क्या इस समय मैं सुरक्षित हूं?

क्या मुझे अभी कोई कदम उठाने की जरूरत है?


अगर जवाब “नहीं” है, तो खुद के लिए एक तय समय रखें जब आप इन सवालों पर सोचेंगे। धीरे-धीरे सिर्फ वही चिंताएं बचेंगी जिन पर ध्यान देना जरूरी है, बाकी बेवजह की फिक्र अपने आप कम होने लगेगी।


2. हालात को नए नजरिए से देखें

घबराहट के दौरान कई बार ऐसा लगता है जैसे हार्ट अटैक आने वाला है या कुछ बहुत गलत हो जाएगा। ऐसे समय में खुद को संभालना बेहद जरूरी है।


अपने आप से कहें कि यह पैनिक अटैक खतरनाक नहीं है, यह कुछ समय में खुद ही शांत हो जाएगा। इससे मुझे कोई स्थायी नुकसान नहीं होगा।

कई बार ऐसा भ्रम होता है कि जान खतरे में है, लेकिन हकीकत यह है कि शरीर खुद को ठीक करने की प्रक्रिया में होता है और आप सुरक्षित होते हैं।


3. गहरी सांसों पर ध्यान दें

एंग्जायटी के समय लंबी और धीमी सांसें दिमाग को शांत करने में मदद करती हैं। सांस गिनने की जरूरत नहीं है। बस धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें।

यह प्रक्रिया बेचैनी को कम करती है और ध्यान को दोबारा केंद्रित करने में मदद करती है।


4. खुद को किसी काम में लगाएं

बेचैनी के वक्त खाली बैठना मुश्किल बढ़ा देता है। ऐसे समय कुछ भी करना बेहतर होता है।

खड़े हो जाएं, थोड़ा टहल लें, आसपास पड़ी किसी चीज को उठाकर व्यवस्थित करें।

कोई भी छोटा काम आपको परेशान करने वाले ख्यालों से ध्यान हटाने में मदद करता है और कुछ ही समय में सोच पर फिर से नियंत्रण आने लगता है।


5. शरीर के जरिए दिमाग को संकेत दें

जब घबराहट होती है, तो शरीर अपने जरूरी अंगों की सुरक्षा के मोड में चला जाता है। लेकिन शरीर की स्थिति बदलकर दिमाग को यह संदेश दिया जा सकता है कि सब ठीक है।


आराम से बैठें, कंधे ढीले छोड़ें, पीठ को सहारा दें और पैरों को आराम से फैलाएं।

इस पोस्चर से दिमाग को संकेत मिलता है कि खतरा नहीं है और नकारात्मक विचार धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगते हैं।


6. अपनों से बात करें


घबराहट में दोस्त और परिवार बहुत बड़ा सहारा बन सकते हैं। किसी भरोसेमंद व्यक्ति को कॉल करें या मैसेज करें।

जो भी मन में है, खुलकर कहें।

अक्सर अपनी बात कह देने भर से मन हल्का हो जाता है और आप बेहतर महसूस करने लगते हैं।


एंग्जायटी कमजोरी नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना कमजोरी जरूर बन सकता है। सही जानकारी, सही आदतें और समय पर देखभाल से इससे बाहर निकला जा सकता है।


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