Tuesday, January 27, 2026

युवा उम्र में हार्ट अटैक क्यों

 Heart Care Tips - युवा उम्र में हार्ट अटैक क्यों ज़्यादा जानलेवा होता है? क्यों उम्रदराज़ लोग कई बार हार्ट अटैक के बाद भी बच जाते हैं, लेकिन युवा लोगों में वही अटैक जानलेवा साबित हो जाता है?


आज का यह article इसी सवाल का जवाब है।

और साथ ही यह भी कि हम अपने risk को कैसे कम कर सकते हैं, और अगर कभी ऐसी स्थिति आए तो शरीर उसे बेहतर तरीके से कैसे झेल पाए।


दिल की नसों को समझना ज़रूरी है

दिल को खून पहुँचाने वाली मूल रूप से दो मुख्य धमनियाँ होती हैं—

एक बाईं तरफ की और एक दाईं तरफ की।


बाईं तरफ की धमनी दो बड़ी शाखाओं में बँटती है-


LAD (लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग)

LCX (लेफ्ट सर्कमफ्लेक्स)


दाईं तरफ की धमनी हार्ट की निचली सतह को खून पहुँचाती है।

इस तरह हार्ट के तीन ज़ोन बन जाते हैं, इसलिए आम भाषा में हम तीन नसें कहते हैं।


सबसे महत्वपूर्ण नस होती है LAD, जो दिल की लगभग 60–65% ब्लड सप्लाई करती है।

LCX लगभग 20% और राइट कोरोनरी आर्टरी लगभग 15–20% सप्लाई करती है।


यानी साफ़ है—

लेफ्ट साइड की नसें राइट से कहीं ज़्यादा अहम हैं।


अचानक ब्लॉकेज और सडन डेथ

अगर किसी व्यक्ति में अचानक LAD या लेफ्ट मेन आर्टरी पूरी तरह ब्लॉक हो जाए, तो यह मैसिव हार्ट अटैक का कारण बनता है।

और ऐसे मामलों में अचानक मौत की संभावना बहुत ज़्यादा होती है।


बरगद के पेड़ का उदाहरण

इसे समझने के लिए बरगद के पेड़ का उदाहरण लेते हैं।


जब आप बरगद का पौधा लगाते हैं, तो शुरू के कई सालों तक उसमें सहायक जड़ें नहीं आतीं।

लेकिन समय के साथ उसमें ज़मीन तक पहुँचने वाली मजबूत जड़ें बनती जाती हैं।


एक समय ऐसा आता है कि अगर मुख्य तना कट भी जाए, तब भी वे जड़ें पूरे पेड़ को ज़िंदा रख सकती हैं।


यही सिद्धांत दिल पर लागू होता है

दिल में भी कुछ ऐसा ही होता है।

जब ब्लॉकेज धीरे-धीरे बनती है, तो शरीर को समय मिलता है नई छोटी-छोटी नसें बनाने का।


इन्हें ही हम कहते हैं कोलैटरल आर्टरीज या नेचुरल बायपास।


लेकिन युवा व्यक्ति में अगर पहली बार ही अचानक क्लॉट बनकर नस बंद हो जाए, तो शरीर को कोलैटरल बनाने का मौका ही नहीं मिलता।


इसलिए युवा लोगों में खतरा ज़्यादा

युवा लोगों में अक्सर ये चीज़ें होती हैं—


बैठा रहने वाला जीवन

डायबिटीज

धूम्रपान या तंबाकू

मेटाबॉलिक सिंड्रोम

बढ़ा हुआ लिपिड प्रोफाइल


इन सबके बीच अगर अचानक क्लॉट बन जाए, तो नुकसान बहुत ज़्यादा होता है और जान जाने का खतरा भी।


उम्रदराज़ लोगों में क्यों बचने की संभावना ज़्यादा होती है

अगर ब्लॉकेज धीरे-धीरे बनी हो, तो शरीर समय रहते कोलैटरल बना लेता है।


कुछ ऐसे मरीज ऐसे भी देखे हैं जिनकी तीनों कोरोनरी आर्टरीज पूरी तरह बंद थीं, फिर भी उनका हार्ट फंक्शन लगभग सामान्य था।


ऐसे केस बहुत दुर्लभ होते हैं, लेकिन यह दिखाते हैं कि अगर शरीर को समय मिले तो नेचर कमाल कर सकती है।


कोलैटरल काफी होती हैं, लेकिन परफेक्ट नहीं

अधिकतर मामलों में कोलैटरल हार्ट को ज़िंदा तो रखती हैं, लेकिन पूरी सप्लाई नहीं दे पातीं।


ऐसे मरीज आराम की स्थिति में ठीक रहते हैं, लेकिन चलते ही सीने में दर्द शुरू हो जाता है।

इन मामलों में स्टेंट संभव नहीं होता और बायपास सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है।


कोलैटरल बनाने का सबसे आसान तरीका

अब सबसे अहम सवाल-

कोलैटरल कैसे बनाएं?


इसका सबसे सरल और प्रभावी तरीका है—

रेगुलर एक्सरसाइज़।

अपने शरीर को उसकी सीमा तक, लेकिन सुरक्षित तरीके से पुश करना।


टारगेट हार्ट रेट क्या है?

एक सामान्य फॉर्मूला है—

220 – आपकी उम्र


मान लीजिए उम्र 50 साल है, तो टारगेट हार्ट रेट 170 होगा।

आपको 100% तक जाने की ज़रूरत नहीं है।

70–80% रेंज पर्याप्त और सुरक्षित होती है।


यानी 50 साल की उम्र में 130–140 हार्ट रेट पर एक्सरसाइज़ करना।


यही असली प्रिवेंशन है

नियमित एक्सरसाइज़ से हार्ट को चुनौती मिलती है, और इसी चुनौती के जवाब में कोलैटरल बनती हैं।


जांच की भूमिका

मध्यम risk वाले लोगों के लिए CT कोरोनरी एंजियोग्राफी एक अच्छा टेस्ट है।


कम risk वाले, खासकर 45 साल से कम उम्र के लोगों के लिए

नॉन-इनवेसिव टेस्ट जैसे इको आधारित जांच उपयोगी होती है।


ध्यान रखें—

जब अचानक क्लॉट बनता है, कोई भी टेस्ट उसे पहले से नहीं पकड़ सकता।

लेकिन यह जरूर पता लगाया जा सकता है कि कहीं पहले से कोई साइलेंट ब्लॉकेज तो नहीं है।


आख़िरी संदेश

कोलैटरल फॉर्मेशन ही मूल मंत्र है।


नियमित चलिए।

पसीना बहाइए।

अपने दिल को मज़बूत बनाइए।


ताकि अगर कभी चुनौती आए, तो आपका दिल उसे झेलने के लिए तैयार हो।

क्या आपने कभी दिल की जाँच कराई है?

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