Monday, June 15, 2020

17 वेबसाइट for IAS

17 ऐसी वेबसाइट जो आपके IAS बनने के सपने को कर सकती हैं साकार


ई-लर्निंग आज की शिक्षा में सबसे बड़ी सूचना क्रांति है। ऑनलाइन सूचनाओं का डेटाबेस लगातार अपडेट होते रहता है इसलिए यह आईएएस उम्मीदवारों को सीखने के लिए एक शानदार अवसर प्रदान करता है। हालांकि ऑनलाइन शिक्षा की अपनी सीमाएं होती हैं, लेकिन अभी भी इससे जुड़े फायदे अद्वितीय हैं।
जब बात आईएएस परीक्षा की तैयारी करने की आती है तो यह बात मायने रखती है कि आपने किस क्वालिटी की पढ़ाई की है, लेकिन इसके साथ-साथ यह बात भी उतने ही मायने रखती है कि आपने कितनी पढ़ाई की है। जबसे इंटरनेट सूचना का एक प्रमुख स्रोत बन गया है तब से यहां भी आपको आसानी से स्टडी मटेरियल (अध्ययन सामाग्री) मिल जाता है और किताबों के एकत्रीकरण से बचा जा सकता है।
समसामयिक विषयों की जानकारी के लिए हर रोज विजिट किए जाने योग्य वेबसाइट्स की सूची: इस श्रेणी में ज्यादातर समसामयिक मामलों से संबंधित वेबसाइटों का वर्णन है। आईए इन सूचीबद्ध वेब पेज से पढ़े जाने योग्य सामाग्री का विश्लेषण करते हैं।
1. newsonair.com (ऑल इंडिया रेडियो): आकाशवाणी पर प्रसारित होने वाले हर रोज रात के 9 बजे वाले न्यूज अपडेट्स सुनें और और रविवार को प्रसारित होने वाले बहस- विचार विमर्श को भी आप यहां सुन सकते हैं
2. pib.nic.in: भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय की वेबसाइट्स को सरकारी सूचनाएं सबसे पहले प्रदान करने वाली साइट्स के रूप में जाना जाता है। यहां सभी मंत्रालयों की समसामयिक जानकारी, जैस- नयी योजनाओं का शुभारंभ और सुप्रीम कोर्ट के कुछ ऐतिहासिक निर्णयों की जानकारी प्राप्त होती है।
3. प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया बहुत ही महत्वपूर्ण वन लाइनर (संक्षिप्त) सूचनाएं प्रदान करता है जो कि आईएएस की प्रारंभिक परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। कौन, क्या, कब और कहाँ जैसे अपडेट यहां आसानी से पाए जा सकते हैं।
4. यह एक ऐसी वेबसाइट है जहां आप एक ही जगह पर सभी बेहतर संपादकीय और विचारों से संबंधित लेखों को पढ़ सकते हैं। जिस टॉपिक का विश्लेषण करने की जरूरत है उसका चुनाव करें और द हिंदू के आर्टिकल वाले ऑप्शन में उस लेख को खोजें। यह एक मुद्दे पर एक प्रगतिशील अध्ययन प्रदान करता है।
5. यहां आप नवीनतम आर्थिक नीति पर श्रेष्ठ अर्थशास्त्रियों का कॉलम पढ़ सकते हैं। विशेष रूप से आर्थिक सर्वेक्षण और भारतीय रिजर्व बैंक की गतिविधियों से संबंधित जानकारी का अध्ययन कर सकते हैं।
अपडेट नोट्स प्राप्त करने के लिए ध्यान देने योग्य वेबसाइटों की सूची: यूपीएससी विषयों से संबंधित कई वेबसाइट्स हैं और कई ऐसी वेबसाइट्स भी हैं जो विशेष रूप से सिविल सेवा उम्मीदवारों को समर्पित हैं हालांकि, कई स्रोतों से एक विषय के बारे में पढ़ना भ्रम का एक प्रमुख कारण बन सकता है। इसलिए हम केवल उन्हीं वेबसाइट्स की सूची प्रदान कर रहे हैं जहां आप महीने में एक या दो बार विजिट कर करेंट अफेयर्स (समसामयिक विषयों) की जरूरतमंद जानकारी हासिल कर सकते हैं। Best websites for IAS
6. आप यहां से सभी नवीनतम पारित, लंबित और खारिज संसदीय विधेयकों पर नोट्स तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा प्रत्येक संसदीय सत्र के बाद सरकार के कार्यों पर त्रैमासिक समीक्षा रिपोर्ट भी यहां से प्राप्त की जा सकती है।
7. mea.gov.in: यहां आप प्रधानमंत्री द्वारा की गयी नवीनतम विदेश यात्राओं का वर्णन देख सकते हैं और साथ में भारत सरकार द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों का वर्णन भी इस वेबसाइट पर होता है।
8. yojana.gov.in: यहां से आप योजना और कुरूक्षेत्र पत्रिका के सभी नवीनतम संस्करणों और आर्काइव्स को पढ़ सकते हैं।
9. envfor.nic.in: यह वेबसाइट देश के पर्यावरण अनुभाग में वर्तमान अपडेट्स का अध्ययन करने के लिए अत्यंत उपयोगी वेबसाइट्स है। इस साइट पर सालाना रिपोर्ट्स जारी होती हैं जो विशेष रूप से आईएएस की प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी के लिए पढ़ने योग्य होती हैं ।
10. vikaspedia.in: यह वेबसाइट्स आपको भारत में शुरू की गयी सभी सामाजिक और आर्थिक कल्याणकारी योजनाओं पर नोट्स बनाने में मदद करती है। यह भारत सरकार के सभी प्रमुख कल्याण कार्यक्रमों के उद्देश्यों का अध्ययन करने का एक शानदार विकल्प है।
सर्वश्रेष्ठ वेबसाइट्स की सूची जो उत्तम अध्ययन सामाग्री मुहैया कराते हैं: एक उम्मीदवार को सलाह दी जाती है कि वह जब भी सरकार की किसी नीति या योजना से संबंधित जानकारी का अध्ययन करे तो वह केवल स्टैंडर्ड स्त्रोतों का ही प्रयोग करे। इसलिए हम सरकार के बारे में अध्ययन सामाग्री के रूप में जानकारी देने वाले पोर्टलों की एक विशेष सूची प्रदान कर रहे हैं।
11. indiabudget.nic.in: इस वेबसाइट में आप विस्तार से वार्षिक वित्तीय स्टेटमेंट और आर्थिक सर्वेक्षण का अध्ययन कर सकते हैं। वार्षिक बजट की मुख्य विशेषताओं के साथ यहां वित्त मंत्री का भाषण भी उपलब्ध रहता है।
12. arc.gov.in: यहां आप विस्तार में दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशों की सभी 15 रिपोर्टों को देख सकते हैं।
13. upsc.gov.in: पिछले वर्ष की आईएएस परीक्षा के सभी प्रश्न पत्रों का यहां वर्णन हैं तथा आईएएस परीक्षा से संबंधित अधिसूचनाओं के लिए भी इस साइट पर विजिट कर सकते हैं।
14. ncert.nic.in: इस वेबसाइट से कक्षा 6 से लेकर 12वीं के तक के एनसीआरटी की पीडीएफ के नोट्स बना सकते हैं या पढ़ सकते हैं।
15. nios.ac.in: पर्यावरण, इतिहास, राजनीति आदि से संबंधित प्रासंगिक अध्ययन सामग्री यहां से डाउनलोड कर सकते हैं या यहां पढ़ सकते हैं। यह वेबसाइट आपकी वैकल्पिक अध्ययन सामग्री के मूल्य संवर्धन रूप में बहुत उपयोगी साबित सकती है।
16. egyankosh.ac.in: अपनी आवश्यकता के अनुसार इग्नू से संबधित सभी पाठ्यक्रम सामग्री इस वेबसाइट्स से पढ़ या डाउनलोड कर सकते हैं।
17. इस वेबसाईट पर समसामयिक मुद्दों एवं करेंट अफेयर्स से सम्बंधित विस्तृत अध्ययन सामग्री सहित डेली अपडेट्स उपलब्ध हैं। यहां आइएएस प्रारम्भिक परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न पत्रों का संकलन मौजूद है। इसके साथ ही आइएएस परीक्षा की तैयारी से जुड़े टिप्स तथा अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों की भी सटीक जानकारी प्रदान की गयी है।
निष्कर्ष:
इंटरनेट सूचनाओं के एक सागर की तरह है और यह भारतीय प्रशासनिक सेवा के उम्मीदवारों को इस बारे में भ्रमित भी कर सकता है कि उन्हें क्या पढ़ना चाहिए। आईएएस तैयारी के लिए सही वेबसाइट का चुनाव करना अपने आप में एक मुश्किल काम हो जाता है। एक उम्मीदवार को बेहतर अध्ययन और अधिक सामग्री प्राप्त करने के लिए ऊपर सूचीबद्ध सभी वेबसाइटों को बुकमार्क कर लेना चाहिए।
हालांकि ई-प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना बहुत ही आसान हैं लेकिन यहां आईएएस उम्मीदवारों को समय भी ज्यादा खर्च करना पड़ता है। इसलिए आईएएस की तैयारी करने से पहले कुछ अच्छी वेबसाइटों, पत्रिकाओं और चैनलों का चुनाव कर एक सूची तैयार करना महत्वपूर्ण हो जाता है। सबसे महत्वपूर्ण औऱ ध्यान देने योग्य बात यह है कि आईएएस परीक्षा की बेहतर तैयारी करने के लिए ऑफ़लाइन और ऑनलाइन, दोनों अध्ययनों की आवश्यकता होती है। बेहतर तरीके से सीखने के लिए वेबसाइटों का चुनाव करें लेकिन द हिंदू या इंडियन एक्सप्रेस को पढ़ने के लिए कोई समझौता ना करें। कई वेबसाइटें आपको अखबारों का विकल्प और सारांश प्रदान करने का दावा करेंगी लेकिन ध्यान रखें कि अखबारों को पढ़ने का कोई विकल्प नहीं होता है।

ये लेख नहीँ, धर्म संहिता है!

ये लेख नहीँ, धर्म संहिता है!

*सुनहु मातु मोहि अतिसय भूखा। लागि देखि सुंदर फल रूखा॥
सुनु सुत करहिं बिपिन रखवारी। परम सुभट रजनीचर भारी॥
* तिन्ह कर भय माता मोहि नाहीं। जौं तुम्ह सुख मानहु मन माहीं॥

भावार्थ:-हे माता! सुनो, सुंदर फल वाले वृक्षों को देखकर मुझे बड़ी ही भूख लग आई है। (सीताजी ने कहा-) हे बेटा! सुनो, बड़े भारी योद्धा राक्षस इस वन की रखवाली करते हैं॥ हनुमान्‌जी ने कहा-हे माता! यदि आप मन में सुख मानें (प्रसन्न होकर) आज्ञा दें तो मुझे उनका भय तो बिलकुल नहीं है।

-जब माँ से आंजनेय ने कहा कि इस बाग में फल लगे हैं,अतः अपने इस भूखे पुत्र को खाने की आज्ञा दीजिये तो माँ ने माँ के स्वभाव का ही परिचय देते हुए कहा- “सुनु सुत करहिं बिपिन रखवारी।परम सुभट रजनीचर भारी।”

हनुमानजी खुश हो गये कि चलो माँ ने मुझे छोटा पुत्र ही माना है।क्योंकि अभी अभी अजर अमर होने का बरदान दिया है फिर भी चिन्ता बनी हुयी है,इतनी चिन्ता तो माँ छोटे बेटे की ही करती है।हनुमानजी ने कहा--
“तिन्ह कर भय माता मोहिं नाहीं।जो तुम सुख मानहु मन माहीं।”

माँ ने सोचा इसे राक्षसों का भय नहीं है,पर उसकी सोच यह है कि यह बाटिका तो मोह रूपी रावण की बाटिका है।ज्ञान की बाटिका का फल तो ब्यक्ति को धन्य बनाता है,उसमें मोक्ष के फल लगते है।किन्तु क्या इस मोह की बाटिका का फल खाना उचित रहेगा?

हनुमानजी तो ऐसे भूखे हैं,जिन्होंने जन्म लेते ही सूर्य को फल समझकर मुख में रख लिया।हनुमानजी की इस लीला का संकेत यह है कि संसार की बाटिका में धर्म,अर्थ,काम,मोक्ष का फल लगा हुआ है,और वह उन्हें तो चाहिए नहीं,वह दूर वाले उस फल के इच्छुक हैं,जो कि आकाश में प्रकाश के रूप में दिखाई दे रहा है,और उस फल तक छलाँग लगाने की सामर्थ्य भी उनमें है।यह हनुमानजी का एक रूप है।

संसार में अनेक ब्यक्ति तो मोह की बाटिका का ही फल खा रहे हैं।किन्तु हनुमानजी का अभिप्राय था कि अगर भक्ति देवी की कृपा हो जाय,तो मोह की बाटिका का भी फल खाया जा सकता है।ज्ञान में तो मोह का तिरस्कार है,पर भक्ति में मोह की बड़ी महिमा है।इसे युँ कहें कि भक्त भी भगवान को देखकर मोहित ही तो होता है।

जनकपुर  वासी स्त्रियाँ यही तो कहती हैं-- “कहहु सखी अस को तनुधारी।जेहिं न मोह यह रूप निहारी।”
हनुमानजी का तात्पर्य भी यही है कि भूख मिटाने का काम तो भक्ति का ही है,क्योंकि ज्ञानी-बिरागी तो कहेंगे कि संसार की वस्तुएँ नश्वर हैं।इनका फल ग्रहण करने का अर्थ है अपना विनाश।पर भक्ति में करुणा है।अतः हनुमानजी कहते हैं कि आप आदेश दें तो मै फल खा लूँ।शब्द कितना अच्छा चुना - “लागि देख सुन्दर फल रूखा।”

“फल बड़े सुन्दर हैं।”मोह की बाटिका के फल बड़े सुन्दर होते हैं।इन्हें देखकर लोगों का मन ललच जाता है।पर सुन्दरता फल का बहिरंग गुण है,सुन्दर फल भी अगर कड़ुवा हो तो आदमी थूके बिना मानेगा नहीं।अतः माँ ने कहा कि पुत्र!खाने से पूर्व “सुन्दर”को “मधुर” बना लो,तब तुम इसे ग्रहण करो।

और इसका उपाय भी बता दिया--
“रघुपति चरन हृदय धरि,तात मधुर फल खाहु।”
यानी मोह की बाटिका का फल जब तुम भगवान को अर्पित कर दोगे,तब यह मोह की बाटिका का फल न रहकर प्रभु का प्रसाद हो जायगा।और प्रसाद होते ही मधुर हो जायगा।हनुमानजी ने कहा-माँ कितनी वात्सल्यमयी हैं।

हनुमानजी ने फल खाने के साथ साथ बाग को उजाड़ दिया,राक्षसों को मारा तथा लंका को जला दिया।लौटने पर बंदरों ने पूछा कि आपने माँ से आज्ञा तो केवल फल खाने की ली थी,बाग उजाड़ने,राक्षसों को मारने तथा लंका को जलाने की आज्ञा तो ली नहीं थी,फिर आपने ए तीनों काम किसकी आज्ञा से किए?

हनुमानजी ने कहा कि मैंने आज्ञा तो केवल फल खाने की ही ली थी,पर शेष तीनों काम तो फल खाने के फल थे।इसका अभिप्राय यह है कि भक्ति देवी की कृपा का फल खाने के बाद भी अगर मोह की बाटिका न उजड़े,दुर्गुणों के राक्षसों का विनाश न हो और प्रबृत्ति की लंका न जले तो माँ की कृपा किस काम की?

वस्तुतः भक्ति की कृपा के फल का रसास्वादन करने के बाद ब्यक्ति के जीवन का मोह विनष्ट हो जाता है,दुर्गुण नष्ट हो जाते हैं तथा प्रबृत्ति की मोहमयी लंका भी जलकर नष्ट
हो जाती है।

“अकाल पड़ा,इसका अर्थ यही है कि भूख तो भक्ति के बिना नहीं मिटेगी।श्रीसीताजी आयीं।भौतिक जगत में इसका फल यह हुआ कि वर्षा हुयी और आध्यात्मिक अर्थ यह है कि साक्षात पराभक्ति का आगमन।भक्ति की उपलब्धि ब्यक्ति के प्रयत्न से नहीं होती।वे किसी साधना,तपस्या के फल से नहीं,अपितु अपनी सहज कृपा से आयीं। और जनकजी ने उन्हें पाया तो उनकी निष्कामता और बैराग्य का दूसरा पक्ष उनके सामने आया। 

सांसारिक ब्यक्ति शरीर से जन्म लेने वाले को पुत्र या पुत्री स्वीकार करता है,यह स्वाभाविक प्रबृत्ति है।पर यहाँ,सुनयनाजी के गर्भ से सीताजी का जन्म नहीं हुआ, और जन्म के मूल में पिता के रूप में जनकजी भी नहीं हैं,किन्तु जब उन्होंने इस दिब्य कन्या को देखा, तो उनके हृदय में वात्सल्य उमड़ पड़ा,और उन्होंने उन्हें पुत्री के रूप में स्वीकार कर,सुनयनाजी की गोद में दे दिया।ब्यावहारिक जगत में शरीर का नाताहै पर भक्ति का नाता शरीर का नहीं है।

महाराज दशरथ की शरीर के प्रति महत्व बुद्धि है,इसलिए भगवान से कहते हैं कि आप मेरे पुत्र बनिए,किन्तु जनकजी ने शरीर से संबंधित न होने के बाद भी सीताजी को पुत्री स्वीकार कर लिया तो इसका अर्थ यह है कि वे शरीर की भावना से ऊपर उठे हुये”बिदेह” हैं।भक्ति का मूलाधार ही भाव है।

अब देखिए!शरीर के नाते से पाने के लिए मनुजी को कितने लम्बे काल तक साधना करनी पड़ी,और एक जन्म लगाने के बाद,तब कहीं दूसरे जन्म में जाकर श्रीराम को पुत्र कहने का अवसर मिला।अतः शरीर वाले नाते की प्रक्रिया बड़ी लम्बी है।इसमें समय की,श्रम की, वस्तुओं की आवश्यकता हो सकती है।पर अगर कोई भाव से नाता मानना चाहे तो एक क्षण में मान ले।इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि भावना यानी भक्ति का मार्ग सरल है।

ईश्वर कहता है कि तुम सकाम हो तो मुझे पुत्र बना लो,और यदि निष्काम हो तो मुझे पुत्री बना लो।मैं तो दोनों के लिए ही प्रस्तुत हूँ।पिता पुत्र का नाता सकामता का नाता है तथा पिता पुत्री का नाता निष्कामता का नाता है।रामायण में दोनों नातों का संकेत आपको मिलेगा।

रामचरितमानस में कौशल्याजी,कैकेयीजी,सुमित्राजी के जीवन में शरीर के माध्यम से प्रभु चार रूपों में आए।पर बन में भगवान राम ने शबरी को माँ कहा और उन्होंने भी प्रभु को पुत्र रूप में स्वीकार किया।यह तो विशुद्ध भाव का नाता है।

भगवान को श्रीदशरथजी ने पुत्र रूप में पाया,यह शरीर का नाता था,पर गीधराज ने पुत्र माना और भगवान ने उन्हें पिता स्वीकार किया,तो कितना सरल मार्ग हो गया।मानो एक गीध भी भगवान को पुत्र बना सकता है।एक दीन हीन भीलनी भी भगवान को पुत्र मानकर अपने को धन्य कर सकती है। अतः सीताजी का मिथिला में प्राकट्य भावराज्य का प्राकट्य है।भाव से एक  नाता महाराज जनक ने पाया।

भाव के नाते से एक पात्र यदि श्रीसीताजी हैं तो दूसरी द्रोपदी(महाभारत)हैं।सद्गुरुदेव श्री रामकिंकरजी ने एक लेख पढ़ा,जिसमें किसी महिला ने लिखा था कि आज की नारी को सीता नहीं अपितु द्रोपदी जैसी तेजस्विनी होने की आवश्यकता है ।

उन्होंने लिखा था कि नारी को सहनशील नहीं होना चाहिए।सीताजी को उन्होंने “भीरु”कहा था।उसमें अन्य और ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया था,जिसे दुहराना उचित नहीं हैँ।उनका अभिप्राय यह था कि दबी-दबी सी रहने वाली सीता का आदर्श नारी समाज के लिए ठीक नहीं है। द्रोपदी की जो तेजस्विता है,वही आज की नारी का आदर्श होना चाहिए।

इसमें कोई संदेह नहीं कि द्रोपदी की भी अपनी महानता है,पर श्रीसीताजी से उसकी तुलना किसी तरह से नहीं की जा सकती।श्री सीताजी साक्षात् महाशक्ति हैं,जगज्जननी हैं। 

यद्यपि द्रोपदी भी तेजोमयी हैं,भगवान कृष्ण उनसे अनुराग करते हैं,पर अंतर तो है ही।इसे सूत्र के रूप में यूँ कहा जा सकता है कि अगर द्रोपदी नर की पत्नी हैं,तो श्रीसीताजी नारायण की प्रिया हैं।और नर तथा नारायण में बहुत बड़ा अंतर है।उनके जन्म में भी बहुत महत्वपूर्ण अंतर है।

श्रीसीताजी ने पृथ्वी से जन्म लिया,और पृथ्वी का स्वभाव तो हमें पता ही है कि उनमें कितनी उदारता है,कितनी सहिष्णुता है तथा कितनी करुणा है।इसलिए श्रीसीताजी के जीवन में भी सहिष्णुता है।

इसे जो लोग “दब्बूपन” मानते हैं,तो उनके बिचार दर्शन के लिए भला क्या किया जा सकता है?गोस्वामीजी ने श्रीसीताजी के विषय में यही लिखा है--
“धरनि सुता धीरज धरेउ समय सुधरम बिचारि।”
अर्थात वे धरित्री की पुत्री हैं,इसलिए उन्होंने अत्यंत कठिन से कठिन परिस्थिति में भी धैर्य धारण किया।पर ऐसा नहीं है कि वे तेजस्विनी नहीं हैं।तेजस्विता की पराकाष्ठा भी उनमें है।

आप देखिये कि,जो लंका में अकेले बन्दिनी हों,राक्षस राक्षसिनियों से घिरी हुयी हों,जगत बिजेता रावण जिनके समक्ष समस्त संसार के वैभवों को लेकर उपस्थित होकर जिन्हें प्रलोभन दे रहा हो,बिबाह करने के लिए आग्रह कर रहा हो,पर उसका जो उत्तर उन्होंने दिया,उसे सुनकर कौन कह सकता है कि, श्रीसीताजी तेजस्विनी नहीं हैं।रावण को फटकारते हुए उन्होंने कहा--
“सुनु दसमुख खद्योत प्रकासा।कबहुँ कि नलिनी करइ बिकासा।
सठ सूने हरि आनेसि मोहीं।अधम निलज्ज लाज नहिं तोही।”
रावण को ‘सठ’कहने में उन्हें जरा भी भय नहीं है।वे कहती हैं कि तू निर्लज्ज है।ऐसी तेजस्विता सरल है क्या?।

तेजस्विता होने का अर्थ यह नहीं कि वे हमेशा तेजस्विता
प्रगट कर लोगों को जलाती रहें। द्रोपदी ने कभी कड़वी बात कह दी,तो तेजस्विता का मापदंड हमेशा कड़वे बोल बोलना ही नहीं लिया जा सकता।अब इसे दूसरे सूत्र के संदर्भ में देखें- द्रोपदी का जन्म भी यज्ञ से हुआ और श्रीसीताजी का जन्म भी यज्ञ से हुआ।

श्रीसीताजी के प्राकट्य के मूल में पृथ्वी हैं और द्रोपदी का प्रादुर्भाव यज्ञकुंड की अग्नि से अपने भाई धृष्टद्युम्न के साथ हुआ।पर यहाँ दृष्टि दूसरी है।एक ओर यदि जनकजी जैसे महा बैराग्यवान,ज्ञानी तथा निष्काम हैं,तो दूसरी ओर सकाम और संसारी द्रुपद हैं।और द्रुपद की कथा भी बड़ी बिचित्र है।

द्रुपद व द्रोणाचार्य दोनों गुरुकुल में साथ साथ पढ़ते थे।उनकी मित्रता इतनी प्रगाढ़ थी कि द्रुपद ने कहा मित्र मैं राजा बनूँगा तो आधा राज्य तुम्हें दे दूँगा।

समय बीतने पर द्रुपद राजा हो गये और द्रोणाचार्य गरीब बने रहे।बेटे अश्वत्थामा को आटे को घोलकर दूध बनाकर पिलाने की नौबत से दुखी द्रोणाचार्य अपने दोस्त द्रुपद के यहाँ गये।जब उन्हें अपनी गरीबी का हाल सुनाने के बाद,उनका गुरुकुल का बचन याद दिलाया,तो द्रुपद बोले कि बचपन की नासमझी की बातों को याद रखना मूर्खता है।कहो तो तुम्हें कुछ धन,मुद्रा,धेनु आदि दिलवा दूँ,पुरानी बातों को भूल जाओ।द्रोणाचार्य अपमान से तिलमिला उठे,और
कहा,मुझे तुम्हारी कोई वस्तु नहीं चाहिए।

आगे चलकर द्रोणाचार्य कौरवों और पांडवों के शिक्षक बने।शिष्यों ने शिक्षा पूरी करने के बाद गुरुदक्षिणा देनी चाही।द्रोणाचार्य ने कहा,तुम लोगों में से जो द्रुपद को बंदी बनाकर ले आयेगा,मैं समझूँगा कि वही मेरा योग्य शिष्य है।अर्जुन ने द्रुपद को बंदी बनाकर गुरु के समक्ष खड़ा कर दिया।द्रोणाचार्य ने कहा,द्रुपद मैं तुम्हें मार भी सकता हूँ,किन्तु ऐसा नहीं करूँगा,केवल तुम्हारा बचन पूरा कराऊँगा,और उन्होंने द्रुपद का आधा राज्य छीन लिया।

द्रुपद ने इस अपमान का बदला लेने के लिए यज्ञ किया।
अब जरा सोचिए,जनकजी और द्रुपद की भला क्या तुलना हो सकती है?जनकजी में महान संतुलन है,ज्ञान है,बैराग्य है,किन्तु द्रुपद तो हमारे सामने एक क्रोधी,प्रतिक्रियावादी तथा हिंसक स्वभाव वाले राजा के रूप में हमारे सामने आते हैं।

द्रुपद ने यज्ञ किया।यज्ञ के पीछे भावना थी कि मुझे ऐसा पुत्र मिले,जो द्रोणाचार्य का सिर काट सके।इस यज्ञ से धृष्टद्युम्न और द्रोपदी का जन्म होता है।आगे वर्णन आता है कि धृष्टद्युम्न ने द्रोणाचार्य से ही शस्त्र की शिक्षा पायी।और धृष्टद्युम्न ने महाभारत के युद्ध में जब द्रोणाचार्य शस्त्र छोड़कर नेत्र मूँदकर,ध्यान मग्न बैठे थे,तभी पिता की बात रखने के लिए द्रोणाचार्य का सिर काट लिया।इसके बाद अश्वत्थामा में भी बदला लेने की बृत्ति आई और युद्ध समाप्त होने के बाद उसने धृष्टद्युम्न का बध कर दिया।

किसी पत्रकार ने श्री किंकरजी से पूछा कि रामायण और महाभारत में क्या अन्तर है,तो उन्होंने जबाब दिया कि,”महाभारत माने”-जैसा होता है,और “रामायण माने”-जैसा होना चाहिए।महाभारत अर्थात क्रिया-प्रतिक्रिया का चक्र।

इस चक्र को अगर अनवरत रूप से बढ़ाते ही चला जाये,तो जीवन में एक महाविनाश की सृष्टि हो सकती है। यह महाभारत के विनाश से स्पष्ट है।

श्रीरामचरितमानस में श्रीसीताजी को कहा गया कि वे तो--
“अतिसय प्रिय करुणानिधान की।”

मातृ बृत्ति,करुणा से युक्त बृत्ति है,और श्रीसीताजी का जन्म किसी प्रतिक्रिया से नहीं हुआ है,किसी से बदला लेने के लिए नहीं हुआ है।उनका तो जन्म हुआ है,प्रभु के हृदय में जीव
के प्रति करुणा उत्पन्न करने के लिए।उनका पक्ष करुणा और प्रेम का पक्ष है।

लंका का युद्ध समाप्त होने के बाद,भगवान राम ने विभीषण से कहा,सीता को ले आइए।

विभीषणजी ने पालकी मँगाई,सीताजी स्नान व वस्त्र परिवर्तन के बाद पालकी में बैठ गयीं।जब वे वानर सेना के पास पहुँचीं,तो बानर ब्यग्र हो गये,उनके दर्शन के लिए,किन्तु
पालकी के ऊपर पर्दा पड़ा हुआ था।बानर,शिष्टाचार क्या जानें?सोचे पर्दा उठाकर दर्शन कर लें।किन्तु लिखा हुआ है कि जो राक्षस पालकी ढो रहे थे तथा रक्षा करने के लिए बेंत लेकर चल रहे थे,वे बेंत दिखाकर बन्दरों को पालकी के पास जाने से रोकने लगे।

जब प्रभु ने इस दृश्य को देखा,तो कहा मित्र विभीषण!--
“सीता सखा पयादें आनहु।” सीताजी को पालकी पर नहीं, पैदल ले आओ।श्रीसीताजी उतरीं।उनका दर्शन करके बन्दर धन्य हो गये।

यद्यपि सीताजी प्रारंभ में ही अस्वीकार कर सकतीं थीं,कि प्रियतम के पास मैं पैदल ही चलूँगी,पालकी पर नहीं।पर वे पालकी पर बैठकर आ गयीं।इसका अभिप्राय भी माँ की करुणा ही है।वस्तुतः माँ ने सोचा कि मैं यदि पैदल चलूँगी तो बंदरगण जो मेरे सुपुत्र हैं,उनकी अभिलाषा तो पूर्ण हो जायेगी,पर राक्षसगण भी तो मेरे पुत्र ही हैं।

और, प्रभु ने प्रतिज्ञा की है कि- “निशिचर हीन करौं महि”
तो जो बचे हुए मेरे राक्षस पुत्र है,उनकी रक्षा का उपाय यही है कि, उनसे भी सेवा लेकर, प्रभु से मैं कह दूँ कि”पहले वे जैसे भी रहे हों,पर आज तो वे मेरा भार ढोने वाले हैं,आज मेरे रक्षक हैं,अतः इन पर कृपा कीजिए।बस! यही माँ की करुणा है।और यही श्रीसीताजी का स्वरूप है।

कलयुग क्या है ?

कलयुग क्या है ? 

कलयुग का सीधा सा अर्थ है कलह। जहाँ भी कलह है वहां पर कलयुग है। जब भगवान श्री कृष्ण जी अपनी लीला करके अपने लोक में चले गए थे उसी समय से द्वापर युग खत्म हो गया था और कलयुग का आगमन हो गया है।

कलयुग कितने साल का है। हमारे शास्त्रों में बताया गया है की कलयुग 4,32,000 वर्ष तक रहेगा। जिसकी गणना इस प्रकार की गई है।

पुराण के मुताबिक मानव का एक वर्ष देवताओं के एक अहोरात्र यानी दिन-रात के बराबर है। जिसमें उत्तरायण दिन व दक्षिणायन रात मानी जाती है। दरअसल, एक सूर्य संक्रान्ति से दूसरी सूर्य संक्रान्ति की अवधि सौर मास कहलाती है। मानव गणना के ऐसे 12 सौर मासों का 1 सौर वर्ष ही देवताओं का एक अहोरात्र होता है। ऐसे ही 30 अहोरात्र, देवताओं के एक माह और 12 मास एक दिव्य वर्ष कहलाता है।

देवताओं के इन दिव्य वर्षो के आधार पर चार युगों की मानव सौर वर्षों में अवधि इस तरह है,

सतयुग 4800 (दिव्य वर्ष) 17,28,000 (सौर वर्ष)
त्रेतायुग 3600 (दिव्य वर्ष) 12,96,100 (सौर वर्ष)
द्वापरयुग 2400 (दिव्य वर्ष) 8,64,000 (सौर वर्ष)
कलियुग 1200 (दिव्य वर्ष) 4,32,000 (सौर वर्ष)

उस समय घोर कलयुग आएगा जिस समय माँ गंगा और गोवर्धन पर्वत लुप्त हो जायेंगे। क्योंकि इन दोनों को श्राप है। पढ़िए इस कलयुग में क्या-क्या घटित होगा।

 कलयुग के अवगुण और लक्षण,,,,

श्री तुलसीदासकृत रामचरतिमानस में इसका वर्णन आया है। काकभुशुण्डि जी गरुड़ जी को बता रहे हैं कलयुग के लक्षण और प्रभाव-

नर-नारी पापपरायण (पापों में लिप्त) रहेंगें॥ कलियुग के पापों ने सब धर्मों को ग्रस लिया, सद्ग्रंथ लुप्त हो गए, दम्भियों ने अपनी बुद्धि से कल्पना कर-करके बहुत से पंथ प्रकट कर दिए॥ सभी लोग मोह के वश हो गए, शुभ कर्मों को लोभ ने हड़प लिया।

कलियुग में न वर्णधर्म रहता है, न चारों आश्रम रहते हैं। सब पुरुष-स्त्री वेद के विरोध में लगे रहते हैं। ब्राह्मण वेदों के बेचने वाले और राजा प्रजा को खा डालने वाले होते हैं। वेद की आज्ञा कोई नहीं मानता॥ जिसको जो अच्छा लग जाए, वही मार्ग है। जो डींग मारता है, वही पंडित है। जो मिथ्या आरंभ करता (आडंबर रचता) है और जो दंभ में रत है, उसी को सब कोई संत कहते हैं॥

जो (जिस किसी प्रकार से) दूसरे का धन हरण कर ले, वही बुद्धिमान है। जो दंभ करता है, वही बड़ा आचारी है। जो झूठ बोलता है और हँसी-दिल्लगी करना जानता है, कलियुग में वही गुणवान कहा जाता है॥

जो आचारहीन है और वेदमार्ग को छोड़े हुए है, कलियुग में वही ज्ञानी और वही वैराग्यवान् है। जिसके बड़े-बड़े नख और लंबी-लंबी जटाएँ हैं, वही कलियुग में प्रसिद्ध तपस्वी है॥

जो अमंगल वेष और अमंगल भूषण धारण करते हैं और भक्ष्य-भक्ष्य (खाने योग्य और न खाने योग्य) सब कुछ खा लेते हैं वे ही योगी हैं, वे ही सिद्ध हैं और वे ही मनुष्य कलियुग में पूज्य हैं॥

जिनके आचरण दूसरों का अपकार (अहित) करने वाले हैं, उन्हीं का बड़ा गौरव होता है और वे ही सम्मान के योग्य होते हैं। जो मन, वचन और कर्म से लबार (झूठ बकने वाले) हैं, वे ही कलियुग में वक्ता माने जाते हैं॥

सभी मनुष्य स्त्रियों के विशेष वश में हैं और बाजीगर के बंदर की तरह (उनके नचाए) नाचते हैं। ब्राह्मणों को शूद्र ज्ञानोपदेश करते हैं और गले में जनेऊ डालकर कुत्सित दान लेते हैं॥

सभी पुरुष काम और लोभ में तत्पर और क्रोधी होते हैं। देवता, ब्राह्मण, वेद और संतों के विरोधी होते हैं। अभागिनी स्त्रियाँ गुणों के धाम सुंदर पति को छोड़कर पर पुरुष का सेवन करती हैं॥

सुहागिनी स्त्रियाँ तो आभूषणों से रहित होती हैं, पर विधवाओं के नित्य नए श्रृंगार होते हैं।

शिष्य और गुरु में बहरे और अंधे का सा हिसाब होता है। एक (शिष्य) गुरु के उपदेश को सुनता नहीं, एक (गुरु) देखता नहीं (उसे ज्ञानदृष्टि) प्राप्त नहीं है)॥

जो गुरु शिष्य का धन हरण करता है, पर शोक नहीं हरण करता, वह घोर नरक में पड़ता है। माता-पिता बालकों को बुलाकर वही धर्म सिखलाते हैं, जिससे पेट भरे॥

स्त्री-पुरुष ब्रह्मज्ञान के सिवा दूसरी बात नहीं करते, पर वे लोभवश कौड़ियों (बहुत थोड़े लाभ) के लिए ब्राह्मण और गुरु की हत्या कर डालते हैं॥

शूद्र ब्राह्मणों से विवाद करते हैं (और कहते हैं) कि हम क्या तुमसे कुछ कम हैं? जो ब्रह्म को जानता है वही श्रेष्ठ ब्राह्मण है। (ऐसा कहकर) वे उन्हें डाँटकर आँखें दिखलाते हैं॥

संत जन बताते हैं की यहाँ शुद्र का मतलब किसी जाति से नहीं बल्कि नीच आचरण करने वाले से है। और ब्राह्मण का अर्थ जो मन कर्म वचन से किसी का बुरा नही करता और जीव मात्र में परमात्मा का दर्शन करके उसकी(परमात्मा) भक्ति करता है।

जो पराई स्त्री में आसक्त, कपट करने में चतुर और मोह, द्रोह और ममता में लिपटे हुए हैं, वे ही मनुष्य अभेदवादी (ब्रह्म और जीव को एक बताने वाले) ज्ञानी हैं। मैंने उस कलियुग का यह चरित्र देखा॥

वे स्वयं तो नष्ट हुए ही रहते हैं, जो कहीं सन्मार्ग का प्रतिपालन करते हैं, उनको भी वे नष्ट कर देते हैं। जो तर्क करके वेद की निंदा करते हैं, वे लोग कल्प-कल्पभर एक-एक नरक में पड़े रहते हैं॥

तेली, कुम्हार, चाण्डाल, भील, कोल और कलवार आदि जो वर्ण में नीचे हैं, स्त्री के मरने पर अथवा घर की संपत्ति नष्ट हो जाने पर सिर मुँड़ाकर संन्यासी हो जाते हैं॥

वे अपने को ब्राह्मणों से पुजवाते हैं और अपने ही हाथों दोनों लोक नष्ट करते हैं। ब्राह्मण अपढ़, लोभी, कामी, आचारहीन, मूर्ख और नीची जाति की व्यभिचारिणी स्त्रियों के स्वामी होते हैं॥

शूद्र नाना प्रकार के जप, तप और व्रत करते हैं तथा ऊँचे आसन (व्यास गद्दी) पर बैठकर पुराण कहते हैं। सब मनुष्य मनमाना आचरण करते हैं। अपार अनीति का वर्णन नहीं किया जा सकता॥

कलियुग में सब लोग वर्णसंकर और मर्यादा से च्युत हो गए। वे पाप करते हैं और (उनके फलस्वरूप) दुःख, भय, रोग, शोक और (प्रिय वस्तु का) वियोग पाते हैं॥

वेद सम्मत तथा वैराग्य और ज्ञान से युक्त जो हरिभक्ति का मार्ग है, मोहवश मनुष्य उस पर नहीं चलते और अनेकों नए-नए पंथों की कल्पना करते हैं॥

संन्यासी बहुत धन लगाकर घर सजाते हैं। उनमें वैराग्य नहीं रहा, उसे विषयों ने हर लिया। तपस्वी धनवान हो गए और गृहस्थ दरिद्र। हे तात! कलियुग की लीला कुछ कही नहीं जाती॥

कुलवती और सती स्त्री को पुरुष घर से निकाल देते हैं और अच्छी चाल को छोड़कर घर में दासी को ला रखते हैं। पुत्र अपने माता-पिता को तभी तक मानते हैं, जब तक स्त्री का मुँह नहीं दिखाई पड़ता॥

जब से ससुराल प्यारी लगने लगी, तब से कुटुम्बी शत्रु रूप हो गए। राजा लोग पाप परायण हो गए, उनमें धर्म नहीं रहा। वे प्रजा को नित्य ही (बिना अपराध) दंड देकर उसकी विडंबना (दुर्दशा) किया करते हैं॥

धनी लोग मलिन (नीच जाति के) होने पर भी कुलीन माने जाते हैं। द्विज का चिह्न जनेऊ मात्र रह गया और नंगे बदन रहना तपस्वी का। जो वेदों और पुराणों को नहीं मानते, कलियुग में वे ही हरिभक्त और सच्चे संत कहलाते हैं॥

कवियों के तो झुंड हो गए, पर दुनिया में उदार (कवियों का आश्रयदाता) सुनाई नहीं पड़ता। गुण में दोष लगाने वाले बहुत हैं, पर गुणी कोई भी नहीं। कलियुग में बार-बार अकाल पड़ते हैं। अन्न के बिना सब लोग दुःखी होकर मरते हैं॥

कलियुग में कपट, हठ (दुराग्रह), दम्भ, द्वेष, पाखंड, मान, मोह और काम आदि (अर्थात् काम, क्रोध और लोभ) और मद ब्रह्माण्डभर में व्याप्त हो गए (छा गए)॥

मनुष्य जप, तप, यज्ञ, व्रत और दान आदि धर्म तामसी भाव से करने लगे। देवता (इंद्र) पृथ्वी पर जल नहीं बरसाते और बोया हुआ अन्न उगता नहीं॥

स्त्रियों के बाल ही भूषण हैं (उनके शरीर पर कोई आभूषण नहीं रह गया) और उनको भूख बहुत लगती है (अर्थात् वे सदा अतृप्त ही रहती हैं)। वे धनहीन और बहुत प्रकार की ममता होने के कारण दुःखी रहती हैं। वे मूर्ख सुख चाहती हैं, पर धर्म में उनका प्रेम नहीं है। बुद्धि थोड़ी है और कठोर है, उनमें कोमलता नहीं है॥

मनुष्य रोगों से पीड़ित हैं, भोग (सुख) कहीं नहीं है। बिना ही कारण अभिमान और विरोध करते हैं। दस-पाँच वर्ष का थोड़ा सा जीवन है, परंतु घमंड ऐसा है मानो कल्पांत (प्रलय) होने पर भी उनका नाश नहीं होगा॥

कलिकाल ने मनुष्य को बेहाल (अस्त-व्यस्त) कर डाला। कोई बहिन-बेटी का भी विचार नहीं करता। (लोगों में) न संतोष है, न विवेक है और न शीतलता है। जाति, कुजाति सभी लोग भीख माँगने वाले हो गए॥

ईर्षा (डाह), कडुवे वचन और लालच भरपूर हो रहे हैं, समता चली गई। सब लोग वियोग और विशेष शोक से मरे पड़े हैं। वर्णाश्रम धर्म के आचरण नष्ट हो गए॥

इंद्रियों का दमन, दान, दया और समझदारी किसी में नहीं रही। मूर्खता और दूसरों को ठगना, यह बहुत अधिक बढ़ गया। स्त्री-पुरुष सभी शरीर के ही पालन-पोषण में लगे रहते हैं। जो पराई निंदा करने वाले हैं, जगत् में वे ही फैले हैं॥  

कलिकाल पाप और अवगुणों का घर है, किंतु कलियुग में एक गुण भी बड़ा है कि उसमें बिना ही परिश्रम भवबंधन से छुटकारा मिल जाता है॥ सुनु ब्यालारि काल कलि मल अवगुन आगार। गुनउ बहुत कलिजुग कर बिनु प्रयास निस्तार॥

कलियुग केवल नाम अधारा , सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा : कलयुग में केवल भगवान का नाम ही भवसागर से पार उतरने का साधन है केवल भगवान का नाम सुमिरन से इस भवसागर से पार पाया जा सकता है।

कृतजुग त्रेताँ द्वापर पूजा मख अरु जोग। जो गति होइ सो कलि हरि नाम ते पावहिं लोग॥ सत्ययुग, त्रेता और द्वापर में जो गति पूजा, यज्ञ और योग से प्राप्त होती है, वही गति कलियुग में लोग केवल भगवान्‌ के नाम से पा जाते हैं॥

सत्ययुग में सब योगी और विज्ञानी होते हैं। हरि का ध्यान करके सब प्राणी भवसागर से तर जाते हैं। त्रेता में मनुष्य अनेक प्रकार के यज्ञ करते हैं और सब कर्मों को प्रभु को समर्पण करके भवसागर से पार हो जाते हैं॥ द्वापर में श्री रघुनाथजी के चरणों की पूजा करके मनुष्य संसार से तर जाते हैं, दूसरा कोई उपाय नहीं है और कलियुग में तो केवल श्री हरि की गुणगाथाओं का गान करने से ही मनुष्य भवसागर की थाह पा जाते हैं॥ कलिजुग केवल हरि गुन गाहा। गावत नर पावहिं भव थाहा॥

कलियुग में न तो योग और यज्ञ है और न ज्ञान ही है। श्री रामजी का गुणगान ही एकमात्र आधार है। अतएव सारे भरोसे त्यागकर जो श्री रामजी को भजता है और प्रेमसहित उनके गुणसमूहों को गाता है, वही भवसागर से तर जाता है, इसमें कुछ भी संदेह नहीं।

 कलियुग का एक पवित्र प्रताप (महिमा) है कि मानसिक पुण्य तो होते हैं, पर (मानसिक) पाप नहीं होते॥

कलिजुग सम जुग आन नहिं जौं नर कर बिस्वास। गाइ राम गुन गन बिमल भव तर बिनहिं प्रयास॥

यदि मनुष्य विश्वास करे, तो कलियुग के समान दूसरा युग नहीं है, (क्योंकि) इस युग में श्री रामजी के निर्मल गुणसमूहों को गा-गाकर मनुष्य बिना ही परिश्रम संसार (रूपी समुद्र) से तर जाता है॥

शुद्ध सत्त्वगुण, समता, विज्ञान और मन का प्रसन्न होना, इसे सत्ययुग का प्रभाव जानें॥

सत्त्वगुण अधिक हो, कुछ रजोगुण हो, कर्मों में प्रीति हो, सब प्रकार से सुख हो, यह त्रेता का धर्म है।

रजोगुण बहुत हो, सत्त्वगुण बहुत ही थोड़ा हो, कुछ तमोगुण हो, मन में हर्ष और भय हो, यह द्वापर का धर्म है॥

तमोगुण बहुत हो, रजोगुण थोड़ा हो, चारों ओर वैर-विरोध हो, यह कलियुग का प्रभाव है।

जिसका श्री रघुनाथजी के चरणों में अत्यंत प्रेम है, उसको कालधर्म (युगधर्म) नहीं व्यापते।

एहिं कलिकाल न साधन दूजा। जोग जग्य जप तप ब्रत पूजा॥ 
रामहि सुमिरिअ गाइअ रामहि। संतत सुनिअ राम गुन ग्रामहि॥

तुलसीदासजी कहते हैं- इस कलिकाल में योग, यज्ञ, जप, तप, व्रत और पूजन आदि कोई दूसरा साधन नहीं है। बस, श्री रामजी का ही स्मरण करना, श्री रामजी का ही गुण गाना और निरंतर श्री रामजी के ही गुणसमूहों को सुनना चाहिए॥

नामु राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु। कलियुग में राम का नाम कल्पतरु (मन चाहा पदार्थ देने वाला) और कल्याण का निवास (मुक्ति का घर) है।

और इसके बाद कह दिया केवल कलियुग की ही बात नहीं है, चारों युगों में, तीनों काल में और तीनों लोकों में नाम को जपकर जीव शोकरहित हुए हैं।

राम नाम कलि अभिमत दाता। हित परलोक लोक पितु माता॥ कलियुग में यह राम नाम मनोवांछित फल देने वाला है, परलोक का परम हितैषी और इस लोक का माता-पिता है (अर्थात परलोक में भगवान का परमधाम देता है और इस लोक में माता-पिता के समान सब प्रकार से पालन और रक्षण करता है।)

कलियुग में न कर्म है, न भक्ति है और न ज्ञान ही है, राम नाम ही एक आधार है। नहिं कलि करम न भगति बिबेकू। राम नाम अवलंबन एकू॥

भायँ कुभायँ अनख आलस हूँ। नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ॥

अच्छे भाव (प्रेम) से, बुरे भाव (बैर) से, क्रोध से या आलस्य से, किसी तरह से भी नाम जपने से दसों दिशाओं में कल्याण होता है।

इसलिए सब चिंता, भय छोड़कर, मन क्रम और वाणी से भगवान का नाम जपिए और सत्कर्म कीजिये।

Saturday, June 13, 2020

Science Most Important Questions and Answer

Science Most Important Questions and Answer


प्रश्‍न – कार्बन डेटिंग विधि किसकी आयु निर्धारित करने के लिए अपनाई जाती है? उत्‍तर – जीवाश्‍मों की
प्रश्‍न – अत्‍यधिक शराब का सेवन करने से शरीर का कौन सा अंग विशेष रूप से प्रभावित होता है? उत्‍तर – यकृत  (Liver)
प्रश्‍न – शरीर में रक्‍त बैंक का काम कौनसा अंग करता है? उत्‍तर – तिल्‍ली (Spleen)
प्रश्‍न – हरे पौधों में प्रकाश संश्‍लेषण की इकाई क्‍या कहलाती है? उत्‍तर – क्‍वाण्‍टोसोम (Quanta some)
प्रश्‍न – शरीर में रक्‍त की सफेद कोशिकाओं का मुख्‍य कार्य क्‍या होता है? उत्‍तर – शरीर को बीमारियों से बचाना।
प्रश्‍न – मछली के हृदय में कितने प्रकोष्‍ठ होते हैं? उत्‍तर – दो (Two-Chambered)
प्रश्‍न – मानव शरीर में रक्‍त से अवांछनीय पदार्थों को पृथक करने का कार्य कौनसा अंग करता है? उत्‍तर – वृक्‍क (Kedney)


प्रश्‍न – चालीस वर्ष पूरे हो जाने पर चर्चित ‘अप्‍सरा’ क्‍या हे? उत्‍तर – न्‍यूक्‍लीयर रियेक्‍टर
प्रश्‍न – डायनमो का क्‍या कार्य है? उत्‍तर – यांत्रिक ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा का उत्‍पादन
प्रश्‍न – पिचब्‍लेण्‍डी से कौनसा रेडियोएक्टिव तत्‍व प्राप्‍त किया गया था? उत्‍तर – रेडियम
प्रश्‍न – गिरगिट की त्‍वचा में रंग बदलने का कारण क्‍या है? उत्‍तर – उसकी त्‍वचा में मेलेनोफोर नामक असंख्‍य रंगद्रव्‍य कोशिकाओं की उपस्थिति के कारण
प्रश्‍न – प्रकृति में सबसे अधिक मात्रा में पाए जाने वाला कार्बनिक यौगिक कौनसा है? उत्‍तर – सेल्‍यूलोज
प्रश्‍न – समुद्र के किनारे उगने वाले वृक्षों में वार्षिक वलय (Annual rings) क्‍यों नहीं होते? उत्‍तर – क्‍योंकि यहाँ की जलवायु में स्‍पष्‍ट भिन्‍नता नहीं होती है।
प्रश्‍न – वृद्धावस्‍था का अध्‍ययन विज्ञान की किस शाखा के अन्‍तर्गत किया जाता है? उत्‍तर – जिरेन्‍टोलॉजी
प्रश्‍न – डोलोमाइट (CaCO3) किसका अयस्‍क है? उत्‍तर – कैल्सियम का
प्रश्‍न – खट्टे फलों में कौनसा विटामिन पाया जाता है? उत्‍तर – विटामिन C
प्रश्‍न – ध्‍वनि की तीव्रता मापने वाला यंत्र क्‍या कहलाता है? उत्‍तर – ऑडियोमीटर
प्रश्‍न – दूध का खट्टा होना किसके द्वारा होता है? उत्‍तर – जीवाणु द्वारा
प्रश्‍न – श्‍वेत प्रकाश के वर्णक्रम (Spectrum) में प्रिज्‍म द्वारा सर्वाधिक विचलित (Deviate) होने वाला कौनसा रंग है? उत्‍तर – बैंगनी
प्रश्‍न – रेफ्रीजेरेटर में प्रशीतक (Regrigerant) क्‍या होता है? उत्‍तर – फ्रीयोन
प्रश्‍न – दूध से दही बनाने में कौनसा बैक्‍टीरिया सहायक होता है? उत्‍तर – लैक्‍टोबैसिलस (Lacto-bacillus)
प्रश्‍न – किस अंग के कार्य न करने पर डाइलेसिस (Dialysis) किया जाता है? उत्‍तर – वृक्‍क(Kidney)
प्रश्‍न – मनुष्‍य के मस्तिष्‍क का सबसे बड़ा भाग क्‍या होता है? उत्‍तर – प्रमस्तिष्‍क (Cerebrum)
प्रश्‍न – राइफल चलाने पर लगने वाला झटका किसके संरक्षण का उदाहरण है? उत्‍तर – रेखीय संवेग के संरक्षण (Conservation of linear momentum) का
प्रश्‍न – प्रयोगशाला में सर्वप्रथम जीन का संश्‍लेषण करने वाला वैज्ञानिक कौन है? उत्‍तर – हरगोविन्‍द खुराना
प्रश्‍न – चन्‍द्रमा पर वायुमण्‍डल न होने का क्‍या कारण हे? उत्‍तर – वहाँ सभी गैसों का वर्ग माध्‍य मूल वेग(Root mean square velocity) उनके पलायन वेग (Escape Velocity) से अधिक है।
प्रश्‍न – किस एक कोशिकीय शैवाल (Unicellular Algae) का उपयोग अन्‍तरिक्ष में खाद्य की समुचित पूर्ति के लिए किया जाता है? उत्‍तर – क्‍लोरेला (Chlorela)
प्रश्‍न – प्राकृतिक रबर किसका बहुलक (Polymer) है? उत्‍तर – आइसोप्रीन (Isoprene) का
प्रश्‍न – द्रव्‍य की चौथी अवस्‍था क्‍या कहलाती है? उत्‍तर – प्‍लाज्‍मा (Plasma)
प्रश्‍न – प्रत्‍यावर्ती धारा की माप किस यंत्र से की जाती हे? उत्‍तर – तप्‍त तार अमीटर (hot Wire Ammeter) से
प्रश्‍न – प्रकाश तरंगों के किस गुण से उनके अनुप्रस्‍थ होने का प्रमाण मिलता है? उत्‍तर – ध्रुवण(Polarisation) से
प्रश्‍न – एक वृत्‍ताकार वलय (Circular Ring) का गुरूत्‍व केन्‍द्र कहाँ होता है? उत्‍तर – वलय वृत्‍त के केन्‍द्र पर
प्रश्‍न – मानव रक्‍त का pH मान होता है? उत्‍तर –7.4
प्रश्‍न – खनिज संरचना की दृष्टि से हीरा क्‍या होता है? उत्‍तर – कार्बन
प्रश्‍न – ग्रह गति (Planetary Motion) का सिद्धान्‍त किसने प्रतिपादित किया? उत्‍तर – कोप्‍लर ने
प्रश्‍न – हाइड्रोजन बम किस सिद्धान्‍त पर आधारित है? उत्‍तर – नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)पर
प्रश्‍न – प्रोट्रॉन की खोज किसने की थी? उत्‍तर – रदरफोर्ड ने
प्रश्‍न – कौनसा पदार्थ पृथ्‍वी पर तीनों अवस्‍थाओं में पाया जाता है? उत्‍तर – पानी
प्रश्‍न – हीरे के सम्‍बन्‍ध में कैरेट (Carat) क्‍या होता हे? उत्‍तर – हीरे के भार का मात्रक (Unit of Weight of diamond)
प्रश्‍न – गैल्‍वेनीकृत लोहे पर किसका लेप होता है? उत्‍तर – जिंक का
प्रश्‍न – भारत में 28 फरवरी को विज्ञान दिसव किस उपलक्ष्‍य में मनाया जाता है? उत्‍तर – सी.वी.रमन द्वारा रमन प्रभाव की खोज करने के दिन के उपलक्ष्‍य में
प्रश्‍न – 7 नवम्‍बर, 1888 भारत के किस महान वैज्ञानिक का जन्‍मदिन है? उत्‍तर – सी.वी.रमन का
प्रश्‍न – आयो‍डीन युक्‍त नमक का प्रयोग किस बीमारी की रोकथाम के लिए किया जाता है? उत्‍तर – गलगण्‍ड (Goitre)
प्रश्‍न – विद्युत मोटर का क्‍या कार्य है? उत्‍तर – विद्युत ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में रूपान्‍तरण करना।
प्रश्‍न – हरे पौधों में प्रकाश-संश्‍लेषण की इकाई क्‍या कहलाती है? उत्‍तर – क्‍वाण्‍टासोम(Quantasome)
प्रश्‍न – पृथ्‍वी का औसत घनत्‍व क्‍या है ? उत्‍तर –5.5 ग्राम/घन सेंटीमीटर
प्रश्‍न – सूर्य सदैव पूर्व में निकलता है, क्‍योंकि? उत्‍तर – पृथ्‍वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है।
प्रश्‍न – पौधों में वाष्‍पोत्‍सर्जन दर के निर्धारण के लिए किस यंत्र का उपयोग किया जाता है? उत्‍तर – पोटोमीटर का
प्रश्‍न – रेड लेड का रासायनिक सूत्र क्‍या है ? उत्‍तर –Pb3O4
प्रश्‍न – मानव शरीर में विटामिन K का निर्माण किस अंग में होता है? उत्‍तर – कोलन में बैक्‍टीरिया द्वारा
प्रश्‍न – ‘DARK AVENGER’ क्‍या है? उत्‍तर – एक प्रकार का प्रमुख कम्‍प्‍यूटर वायरस
प्रश्‍न – फाइकोलॉजी (Phycology) के तहत विज्ञान की किस शाखा का अध्‍ययन किया जाता है?उत्‍तर – शैवाल (Algae) का
प्रश्‍न – किस विटामिन में कोबाल्‍ट (Cobalt) पाया जाता है? उत्‍तर – विटामिन B12 में
प्रश्‍न – ‘मेनिनजाइटिस’ (तानिका शोध) नामक रोग में शरीर का कौन सा अंग प्रभावित हो जाता है? उत्‍तर – मस्तिष्‍क
प्रश्‍न – मानव शरीर में रक्‍त का थक्‍का नहीं बनने का प्रमुख कारण है? उत्‍तर – हिपेरिन की उपस्थिति
प्रश्‍न – चाय बनाने के लिए विद्युत द्वारा केतली में पानी किस विधि द्वारा गर्म होता है? उत्‍तर – कन्‍वेक्‍शन द्वारा
प्रश्‍न – वृद्धों के चिकित्‍साशास्‍त्रीय अध्‍ययन (Medical Study) को क्‍या कहा जाता है? उत्‍तर – गैरियाट्रिक्‍स (Geriatrics)
प्रश्‍न – हाइपोग्‍लाइसेमिया (Hypoglycemia) नामक रोग रक्‍त में किसकी कमी से होता है? उत्‍तर – ग्‍लूकोस
प्रश्‍न – एच.टी.एल.वी.-II नामक वायरस से कौन सा रोग फैलता है? उत्‍तर – एड्स (Aids)
प्रश्‍न – मानव शरीर में सबसे छोटी ग्रंथि है? उत्‍तर – पिट्यूटरी
प्रश्‍न – एन्‍जाइम मूलत: क्‍या है? उत्‍तर – प्रो‍टीन
प्रश्‍न – पित्‍त का निर्माण शरीर के किस भाग में होता है? उत्‍तर – यकृत (Liver) में
प्रश्‍न – कृष्‍ण छिद्र (Black hole)सिद्धान्‍त को प्रतिपादित किया था? उत्‍तर – एस. चन्‍द्रशेखर ने
प्रश्‍न – साइनोकोवालमिन क्‍या है? उत्‍तर – विटामिन B12
प्रश्‍न – टेट्रा डुथाइल लैड (TEL) पेट्रोल में क्‍यों मिलाया जाता हे? उत्‍तर – एन्‍टीनॉकिंग रेटिंग (अपस्‍फोटन की दर) को बढ़ाने के लिए
प्रश्‍न – हीरे की चमक होती है? उत्‍तर – पूर्ण आन्‍तरिक परावर्तन के कारण
प्रश्‍न – आपेक्षिक आर्द्रता (Relative humidity) नापी जाती है? उत्‍तर – हाइग्रोमीटर(Hygrometer) से
प्रश्‍न – रेटिना पर बनने वाला प्रतिबिम्‍ब होता है? उत्‍तर – वास्‍तविक, उल्‍टा तथा वस्‍तु से छोटा
प्रश्‍न – पोलिया का टीका सर्वप्रथम किसने तैयार किया था? उत्‍तर – जोन्‍स साल्‍क ने
प्रश्‍न – गोबर गैस का मुख्‍य संघटक क्‍या है? उत्‍तर – मीथेन
प्रश्‍न – हरे पौधों में प्रकाश संश्‍लेषण की इकाई क्‍या कहलाती है? उत्‍तर – क्‍वाण्‍टोसोम
प्रश्‍न – न्‍यूटन/किग्रा किस भौतिक राशि का मात्रक है? उत्‍तर – त्‍वरण (Acceleration) का
प्रश्‍न – ‘गॉयटर’ नामक रोग शरीर में किसकी कमी के कारण होता है? उत्‍तर – आयो‍डीन की कमी के कारण
प्रश्‍न – वाइरोलॉजी (Virology) में किसका अध्‍ययन किया जाता है? उत्‍तर – विषाणुओं (Virus) का
प्रश्‍न – विटामिन C का रासायनिक नाम क्‍या है? उत्‍तर – एस्‍कार्बिक एसिड (Ascorbic Acid)
प्रश्‍न – सामान्‍य व्‍यक्ति का अनुशीलक (Diastolic) रक्‍त दाब कितना होता है? उत्‍तर – 80 मिमि पारे के
प्रश्‍न – श्‍वेत प्रकाश के प्रिज्‍म द्वारा बने वर्णक्रम में किस रंग का विचलन सबसे अधिक होता है? उत्‍तर – बैंगनी रंग का
प्रश्‍न – कैलोमल क्‍या होता है? उत्‍तर – मरक्‍यूरस क्‍लोराइड (Hg2Cl2)
प्रश्‍न – सिन्‍दूर का रासायनिक नाम है? उत्‍तर – मरक्‍युरिक सल्‍फाइड (HgS)
प्रश्‍न – ‘झूठा सोना’ (Fool’s Gold) कहलाता है? उत्‍तर – प्रकृति में पाया जाने वाला आयरन सल्‍फाइड अथवा आयरन पाइराइट्स
प्रश्‍न – पेन्क्रियाटिक जूस मेंपाया जाने वाला एन्‍जाइम है? उत्‍तर – ट्रिप्सिन एन्‍जाइम
प्रश्‍न – आँतों (Intestine) में प्रोटीनों को अमीनो अम्‍ल में अपघटित करने में उत्‍प्रेरक होता है? उत्‍तर – पेप्सिन एन्‍जाइम
प्रश्‍न – ‘एस्‍ट्रो-डी’ (Astro-D) क्‍या है? उत्‍तर – ब्रह्माण्‍ड के विकास का अध्‍ययन करने वाला जापानी एक्‍स रे उपग्रह
प्रश्‍न – ध्रुवतारा (Pole star) आकाश में एक ही स्‍थान पर दिखाई देता है जबकि अन्‍य तारे नहीं इसका कारण है? उत्‍तर – ध्रुवतारा का पृथ्‍वी के घूर्णन अक्ष की दिशा में स्थित होना।
प्रश्‍न – मनुष्‍य हृदय में सामान्‍यत: प्रति मिनट कितनी बार स्‍पंदन करता है? उत्‍तर – 72 बार
प्रश्‍न – स्फिग्‍नोमैनोमीटर (Sphygnomanometer) नामक यंत्र से क्‍या नापते हैं? उत्‍तर – रक्‍त दाब(Blood Pressure)
प्रश्‍न – सन् 1902 में कार्ल लैन्‍डस्‍टीनर (Karl Landsteiner) ने किसकी खोज की थी? उत्‍तर – रक्‍त समूह की (Blood Group)
प्रश्‍न – समुद्र का जल नीला क्‍यों दिखाई देता है? उत्‍तर – जल के कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण
प्रश्‍न – प्रोटीन किस गैस का प्रमुख यौगिक है? उत्‍तर – नाइट्रोजन
प्रश्‍न – इथोलॉजी (Ethology) में किसका अध्‍ययन किया जाता है? उत्‍तर – जानवरों के व्‍यवहार का अध्‍ययन उनके सामान्‍य वातावरण में
प्रश्‍न – नोबेल पुरस्‍कार से सम्‍मानित होने वाली विश्‍व की प्रथम महिला विज्ञान के क्षेत्र की थी, वह कौन थी? उत्‍तर – मैडम क्‍यूरी (1930) भौतिक विज्ञान में
प्रश्‍न – पानी में सूई तो डूब जाती है, जबकि भारी-भारी समुद्री जहाज तैरते रहते हैं क्‍या कारण है? उत्‍तर – जहाज के डूबे हुए भाग से हटाए गए पानी का भार सारे जहाज के बराबर होती है, इसलिए वह प्‍लवन करता है, सूई के द्वारा हटाए गए पानी का भार सूई के भार से कम होता है जिससे सूई पानी में डूब जाती है।
प्रश्‍न – भारत का स्‍वदेश निर्मित (Indigenously built) दूसरी पीढ़ी का पहला उपग्रह कौनसा है?उत्‍तर – इनसेट-2A
प्रश्‍न – सूर्य के प्रकाश की सहायता से शरीर में किस विटामिन का निर्माण होता है? उत्‍तर – विटामिन Dका
प्रश्‍न – हैली पुच्‍छल तारा (Halley’s Comet) प्रति कितने वर्ष बाद दिखाई पड़ता है? उत्‍तर – 76 वर्ष
प्रश्‍न – किन तरंगों की सहायता से चमगादडें (Bats) रात में सुरक्षित उड़ती हैं? उत्‍तर – पराश्रव्‍यUltrasonic) तरंगों की सहायता से
प्रश्‍न – HIV विषाणु से कौन सा रोग होता है ? उत्‍तर –AIDS एड्स
प्रश्‍न – रक्‍त का थक्‍का जमाने में कौनसा विटामिन सहायक होता है? उत्‍तर – विटामिन K
प्रश्‍न – एम्पियर सेकेण्‍ड मात्रक है? उत्‍तर – आवेश की मात्रा
प्रश्‍न – लाफिंग गेस है? उत्‍तर – नाइट्रस ऑक्‍साइड
प्रश्‍न – बाह्य चुम्‍बकीय प्रभावों से वैज्ञानिक यंत्रों की रक्षा की जाती है? उत्‍तर – लौह कवर में रखकर
प्रश्‍न – परमाणु बिजली घरों में किस प्रकार की न्‍यूक्‍लीयर अभिक्रिया होती है? उत्‍तर – न्‍यूक्‍लीयर संलयन (Nuclear Fusion)
प्रश्‍न – gकिरणों पर किस प्रकार का आवेश हेाता है? उत्‍तर – किसी प्रकार का नहीं
प्रश्‍न – रेडियो कार्बन तिथि निर्धारण विधि का उपयोग होता है? उत्‍तर – जीवाश्‍मों की आयु का पता लगाने में
प्रश्‍न – शरीर का सारा रक्‍त किसके माध्‍यम से शुद्ध होता है? उत्‍तर – वृक्‍क (किडनी) के माध्‍यम से
प्रश्‍न – हाइड्रोफाइट किन्‍हें कहते हैं? उत्‍तर – जलीय पौधों को
प्रश्‍न – दो समान्‍तर दर्पणों के बीच रखी वस्‍तु के कितने प्रतिबिम्‍ब बनते हैं? उत्‍तर – अनन्‍त (Infinite)
प्रश्‍न – दो समान्‍तर दर्पणों के बीच रखी वस्‍तु का सबसे अधिक चमकीला प्रतिबिम्‍ब कौन सा होता है?उत्‍तर – दूसरा प्रतिबिम्‍ब
प्रश्‍न – तेल का जल के तल पर फैल जाने का क्‍या कारण है? उत्‍तर – तेल का पृष्‍ठ तनाव जल की अपेक्षा कम होने के कारण
प्रश्‍न – पेन्सिल का लैड होता है? उत्‍तर – ग्रेफाइट
प्रश्‍न – सड़क पर चलने की अपेक्षा बर्फ पर चलना कठिन क्‍यों होता है? उत्‍तर – बर्फ में सड़क की अपेक्षा घर्षण कम होता है।
प्रश्‍न – लोलक घडि़याँ गर्मियों में सुस्‍त क्‍यों हो जाती है? उत्‍तर – लोलक की लम्‍बाई बढ़ जाने से उनका आवर्तकाल बढ़ जाता है जिससे घड़ी सुस्‍त हो जाती है।
प्रश्‍न – ऊँचे स्‍थानों पर पानी 1000C से कम ताप पर क्‍यों उबलता है? उत्‍तर – क्‍योंकि वहाँ वायुमण्‍डलीय दाब कम होता है।
प्रश्‍न – पीतल मिश्र धातु हैं? उत्‍तर – जस्‍ता और तांबा की
प्रश्‍न – ‘गैसों के दाब’ ज्ञात करने वाला यंत्र क्‍या कहलाता है? उत्‍तर – मैनोमीटर
प्रश्‍न – भाभा एटॉमिक रिसर्च सेन्‍टर ट्रॉम्‍बे में स्थित पाँचवे न्‍यूक्लियर रिएक्‍टर का क्‍या नाम है? उत्‍तर – ध्रुव
प्रश्‍न – अग्‍नाशयी रस में पाया जाने वाला एन्‍जाइम ‘ट्रिप्सिन’, प्रोटीन या पेप्‍टोन को किसमें बदलता है?उत्‍तर – छोटे पेप्‍टाइड्स में
प्रश्‍न – मनुष्‍य में ‘दाद'(Ring worm) रोग के रोगकारक कवक का नाम क्‍या है? उत्‍तर – माइक्रोस्‍पोरम(Microsporum)
प्रश्‍न – ‘स्‍कर्वी’ नामक रोग किस विटामिन के अभाव में होता है? उत्‍तर – विटामिन सी
प्रश्‍न – सबसे भारी धातु कौनसीहै? उत्‍तर – ओसमियम
प्रश्‍न – विद्युत का सबसे अच्‍छा चालक क्‍या है? उत्‍तर – चाँदी
प्रश्‍न – पोटेशियम का अयस्‍क ‘कार्नेलाइट'(Carnallite) का सूत्र क्‍या है? उत्‍तर–KCl.MgCl2.6H2O
प्रश्‍न – यूरेनियम के नाभिकीय विघटन में अन्‍तत: क्‍या प्राप्‍त होता है? उत्‍तर – सीसा
प्रश्‍न – ध्‍वनि को मापने की इकाई क्‍या है? उत्‍तर – डेसीबल
प्रश्‍न – ‘स्‍टेनलेस स्‍टील’ किन धातुओं को मिश्रित करके बनाया जाता है? उत्‍तर – क्रोमियम, लोहा और निकेल
प्रश्‍न – वनस्‍पति विज्ञान की उस शाखा का क्‍या नाम है, जिसमें शैवाल (Algae) का अध्‍ययन किया जाता है? उत्‍तर – फाइकोलॉजी (Phycoligy)
प्रश्‍न – दूध से दही बनाने वाले जीवाणु का नाम  है? उत्‍तर – बैक्‍टेरियम लैक्टिसि एसीडाइ(Bacterium dactici acidi)
प्रश्‍न – मधुमेह के रोगी के पेशाब में किसकी अधिकता हो जाती है? उत्‍तर – शर्करा (Sugar) की
प्रश्‍न – स्‍वचालित ब्रेक (Hydraulic brakes) किस नियम के आधार पर बने है? उत्‍तर – पारकेल के नियम के आधार पर
प्रश्‍न – डी एन ए संश्‍लेषण का प्रतिपादन किसने किया था? उत्‍तर – कॉर्नबर्ग ने
प्रश्‍न – फोटोग्राफी में प्रयुक्‍त होने वाले ‘हाइपो’ का रासायनिक नाम क्‍या है? उत्‍तर – सोडियम थायो सल्‍फेट
प्रश्‍न – भोपाल गैस दुर्घटना में मिक (MIC) का रिसाव हुआ था इस गैस का पूरा नाम क्‍या है? उत्‍तर – मिथाइल आइसो सायनेट CH3NCO
प्रश्‍न – गेहूँ का वैज्ञानिक नाम क्‍या है? उत्‍तर – ट्रिटिकम ऐस्टिक्‍म (Triticum aestivum) तथा ट्रिटिकम वल्‍गेयर (Triticum Vulgare)
प्रश्‍न – ओक्‍जेनोमीटर (Auxanometer) से क्‍या नापा जाता है? उत्‍तर – पौधों की रेखीय वृद्धि दर(Linear growth rate of plants)
प्रश्‍न – कमरे में रखे रेफ्रीजरेटर का दरवाजा खोलने से कमरे के ताप पर क्‍या प्रभाव पड़ता है? उत्‍तर – ताप बढ़ जाता है।  Important Science Questions in Hindi
प्रश्‍न – ताप बढ़ानेपर अर्द्धचालकों (Semiconductors) की चालकता? उत्‍तर – बढ़ जाती है।
प्रश्‍न – मनुष्‍य की श्रव्‍यता की सीमा है? उत्‍तर – 20 हर्ट्स से 20000 हर्ट्स तक
प्रश्‍न – हरा कशीश का रासायनिक सूत्र है? उत्‍तर–FeSO4.7H2O
प्रश्‍न – कैलोमेल (Calomel) का रासायनिक नाम है? उत्‍तर – मरक्‍यूरस क्‍लोराइड
प्रश्‍न – हीरे की चमक का कारण है? उत्‍तर – प्रकाश का पूर्ण आन्‍तरिक परावर्तन
प्रश्‍न – विद्युत तीव्रता का मात्रक है? उत्‍तर – न्‍यूटन/कूलॉम
प्रश्‍न – विटामिन E का रासायनिक नाम है? उत्‍तर – टेकोफेरॉन
प्रश्‍न – भारी जल (Heavy Water) क्‍या है? उत्‍तर – ड्यूटीरियम ऑक्‍साइड
प्रश्‍न – ट्रैकोना रोग किस अंग से सम्‍बन्धित रोग है? उत्‍तर – आँख से
प्रश्‍न – हेपेटाइटिस-बी वायरस किस प्रमुख रोग के लिए जिम्‍मेदार है? उत्‍तर – पीलिया
प्रश्‍न – एपीलेप्‍सी रोग का सम्‍बन्‍ध है? उत्‍तर – नाड़ी संस्‍थान से
प्रश्‍न – AB रक्‍त समूह वाला व्‍यक्ति ‍किस रक्‍त समूह के व्‍यक्ति से रक्‍त ग्रहण कर सकता है? उत्‍तर–A, B, ABतथा O रक्‍त समूह के व्‍यक्ति से
प्रश्‍न – चेचक के टीके की खोज किसने की? उत्‍तर – एडवर्ड जेनर ने
प्रश्‍न – दूध एक आदर्श आहार है, लेकिन इसमें किन तत्‍वों की कमी होती है? उत्‍तर – आयरन एवं कॉपर Important Science Questions in Hindi
प्रश्‍न – शैलिंग प्रतिशत (Shelling percentage) मूँगफली की गुणवत्ता ज्ञात करने का एक आधार (Parameter) है। शैलिंग प्रतिशत से क्‍या ज्ञात किया जाता है? उत्‍तर – मूँगफली में दानों का प्रतिशत
प्रश्‍न – विश्‍व का सबसे पुराना खाद्यान्‍न कौनसा है? उत्‍तर – (Hot Vulgare)
प्रश्‍न – किस बकरी को ‘विश्‍व की दूध की रानी'(Milk Queen of world) के नाम से भी जाना जाता है? उत्‍तर – सानेन
प्रश्‍न – हस्‍त चालित चारा काटने की मशीन (Chaff cutter) में फ्लाई व्‍हील किस प्रकार के लोहे का बना होता है? उत्‍तर – ढलवाँ लोहे का
प्रश्‍न – प्रति सौ ग्राम भैंस के दूध से कितनी ऊर्जा प्राप्‍त होती है? उत्‍तर – लगभग 90 कैलोरी
प्रश्‍न – मनुष्‍य के रक्‍त में लाल रंग का कारण है? उत्‍तर – हीमोग्‍लोबिन (Haemoglobin)
प्रश्‍न – मनुष्‍यमें गेस्ट्रिक रस (Gastric Juice) किस अंग से स्रावित होता है? उत्‍तर– आमाशय से
प्रश्‍न – द ओरिजिन ऑफ स्‍पीशीज (The Origin of Species) पुस्‍तक किसने लिखी है? उत्‍तर – डॉर्विन ने
प्रश्‍न – प्रोसेसर की गति किस मात्रक में मापी जाती है? उत्‍तर – मेगाहर्ट्ज (Mega-Hertz) या गीगाहर्ट्ज (giga-Hertz) में
प्रश्‍न – डीटीपी का टीका बच्‍चों को किन रोगों से रक्षा के लिए लगाया जाता है? उत्‍तर – टिटेनस,डिप्‍थीरिया तथा हूपिंग कफ (Whooping Cough)
प्रश्‍न – वयस्‍क मनुष्‍य में हृदय चक्र (Cardiac Cycle) का समय कितना होता है? उत्‍तर–0.8सेकेण्‍डImportant Science Questions in Hindi
प्रश्‍न – मछलियों में श्‍वसन हेतु अंग है? उत्‍तर – क्‍लोम (Gills)
प्रश्‍न – वाटसन व क्रिक को जीवविज्ञान की किस खोज के लिए नोबेल पुरस्‍कार प्रदान यिका गया?उत्‍तर–DNA के डबल हैलीकल मॉडल की खोज के लिए
प्रश्‍न – बैक्‍टीरिया की खोज किसने की थी? उत्‍तर – एन्‍टोनी-वॉन-लुइवेन हॉक
प्रश्‍न – विज्ञान की शाखा एग्रोस्‍टोलॉजी (Agrostology) में किसका अध्‍ययन किया जाता है? उत्‍तर – घास (Grass) का
प्रश्‍न – मानव शरीर में विटामिन K का निर्माण किस अंग में होता है? उत्‍तर – कोलन में बैक्‍टीरिया द्वारा
प्रश्‍न – पीडियाट्रिक्‍स (Paediotries) का सम्‍बन्‍ध किससे है? उत्‍तर – बच्‍चों के रोगों से
प्रश्‍न – हाइपोग्‍लाइसेमिया (Hypoglycemia) नामक रोग रक्‍त में किसकी कमी से होता है? उत्‍तर – ग्‍लूकोस की कमी से
प्रश्‍न – हाइग्रोमीटर (Hygrometer) से क्‍या नापा जाता है? उत्‍तर – आपेक्षिक आर्द्रता (Relative Humidity)
प्रश्‍न – हाइड्रोमीटर (Hydrometer) यंत्रसे क्‍या नापा जाता है? उत्‍तर – आपेक्षिक घनत्‍व (Relative Density)
प्रश्‍न – रेड लैड का रासायनिक सूत्र है? उत्‍तर–Pb3O4
प्रश्‍न – रासायनिक दृष्टि से चीनी क्‍या है? उत्‍तर – कार्बोहाइड्रेट (सुक्रोज)
प्रश्‍न – किस खनिज को ‘बेवकूफों का सोना'(Food’s gold) कहते हैं? उत्‍तर – पायराइट को
प्रश्‍न – एण्‍टीपायरेटिक दवा ली जाती है? उत्‍तर – बुखार कम करने के लिए
प्रश्‍न – फोटोग्राफी में प्रयुक्‍त ‘हाइपो’ रासायनिक रूप से क्‍या है? उत्‍तर – सोडियम थायोसल्‍फेट
प्रश्‍न – मूत्र का पीला रंग किसके कारण होता है? उत्‍तर – यूरोक्रोम (Urochrome) के कारण
प्रश्‍न – हाइपोकोण्ड्रिया (Hypochondria) बीमारी क्‍या होती है? उत्‍तर – अपने स्‍वास्‍थ्‍य के विषय  में असामान्‍य मानसिक चिन्‍ता की बीमारी
प्रश्‍न –’नेत्रदान’ में रोगी में आँख के किस भाग का प्रतिरोपण (Transplantation) किया जाता है? उत्‍तर – कॉर्निया का
प्रश्‍न – पैलाग्रा (Pellagra) रोग किसकी कमी के कारण होता है? उत्‍तर – नियासिन की कमी के कारण
प्रश्‍न – चन्‍द्रमा के तल से आकाश का काला दिखना किस कारण होता है? उत्‍तर – प्रकाश का प्रकीर्णन
प्रश्‍न – खसरा (Measles) होने का कारक क्‍या है? उत्‍तर–वायरस (Virus)
प्रश्‍न – सामान्‍य स्थितियों में हृदय से आने वाले रक्‍त का कितना प्रतिशत भाग गुर्दे को मिलता है? उत्‍तर–24%
प्रश्‍न – नायलॉन प्‍लास्टिक्‍स के आविष्‍कारक कौन थे? उत्‍तर – कारोथर्स (1937)
प्रश्‍न – रूटाइल (TiO2) किस धातु का अयस्‍क है? उत्‍तर – टिटेनियम
प्रश्‍न – लेड ऑक्‍साइड (PbO) का व्‍यापारिक नाम क्‍या है? उत्‍तर – लिथार्ज
प्रश्‍न – हिन्‍दुस्‍तान ऑर्गेनिक केमीकल्‍स लिमिटेड कहाँ स्थित है? उत्‍तर – कोलाबा (महाराष्‍ट्र)
प्रश्‍न – स्‍तनधारी प्राणियों में रक्‍त का सबसे अधिकतापमान किस पशु का होता है? उत्‍तर–व्‍हेल में
प्रश्‍न – रेडियो एक्टिवता (Radio Activity) की इकाई क्‍या है? उत्‍तर – बेक्‍यूरेल (Becquerel)
प्रश्‍न – ध्‍वनि से संबंधित विज्ञान क्‍या कहलाता है? उत्‍तर – एकोस्टिक (Acoustic)
प्रश्‍न – इलेक्‍ट्रॉन की विराम ऊर्जा होती है? उत्‍तर–0.51 Mev
प्रश्‍न – प्र‍दीप्ति घनत्‍व का मात्रक क्‍या होता है? उत्‍तर – लक्‍स (LUX)
प्रश्‍न – बादल का हवा में तैरने का कारण क्‍या है? उत्‍तर – वायु की श्‍यानता (Viscosity) एवं अपने कम घनत्‍व के कारण
प्रश्‍न – जीवन के उद्भव का प्रथम वैज्ञानिक विवरण किस वैज्ञानिक ने प्रस्‍तुत किया? उत्‍तर–ए. आई. ओपेरिन ने
प्रश्‍न – इन्‍सुलिन की खोज किसने की थी? उत्‍तर – एफ. जी. बेण्टिंग ने
प्रश्‍न – विटामिन C का रासायनिक नाम है? उत्‍तर – एस्‍कार्बिक अम्‍ल
प्रश्‍न – सुपर फॉस्‍फेट उर्वरकों का सूत्र है? उत्‍तर – Ca(H2PO4)2
प्रश्‍न – पानी का अधिकतम घनत्‍व किस ताप पर होता है? उत्‍तर–40Cपर
प्रश्‍न – एपीलेप्‍सी रोग का सम्‍बन्‍ध है? उत्‍तर – नाड़ी संस्‍थान से
प्रश्‍न – ड्रॉप्‍सी (Dropsy) की बीमारी के लिए कौनसा मिलावटी तेल उत्‍तरदायी पाया गया? उत्‍तर –आर्जीमोन
प्रश्‍न – हड्डियों में फॉस्‍फोरस किस रूप में पाया जाता है? उत्‍तर – कैल्सियम फॉस्‍फेट के रूप में
प्रश्‍न – किस उपकरण द्वारा ध्‍वनि तरंगों का प्रयोग करके समुद्र की गहराई नापी जाती है? उत्‍तर – सोनार
प्रश्‍न – मूत्र में एल्‍युमिन (Albumin)आने से किस अंग के गड़बड़ होने की सम्‍भावना होती है? उत्‍तर –वृक्‍क(Kedney)
प्रश्‍न – मैनोमीटर से क्‍या नापते हैं? उत्‍तर – गैसों का दाब
प्रश्‍न – पाइरोडॉक्सिन किसका रासायनिक नाम है? उत्‍तर – विटामिन B6 का
प्रश्‍न – मैनोमीटर से क्‍या नापते हैं? उत्‍तर – गैस का दाब
प्रश्‍न – चार अर्द्धआयुओं के पश्‍चात किसी रेडियो एक्टिव पदार्थ का कितना भाग अविघटित रह जाएगा?उत्‍तर – 1/16 भाग (या 6.25%भाग)
प्रश्‍न – शुष्‍कछिपाक (Xeroph Thalmia) का कारण है? उत्‍तर – विटामिन A की कमी
प्रश्‍न – सोडियम के किस यौगिक को ‘वाटर ग्‍लास‘ कहा जाता है? उत्‍तर – सोडियम सिलिकेट को General Science MCQ Questions with Answers
प्रश्‍न – चुम्‍बकीय दृष्टि से ऑक्‍सीजन क्‍या है? उत्‍तर–अनुचुम्‍बकीय (Paramagnetic)
प्रश्‍न – एक रेडियोएक्टिव तत्‍व का परमाणु क्रमांक (Z) है, इससे एक ß- कण उत्‍सर्जित होने पर यह कितना हो जाएगा? उत्‍तर–(Z+1)
प्रश्‍न – रदरफोर्ड ने भौतिकी में किस मूल कण की खोज की थी? उत्‍तर – प्रोटॉन की
प्रश्‍न – रक्‍त का थक्‍का किस रोग में नहीं जमता? उत्‍तर – हीमोफीलिया में
प्रश्‍न – डीएनए (DNA) उपस्थित रहता है? उत्‍तर – केन्‍द्रक में
प्रश्‍न – आनुवंशिकता की भूमिका किसने निर्दिष्‍ट की थी? उत्‍तर – ग्रेगर जॉन मेण्‍डल ने
प्रश्‍न – एक परमाणु द्रव्‍यमान इकाई (1 AMU)को पूर्ण रूप से ऊर्जा में परिवर्तित करने पर कितनी ऊर्जा मुक्‍त होती है? उत्‍तर–931 MeV
प्रश्‍न – पानी में हवा का बुलबुला किस प्रकार के लैंस की भाँति कार्य करता है? उत्‍तर – अवतल लैंस की तरह
प्रश्‍न – ‘इलेक्‍ट्रॉन-वोल्‍ट’ किस भौतिक राशि का मात्रक है? उत्‍तर – ऊर्जा का
प्रश्‍न – साबुन के बुलबुले में प्रकाश की घटना के कारण रंग दिखाई देते हैं? उत्‍तर – व्‍यतिकरण के कारण  General Science MCQ Questions with Answers
प्रश्‍न – गतिमान आवेश उत्‍पन्‍न करता है? उत्‍तर – चुम्‍बकीय क्षेत्र तथा विद्युत क्षेत्र दोनों
प्रश्‍न – ‘डायनामाइट’ का आविष्‍कार किसने किया था? उत्‍तर – अल्‍फ्रेड नोबेल ने
प्रश्‍न – किसी तारे का रंग किसका परिचायक होता है? उत्‍तर – तारे के ताप का
प्रश्‍न – भारी जल (Heavy Water) होता है? उत्‍तर – ड्यूटेरियम का ऑक्‍साइड (D2O)
प्रश्‍न – ‘अर्जेन्‍टाइट’ किस धातु का अयस्‍क (Ore) है? उत्‍तर – चाँदी का
प्रश्‍न – दूध का pH का मान होता है? उत्‍तर–6.6
प्रश्‍न – मनुष्‍य के शरीर में पित्‍त कहाँ बनता है तथा कहाँ इकट्ठा होता है? उत्‍तर – पत्ति यकृत में बनता है तथा गाल ब्‍लैडर में एकत्रित होता है।
प्रश्‍न – मानव शरीर की सबसे छोटी माँसपेशी का क्‍या नाम है? उत्‍तर – स्‍टेपिडयस (Stapedius)
प्रश्‍न – हिस्‍टोलॉजी (Histology) में किसका अध्‍ययन किया जाता है? उत्‍तर – ऊतकों (Tissues) का
प्रश्‍न – न्‍यूटन/किग्रा किस भौतिक राशि का मात्रक है? उत्‍तर – त्‍वरण (Acceleration) का
प्रश्‍न – आयोडीन टिंक्‍चर क्‍या है? उत्‍तर – आयोडीन का एल्‍कोहॉली विलयन
प्रश्‍न – रेडियो तरंगें वायुमण्‍डल के किस मण्‍डल से परावर्तित होती है? उत्‍तर – आयनमण्‍डल (Ionosphere) से  General Science MCQ Questions with Answers
प्रश्‍न – टमाटर का रंग पकने पर लाल क्‍यों हो जाता है? उत्‍तर – क्रोमोप्‍लास्‍ट के कारण
प्रश्‍न – पारिस्थितिकी (Ecology) सम्‍बन्धित है? उत्‍तर – जीव व पर्यावरण के सह-सम्‍बन्‍धों से
प्रश्‍न – भारत में अन्‍तरिक्ष आयोग की स्‍थापना कब हुई? उत्‍तर – जून 1972
प्रश्‍न – सर्वप्रथम कृत्रिम गर्भाधान भारत में कब प्रारम्‍भ किया गया? उत्‍तर – सन् 1942 में
प्रश्‍न – आई राइट क्‍या है? उत्‍तर – विकलांगों का कम्‍प्‍यूटर
प्रश्‍न – पृथ्‍वी से पलायन वेग का मान कितना होता है? उत्‍तर–11.2 किमी/सेकण्‍ड
प्रश्‍न – इन्‍द्रधनुष किसका उदाहरण है? उत्‍तर – अपवर्तन, विक्षेपण, पूर्ण आन्‍तरिक परिवर्तन
प्रश्‍न – पुष्‍प विभिन्‍न रंगों के होते हैं, क्‍योंकि उनमें पाया जाता है? उत्‍तर – एन्‍थोसाइनिन
प्रश्‍न – सेब का खाने योग्‍य भाग है? उत्‍तर – रसदार थैलामस (Thalamas)
प्रश्‍न – मानव शरीर में एक मिनट में कितनी बार हार्ट बीट्स होती है? उत्‍तर-72 बार
प्रश्‍न – स्‍वयं बिना बदले रासायनिक अभिक्रिया की दर में परिवर्तन लाने वाले पदार्थ को क्‍या कहते हैं? उत्‍तर – उत्‍प्रेरक (Catalyst)
प्रश्‍न – फारेनहाइट पैमाने के अनुसार पानी का सामान्‍य क्‍वथनांक कितना है? उत्‍तर–2120F
प्रश्‍न – समान परमाणु संख्‍या लेकिन अलग द्रव्‍यमान संख्‍या वाले अणु कहलाते हैं? उत्‍तर – समस्‍थानिक (Isotope)
प्रश्‍न – इन्‍सुलिन की खोज किसने की थी? उत्‍तर – एफ. जी. बैंटिंग ने
प्रश्‍न – बोकारो स्‍टील प्‍लाण्‍ट किस देश के सहयोग से बना? उत्‍तर – पूर्व सोवियत संघ के सहयोग से
प्रश्‍न – राष्‍ट्रीय विज्ञान दिवस कब मनाया जाता है? उत्‍तर – 28 फरवरी को
प्रश्‍न – राइबोफ्लाविन है? उत्‍तर – विटामिन-B2
प्रश्‍न – मधुमक्खियों के काटने पर किसके कारण दर्द होता है? उत्‍तर – फार्मिक अम्‍ल के कारण
प्रश्‍न – संवेग कैसी राशि है सदिश अथवा अदिश? उत्‍तर – सदिश
प्रश्‍न – हेमेटाइट (Haematite) किसका अयस्‍क है? उत्‍तर – आयरन का
प्रश्‍न – सूर्य में ऊर्जा का निर्माण किस प्रक्रिया से होता है? उत्‍तर – नाभिकीय संलयन (Neuclear fusion) द्वारा
प्रश्‍न – भू-पर्पटी में सर्वाधिक पाया जाने वाला तत्‍व क्‍या है? उत्‍तर – ऑक्‍सीजन
प्रश्‍न – ध्‍वनि का वेग अनुमानत: कितना होता है? उत्‍तर–330 मी/से
प्रश्‍न – पानी का घनत्‍व किस ताप पर अधिकतम होता है? उत्‍तर–40C पर
प्रश्‍न – सर सी. वी. रमन को भौतिकी का नोबेल पुरस्‍कार कब मिला था? उत्‍तर – 1930 में
प्रश्‍न – कम्‍प्‍यूटरों के इन्‍टीग्रेटेड सर्किटों के लिए चिप्‍स साधारणतया किसके बनाए जाते है? उत्‍तर – सिलिकान के  General Science MCQ Questions with Answers
प्रश्‍न – मनुष्‍य शरीर की सबसे लम्‍बी हड्डी है? उत्‍तर – फीमर (Femur)
प्रश्‍न – ब्‍लू विट्रॉल के नाम से किसे जाना जाता है? उत्‍तर – कॉपर सल्‍फेट को
प्रश्‍न – पौधे के किस भाग से हल्‍दी प्राप्‍त होती है? उत्‍तर – तना से
प्रश्‍न – होलोग्राफी किसकी तकनीक है? उत्‍तर – वस्‍तु के त्रिविमीय प्रतिरूप को अंकित करने एवं पुनरावृत्ति करने की
प्रश्‍न – इन्‍सुलिन की खोज किसने की थी? उत्‍तर– एफ. जी. वेटिंग ने
प्रश्‍न – हड्डियों में फॉस्‍फेट किस रूप में पाया जाता है? उत्‍तर – कैल्सियम फॉस्‍फेट के रूप में
प्रश्‍न – मैनोमीटर से क्‍या नापा जाता है? उत्‍तर – गैस का दाब
प्रश्‍न – टेरामाइसिन नामक एण्‍टीबायोटिक किस जीवाणु से प्राप्‍त होता है? उत्‍तर – स्‍ट्रैप्‍टोकोकस रिमोसस से
प्रश्‍न – ध्‍वनि की चाल पर दाब का क्‍या प्रभावपड़ता है? उत्‍तर – कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
प्रश्‍न – कॉस्मिक किरणों की खोज किसने की थी? उत्‍तर – आर. ए. मिलीकन ने
प्रश्‍न – चालक की वैद्युत प्रतिरोधकता का मात्रक क्‍या है? उत्‍तर – ओम
प्रश्‍न – पृथ्‍वी का औसत घनत्‍व कितना है? उत्‍तर–5.5 ग्राम/सेमी3
प्रश्‍न – जर्मन सिल्‍वर में कौन-कौन से संघटक होते हैं? उत्‍तर – ताँबा, निकिल तथा जिंक
प्रश्‍न – चुम्‍बक झुकाव (Dip) की समान स्थिति दर्शाने वाली रेखा को क्‍या कहते हैं? उत्‍तर – आइसोक्‍लीनिक (Isoclinic) रेखा
प्रश्‍न – पक्षियों की पूंछ उनके किस काम आती है? उत्‍तर – हवा में उड़ते समय सन्‍तुलन बनाए रखने के लिए
प्रश्‍न –कोशिकाका ऊर्जा घर किसे कहते हैं? उत्‍तर – माइटोकॉण्ड्रिया को
प्रश्‍न – घरों में बिजली सप्‍लाई के लिए तीन तरह के तारों का प्रयोग करते हैं, लाइव, न्‍यूट्रल और अर्थ। इसी क्रम में तारों का रंग होता है? उत्‍तर – लाल, काला और हरा
प्रश्‍न – ध्रुवतारा अपने स्‍थान पर स्थिर प्र‍तीत क्‍यों होताहै? उत्‍तर – पृथ्‍वी के घूर्णन अक्ष की सीध में होने के कारण
प्रश्‍न – तारा बनने की प्रक्रिया का प्रारम्‍भ किन गैसों से होता है? उत्‍तर – हाइड्रोजन व हीलियम से
प्रश्‍न – कृत्रिम उपग्रह में ऊर्जा का स्रोत क्‍या होता है? उत्‍तर – सौर बैटरी
प्रश्‍न – आकाश का सबसे चमकीला सितारा है? उत्‍तर – साइरस
प्रश्‍न – ऑक्‍सीकरण की क्रिया में इलेक्‍ट्रानों में क्‍या होता है लाभ या हानि? उत्‍तर – हानि
प्रश्‍न – नोबल गैसें किस अन्‍य परमाणु से क्रिया क्‍यों नहीं करती? उत्‍तर – क्‍योंकि इनकी बाहरी कक्षा में आठ इलेक्‍ट्रॉन होते हैं।
प्रश्‍न – पानी में साबुन घोलने से पृष्‍ठ तनाव पर क्‍या प्रभाव पड़ता है? उत्‍तर–पृष्‍ठ तनाव कम हो जाता है।  General Science MCQ Questions with Answers
प्रश्‍न – पटाखों में लाल रंग किस तत्‍व की उपस्थित के कारण होता है? उत्‍तर – स्‍ट्रांशियम की उपस्थिति के कारण
प्रश्‍न – फलों को पकाने के लिए किस गैस का प्रयोग किया जाता है? उत्‍तर – एथिलीन (Ethylene)
प्रश्‍न – फलों का अध्‍ययन किया जाता है? उत्‍तर– पोमोलॉजी (Pomology) में
प्रश्‍न – रक्‍त कोष में रक्‍त किस रसायन के साथ मिलाकर रखा जाता है? उत्‍तर – सोडियम नाइट्रेट व डेक्‍सट्रेट के साथ

Friday, June 12, 2020

24 - देव शक्ति गायत्री मंत्र

24 - देव शक्ति गायत्री मंत्र... 



इष्टसिद्धि मे मां गायत्री का ध्यान बहुत शुभ होता है। गायत्री उपासना के लिए गायत्री मंत्र बहुत ही चमत्कारी और शक्तिशाली माना गया है। शास्त्रों के मुताबिक इस मंत्र के 24 अक्षर 24 महाशक्तियों के प्रतीक हैं। 

एक गायत्री के महामंत्र द्वारा इन देवशक्तियों का स्मरण हो जाता है। 24 देव शक्तियों के ऐसे 24 चमत्कारी गायत्री मंत्र मे से, जो देवी-देवता आपके इष्ट है, उनका विशेष देव गायत्री मंत्र बोलने से चमत्कारी फल प्राप्त होता है। शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक व भौतिक शक्तियों की प्राप्ति के लिए गायत्री उपासना सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। 

गायत्री ही वह शक्ति है जो पूरी सृष्टि की रचना, स्थिति या पालन और संहार का कारण है। वेदों में गायत्री शक्ति ही प्राण, आयु, शक्ति, तेज, कीर्ति और धन देने वाली मानी गई है। गायत्री मंत्र को महामन्त्र पुकारा जाता है, जो शरीर की कई शक्तियों को जाग्रत करता है।

इष्टसिद्धी से मनोवांछित फ़ल के लिए गायत्री मंत्र के 24 अक्षरो के हर देवता विशेष के मंत्रों का स्मरण करें।

1👉 श्रीगणेश : मुश्किल कामों में कामयाबी, रुकावटों को दूर करने, बुद्धि लाभ के लिए इस गणेश गायत्री मंत्र का स्मरण करना चाहिए :

|| ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो बुद्धिः प्रचोदयात् ||

2👉 नृसिंह : शत्रु को हराने, बहादुरी, भय व दहशत दूर करने, पुरुषार्थी बनने व किसी भी आक्रमण से बचने के लिए नृसिंह गायत्री असरदार साबित होता है |

|| ॐ नृसिंहाय विद्महे, वज्रनखाय धीमहि। तन्नो नृसिंहः प्रचोदयात् ||

3👉 विष्णु : पालन-पोषण की क्षमता व काबिलियत बढ़ाने या किसी भी तरह से सबल बनने के लिए विष्णु गायत्री का महत्व है |

|| नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ||

4👉  शिव : दायित्वों व कर्तव्यों को लेकर दृढ़ बनने, अमंगल का नाश व शुभता को बढ़ाने के लिए शिव गायत्री मंत्र बड़ा ही प्रभावी माना गया है |

|| ॐ पञ्चवक्त्राय विद्महे, महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ||

5👉  कृष्ण : सक्रियता, समर्पण, निस्वार्थ व मोह से दूर रहकर काम करने, खूबसूरती व सरल स्वभाव की चाहत कृष्ण गायत्री मंत्र पूरी करता है |

|| ॐ देवकीनन्दाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि। तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ||

6👉 राधा : प्रेम भाव को बढ़ाने व द्वेष या घृणा को दूर रखने के लिए राधा गायत्री मंत्र का स्मरण बढ़ा ही लाभ देता है |

|| ॐ वृषभानुजायै विद्महे, कृष्णाप्रियायै धीमहि। तन्नो राधा प्रचोदयात् ||

7👉 लक्ष्मी : रुतबा, पैसा, पद, यश व भौतिक सुख-सुविधाओं की चाहत लक्ष्मी गायत्री मंत्र शीघ्र पूरी कर देता है |

|| ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे, विष्णुप्रियायै धीमहि। तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ||

8👉 अग्रि : ताकत बढ़ाने, प्रभावशाल व होनहार बनने के लिए अग्निदेव का स्मरण अग्नि गायत्री मंत्र से करना शुभ होता है |

|| ॐ महाज्वालाय विद्महे, अग्निदेवाय धीमहि। तन्नो अग्निः प्रचोदयात् ||

9👉 इन्द्र : संयम के जरिए बीमारियों, हिंसा के भाव रोकने व भूत-प्रेत या अनिष्ट से रक्षा में इन्द्र गायत्री मंत्र प्रभावी माना गया है |

|| ॐ सहस्त्रनेत्राय विद्महे, वज्रहस्ताय धीमहि। तन्नो इन्द्रः प्रचोदयात् ||

10👉  सरस्वती : बुद्धि व विवेक, दूरदर्शिता, चतुराई से सफलता मां सरस्वती गायत्री मंत्र से फौरन मिलती है |

|| ॐ सरस्वत्यै विद्महे, ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात् ||

11👉  दुर्गा : विघ्नों के नाश, दुर्जनों व शत्रुओं को मात व अहंकार के नाश के लिए दुर्गा गायत्री मंत्र का महत्व है |

|| ॐ गिरिजायै विद्महे, शिव प्रियायै धीमहि। तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ||

12👉  हनुमानजी : निष्ठावान, भरोसेमंद, संयमी, शक्तिशाली, निडर व दृढ़ संकल्पित होने के लिए हनुमान गायत्री मंत्र का अचूक माना गया है |

|| ॐ अञ्जनीसुताय विद्महे, वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो मारुतिः प्रचोदयात् ||

13👉  पृथ्वी : पृथ्वी गायत्री मंत्र सहनशील बनाने वाला, इरादों को मजबूत करने वाला व क्षमाभाव बढ़ाने वाला होता है |

|| ॐ पृथ्वी देव्यै विद्महे, सहस्त्र मूर्त्यै धीमहि। तन्नो पृथ्वी प्रचोदयात् ||

14👉 सूर्य : निरोगी बनने, लंबी आयु, तरक्की व दोषों का शमन करने के लिए सूर्य गायत्री मंत्र प्रभावी माना गया है |

|| ॐ भास्कराय विद्महे, दिवाकराय धीमहि। तन्नो सूर्य्यः प्रचोदयात् ||

15👉 राम : धर्म पालन, मर्यादा, स्वभाव में विनम्रता, मैत्री भाव की चाहत राम गायत्री मंत्र से पूरी होती है |

|| ॐ दाशरथये विद्महे, सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात् ||

16👉 सीता : सीता गायत्री मंत्र मन, वचन व कर्म से विकारों को दूर कर पवित्र करता है। साथ ही स्वभाव मे भी मिठास घोलता है |

|| ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे, भूमिजायै धीमहि। तन्नो सीता प्रचोदयात् ||

17👉 चन्द्रमा : काम, क्रोध, लोभ, मोह, निराशा व शोक को दूर कर शांति व सुख की चाहत चन्द्र गायत्री मंत्र से पूरी होती है |

|| ॐ क्षीरपुत्रायै विद्महे, अमृततत्वाय धीमहि।तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात् ||

18👉 यम : मृत्यु सहित हर भय से छुटकारा, वक्त को अनुकूल बनाने व आलस्य दूर करने के लिए यम गायत्री मंत्र असरदार होता है |

|| ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे, महाकालाय धीमहि। तन्नो यमः प्रचोदयात् ||

19👉 ब्रह्मा : किसी भी रूप में सृजन शक्ति व रचनात्कमता बढ़ाने के लिए ब्रह्मा गायत्री मंत्र मंगलकारी होता है |

|| ॐ चतुर्मुखाय विद्महे, हंसारुढ़ाय धीमहि।तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात् ||

20👉 वरुण : दया, करुणा, कला, प्रसन्नता, सौंदर्य व भावुकता की कामना वरुण गायत्री मंत्र पूरी करता है |

|| ॐ जलबिम्बाय विद्महे, नीलपुरुषाय धीमहि। तन्नो वरुणः प्रचोदयात् ||

21👉 नारायण : चरित्रवान बनने, महत्वकांक्षा पूरी करने, अनूठी खूबियां पैदा करने व प्रेरणास्त्रोत बनने के लिए नारायण गायत्री मंत्र शुभ होता है |

|| ॐ नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि। तन्नो नारायणः प्रचोदयात् ||

22👉 हयग्रीव : मुसीबतों को पछाड़ने, बुरे वक्त को टालने, साहसी बनने, उत्साह बढ़ाने व मेहनती बनने के कामना ह्यग्रीव गायत्री मंत्र पूरी करता है |

|| ॐ वाणीश्वराय विद्महे, हयग्रीवाय धीमहि। तन्नो हयग्रीवः प्रचोदयात् ||

23👉 हंस : यश, कीर्ति पीने के साथ संतोष व विवेक शक्ति जगाने के लिए हंस गायत्री मंत्र असरदार होता है |

|| ॐ परमहंसाय विद्महे, महाहंसाय धीमहि। तन्नो हंसः प्रचोदयात् ||

24👉  तुलसी : सेवा भावना, सच्चाई को अपनाने, सुखद दाम्पत्य, शांति व परोपकारी बनने की चाहत तुलसी गायत्री मंत्र पूरी करता है |

|| ॐ श्री तुलस्यै विद्महे, विष्णु प्रियायै धीमहि। तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ||

ये देवशक्तियां जाग्रत, आत्मिक और भौतिक शक्तियों से संपन्न मानी गई है। इष्टसिद्धि के नजरिए से मात्र एक गायत्री मंत्र जपने से ही 24 देवताओं का इष्ट और उनसे जुड़ी शक्ति पाना साधक को सिद्ध बना देता है।
।।जय माताजी ।।

64 कलाओं में महारत थे श्री कृष्ण



64 कलाओं में महारत थे श्री कृष्ण 

क्या आप जानते हैं कि कौन कौन सी होती है चौसठ कलायें... 

श्री कृष्ण अपनी शिक्षा ग्रहण करने आवंतिपुर (उज्जैन) गुरु सांदीपनि के आश्रम में गए थे जहाँ वो मात्र 64 दिन रह थे। वहां पर उन्होंने ने मात्र 64 दिनों में ही अपने गुरु से 64 कलाओं की शिक्षा हासिल कर ली थी। हालांकि श्री कृष्ण भगवान के अवतार थे और यह कलाएं उन को पहले से ही आती थी। पर उनका जन्म एक साधारण मनुष्य के रूप में हुआ था इसलिए उन्होंने गुरु के पास जाकर यह पुनः सीखी।

निम्न 64 कलाओं में पारंगत थे श्रीकृष्ण

1- नृत्य – नाचना
2- वाद्य- तरह-तरह के बाजे बजाना
3- गायन विद्या – गायकी।
4- नाट्य – तरह-तरह के हाव-भाव व अभिनय
5- इंद्रजाल- जादूगरी
6- नाटक आख्यायिका आदि की रचना करना
7- सुगंधित चीजें- इत्र, तेल आदि बनाना
8- फूलों के आभूषणों से श्रृंगार करना
9- बेताल आदि को वश में रखने की विद्या
10- बच्चों के खेल
11- विजय प्राप्त कराने वाली विद्या
12- मन्त्रविद्या
13- शकुन-अपशकुन जानना, प्रश्नों उत्तर में शुभाशुभ बतलाना
14- रत्नों को अलग-अलग प्रकार के आकारों में काटना
15- कई प्रकार के मातृका यन्त्र बनाना
16- सांकेतिक भाषा बनाना
17- जल को बांधना।
18- बेल-बूटे बनाना
19- चावल और फूलों से पूजा के उपहार की रचना करना। (देव पूजन या अन्य शुभ मौकों पर कई रंगों से रंगे चावल, जौ आदि चीजों और फूलों को तरह-तरह से सजाना)
20- फूलों की सेज बनाना।
21- तोता-मैना आदि की बोलियां बोलना – इस कला के जरिए तोता-मैना की तरह बोलना या उनको बोल सिखाए जाते हैं।
22- वृक्षों की चिकित्सा
23- भेड़, मुर्गा, बटेर आदि को लड़ाने की रीति
24- उच्चाटन की विधि
25- घर आदि बनाने की कारीगरी
26- गलीचे, दरी आदि बनाना
27- बढ़ई की कारीगरी
28- पट्टी, बेंत, बाण आदि बनाना यानी आसन, कुर्सी, पलंग आदि को बेंत आदि चीजों से बनाना।
29- तरह-तरह खाने की चीजें बनाना यानी कई तरह सब्जी, रस, मीठे पकवान, कड़ी आदि बनाने की कला।
30- हाथ की फूर्ती के काम
31- चाहे जैसा वेष धारण कर लेना
32- तरह-तरह पीने के पदार्थ बनाना
33- द्यू्त क्रीड़ा
34- समस्त छन्दों का ज्ञान
35- वस्त्रों को छिपाने या बदलने की विद्या
36- दूर के मनुष्य या वस्तुओं का आकर्षण
37- कपड़े और गहने बनाना
38- हार-माला आदि बनाना
39- विचित्र सिद्धियां दिखलाना यानी ऐसे मंत्रों का प्रयोग या फिर जड़ी-बुटियों को मिलाकर ऐसी चीजें या औषधि बनाना जिससे शत्रु कमजोर हो या नुकसान उठाए।
40-कान और चोटी के फूलों के गहने बनाना – स्त्रियों की चोटी पर सजाने के लिए गहनों का रूप देकर फूलों को गूंथना।
41- कठपुतली बनाना, नाचना
42- प्रतिमा आदि बनाना
43- पहेलियां बूझना
44- सूई का काम यानी कपड़ों की सिलाई, रफू, कसीदाकारी व मोजे, बनियान या कच्छे बुनना।
45 – बालों की सफाई का कौशल
46- मुट्ठी की चीज या मनकी बात बता देना
47- कई देशों की भाषा का ज्ञान
48 – मलेच्छ-काव्यों का समझ लेना – ऐसे संकेतों को लिखने व समझने की कला जो उसे जानने वाला ही समझ सके।
49 – सोने, चांदी आदि धातु तथा हीरे-पन्ने आदि रत्नों की परीक्षा
50 – सोना-चांदी आदि बना लेना
51 – मणियों के रंग को पहचानना
52- खानों की पहचान
53- चित्रकारी
54- दांत, वस्त्र और अंगों को रंगना
55- शय्या-रचना
56- मणियों की फर्श बनाना यानी घर के फर्श के कुछ हिस्से में मोती, रत्नों से जड़ना।
57- कूटनीति
58- ग्रंथों को पढ़ाने की चातुराई
59- नई-नई बातें निकालना
60- समस्यापूर्ति करना
61- समस्त कोशों का ज्ञान
62- मन में कटक रचना करना यानी किसी श्लोक आदि में छूटे पद या चरण को मन से पूरा करना।
63-छल से काम निकालना
64- कानों के पत्तों की रचना करना यानी शंख, हाथीदांत सहित कई तरह के कान के गहने तैयार करना।